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आज का चिंतन

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..26-11-2020*..🎋


✍🏻जब किसी में गुण दिखाई दे तो, मन को कैमरा बना लिजिए और जब किसी में अवगुण दिखाई दे तो, मन को आईना बना लिजिए।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷


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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻हाथ की लकीरें भी कितनी शातिर हैं, कमबख्त मुट्ठी में हैंं लेकिन, काबू में नहीं, घड़ी की फितरत भी अजीब है, हमेशा टिक-टिक कहती है मगर, ना खुद टिकती है और ना दूसरों को टिकने देती है।

🌹 *σм ѕнαитι.*🌹

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आंतरिक बल 820 


-सुगंध और कल्पना  । 


-जब हम बीमार लोगों के बारे सोचते हैं तॊ उनकी बीमारी की  तरंग हम पकड़ लेते हैं । जिस का स्वाद हमारे मुंह मेंं आने लगता है  । 


-कैंसर वाले रोगियो को अगर हम हर समय दिमाग मेंं रखेंगे तॊ   हमारे मुंह मेंं थू थू होने लगती है  । 


-डायबिटीज वाले रोगियो को दिमाग मेंं रखने से  से मुंह मेंं मीठा  मीठा अहसास होने लगता है ! 


-यह असर सब व्यक्तियों पर होता हैं परन्तु जिनकी कल्पना शक्ति तेज होती है उन पर दूसरों की  बीमारियो का असर उन पर सब से ज्यादा होता  हैं । 


-कुछ लोग पानी,  दूध या अन्य पदार्थ का एक घूँट पी  कर रख देते हैं । 


-उनकी कल्पना शक्ति बताती है  क़ि  इन पदार्थो को नहीं पीना क्योंकि इनकी ऊर्जा ठीक नहीं है   । 


-कभी कभी हम किसी विषय पर सोच रहे होते  हैं । अचानक कोई विचार आता है !  


-अचानक  बिजली सी हमारे जेहन मेंं कौंध जाती हैं और कुछ क्लिक कर जाती  है  । 


-हम कहते है यस  गोट दी  पोइंट  । 


-यही तॊ कल्पना है । 


-अचानक कोई  आडिया,  कोई कनसेप्ट  कोई कनक्लूजन दिमाग मेंं आ जाता है और हमें सही  जंचता है । 


-किसी व्यक्ति से मिलते ही जान जाते हैं  यह अच्छा है यह बुरा है । 


-फोन की  घंटी बजते ही जान जाते हैं  यह किस की  है । 


--ऐसा कैसे होता है 


-हमारे सहस्त्रार चक्र मेंं ऐसे आंन्टीना लगे हुए हैं ,  जो कोई व्यक्ति संसार के किसी भी कोने से हमारे बारे सोचता है तॊ उसे हम कैच कर जाते हैं । 


-विपदा मेंं पड़ने पर कुछ ऐसे इनोवेटिव रास्ते सूझ जाते हैं जो समान्य अवस्था मेंं सोचना संभव नहीं होता । 


-संकट आने पर  अचानक मूढ़  से मूढ़ व्यक्ति का भी दिमाग चलने लगता हैं और वह  अपने बचाव के नायब तरीके सोच लेता हैं । 


-जितना जितना साकारात्मक विचार या भगवान की याद मन मेंं  रहता है उतनी ही कल्पना शक्ति बढ़ती जाती है । 




- यह पुस्तक आप को पसंद आएगी ! पसंद आने पर अपनी  मर्जी से आर्थिक  सहयोग भेजना और अगर आप को आर्थिक चैलेंज है  तो अपने लिए गिफ्ट समझना  !  चाहे आप कितने भी व्यस्त हैं, विश्व का कल्याण कर रहे हैं या अंश मात्र भी तन,  मन, धन और संबंधों में अतृप्ति  है, कृपया  एक बार जरूर पढ़ें ! फिर भी आप की मर्जी है ! आप के पढ़ने मात्र से,  आप को , आप के आस पास वालों को , आप के प्रिय लोगों और सारे विश्व को लाभ   मिलेगा !



*ओमशान्ति*



                    *कर्मो का खेल*


      बच्चे, इस रंग मंच पर कर्मों का बहुत सूक्ष्म खेल चलता है, जिसे हर आत्मा पूरी तरह समझ नहीं पाती ... जिस कारण वह अपना हिसाब-किताब बना लेती है ... फिर उसे ही चुक्तु करना पड़ता है। 


       जब आप किसी भी कर्मन्द्रिय को use करते हो अर्थात् आँख द्वारा कुदृष्टि होती है, तो वो भी पाप कर्म बन जाता है।


      जबकि यह संकल्पों द्वारा किया गया पाप कर्म है जोकि योग द्वारा ही चुक्तु किया जा सकता है।


      दूसरा है वाचा द्वारा - जब आप किसी भी विकारों में फँसी हुई कमज़ोर परवश आत्मा को कुछ ऐसी बात बोलते हो जो उसे चुभ जाए अर्थात् वह दुःखी हो जाए तो वह आपका हिसाब-किताब बनता है, जिसको आपको शरीर द्वारा चुक्तु करना पड़ता है।


      इसलिए बाबा कहते हैं, बच्चे अब मुख द्वारा बोलना बन्द करो। अब ज़रूरत का ही बोलो। 


       देखो बच्चे, कमज़ोर आत्मा तो पहले से ही अपने संस्कारों से परेशान है और वह उसे खत्म करना चाहती है और यदि आप भी सभी के बीच हल्की-सी भी कोई चुभती बात बोल देते हो तो वह एक बार दुःखी हो जाती है जोकि आपका हिसाब-किताब बन जाता है।


       इसलिए किसी आत्मा के शुभचिन्तक बन समझानी देनी भी हैं तो अकेले में बस एक ही बार दो। फिर उसे बाप हवाले कर दो अन्यथा आप छोटा-छोटा सा हिसाब-किताब बना लेते हो जो फिर चुक्तु भी तो करना पड़ेगा...!


      अब जो समय जा रहा है वह केवल कमाई का है इसलिए अब नया हिसाब-किताब बनाना बन्द करो और हर आत्मा के प्रति रहम, प्रेम और कल्याण की भावना रख मन्सा सेवा करो।


       इससे आपका दुआओं का खाता जमा होगा और आप जल्दी ही अपनी मंज़िल पर पहुँच जाओगे।


      जब कोई भी पाप कर्म संकल्पों द्वारा होता है तो वह योग द्वारा चुक्तु हो जाता है और यदि कर्मणा में आ जाता है तो शरीर द्वारा और सम्बन्ध-सम्पर्क द्वारा चुक्तु करना पड़ता है।


*ओम शान्ति*

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