🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃
💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..05-12-2020*..🎋
✍🏻जन्म होने पर बटने वाली मिठाई से शुरू हुआ जिंदगी का यह खेल, श्राद्ध की खीर पर आकर समाप्त हो जाता है, यही जीवन की मिठास है।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *σм ѕнαитι*🌷
🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃
💞💞💞💞💞💞💞
ओम शांति
*_सबसे बुरी परिस्थितियों को पार किए बिना कोई भी जीवन के सर्वश्रेष्ठ मोड़ों से गुजर नहीं सकता।_*
*_जीवन में हर परिस्थिति का सामना करने के लिए हिम्मत रखे।_*
*_जीतने वाले कभी हार नही मानते और हार मानने वाले कभी जीतते नही।_*
*परिस्थिति का सामना करने के लिए साहस रखें तो आप अपनी शक्तियों पर करना शुरू कर देंगे*
ॐ शांति
💞💞💞💞💞💞💞
♻🍁♻🍁♻🍁♻🍁♻
💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻सकारात्मक सोच का मतलब यह नहीं कि हम हर बार ये आशा करें कि सब कुछ श्रेष्ठ हो बल्कि उसका मतलब ये स्वीकार करना है कि जो हो रहा है वही श्रेष्ठ है।
🌹 *σм ѕнαитι.*🌹
♻🍁♻🍁♻🍁♻🍁♻
💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*05 दिसंबर:-*_ जीवन में मधुरता की खुशबु लेने के लिए सहनशीलता का गुण धारण करना जरुरी है।
🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
💥🇲🇰💥🇲🇰💥🇲🇰💥🇲🇰💥🇲🇰

✳️💠✳️💠✳️💠✳️💠✳️💠✳️ ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
*आइये जाने पाण्डवों का आध्यात्मिक रहस्य*
_★ कहा जाता है कि हर मनुष्य में दो प्रकार की प्रवृत्ति रहती हैं , एक दैवी प्रवृत्ति और दूसरी आसुरी प्रवृत्ति ! दैवी प्रवृत्ति अर्थात् जो धर्म पक्ष का वाचक है, पाण्डव वृत्ति समाई हुई है ! संसार में आज पाण्डव कितने हैं अर्थात् भगवान से प्रीत करने वाले कितने प्रतिशत में हैं ? इसलिए दिखाया गया है कि सौ कौरव और पांच पाण्डव अर्थात् मुट्ठी भर ! दुनिया को अगर सौ प्रतिशत में ले लिया जाए तो उसमें से भगवान से प्रीत करने वाले संसार में कितने लोग होंगे ? सिर्फ पाँच प्रतिशत लोग ही सच्चे रूप से ईश्वर से प्रीत करते हैं , स्वार्थ से नहीं ! सच्चे दिल से जो ईश्वर से प्रीत करता है , वे ही पाण्डव हैं !_
_👤युधिष्ठिर :- का अर्थ है आध्यात्मिक व्यक्त्तित्व वाला ! युद्ध जैसी परिस्थिति में भी जो स्थिर बुद्धि , संतुलित बुद्धि रहे , उसको कहते हैं युधिष्ठिर ! आज समय ऐसा है जहाँ जीवन में हर व्यक्ति को संधर्ष करना पड़ रहा है ! जैसे जीवन ही एक युद्ध बन गया है , यह जीवन एक ऐसा कर्म क्षेत्र है जहाँ हर समय इंसान को नित्य युद्ध करना पड़ता है ! ऐसी युद्ध जैसी परिस्थिति में कई बार मनुष्य अपना मानसिक संतुलन खो देता है ! केवल एक प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो अपना संतुलन बनाए रखते हैं !_
_👤भीम:- जो आत्म शक्त्ति से सम्पन्न है ! जिसके पास आत्म-बल है , जिसके सामने कोई भी परिस्थिति ठहर नहीं सकती ! उसके अन्दर जड़ से उखाड़ देने की क्षमता है , इतनी विल-पावर जिस में हो उसे भीम कहा गया ! आज की दुनिया में इतने आत्मिक-शक्त्ति से युक्त्त या इतना मनोबल धारण करने वाले कितने लोग होंगे ? सिर्फ एक प्रतिशत !_
_👤 अर्जुन :- अर्थात् जिसमें अर्जन करने के भाव है ! अर्जुन को भगवान ने जो कहा उसे उसने ' हाँ जी ' करके स्वीकार किया फिर उसे कार्य में लाया ! ऐसे अर्जन करने के भाव भी कितने प्रतिशत लोगों में होता है ! सिर्फ एक प्रतिशत लोग ऐसे हैं , जो अर्जन करना भी और कराना भी जानते हैं !_
_👤 नकुल :- अर्थात् जो नियमों में चलने वाला जिसको आज की दुनिया में कहते हैं सिद्धांवादी व्यक्ति , जो अपने जीवन को संयमित रखता है ! ऐसे लोग भी आज के संसार में कितने हैं , केवल एक प्रतिशत !_
_👤 सहदेव :- अर्थात् जो हर कार्य में अपना सहयोग देता है ! विशोषकर जहाँ कहीं शुभ कार्य होता है , धार्मिक कार्य होता है ,आध्यात्मिक कार्य होता है , बिना किसी अपेक्षा के सहयोग ऐसे सहदेव भी आज संसार में कितने प्रतिशत होंगे ? सिर्फ एक प्रतिशत और वो सहयोग भी किस आधार से दे सकते हैं , उन्हें दिव्य दृष्टि और दिव्य बुद्धि का वरदान होता हैं !_
_★ ये पाँच पाण्डव हैं आज की दुनिया में ! आज हम सभी कहाँ हैं ? क्या हम युधिष्ठिर हैं ? भीम हैं ? अर्जुन हैं ? नकुल हैं ? या सहदेव हैं ? आज तो हम यही कहेंगे कि आप सभी यर्थार्थ रूप में अर्जुन हैं ! ऐसे अर्जुनों के प्रति ही श्रीमदभगवदगीता का ज्ञान है ! इसके विपरीत देखा जाए तो कौरव हैं !_
✳️💠✳️💠✳️💠✳️💠✳️💠✳️

👏🌹😊अनमोल मोती-
हर इंसान खुद की दृष्टि में सही होता है, लेकिन व्यवहारिक दृष्टि से किसी से हमारी भावनाओं या विचारों का तालमेल सही न जमे तो हमें समय व शक्ति को यथासंभव सही दिशा में लगाते हुए , उनसे तटस्थ हो जाना ही सही समाधान होता है,
*ओम शांति, सुप्रभात*
👍💖😊
♻🍁♻🍁♻🍁♻🍁♻🍁♻
अनमोल वचनः
पैसे से सिर्फ सुविधायें मिलती हैं सुख नहीं,सुख मिलता है आपस के प्यार से व अपनों के साथ से, अगर सिर्फ सुविधाओं से सुःख मिलता तो अमीर लोगों को कभी दुःख न होता....
🙏ओम् शान्ति🙏
🌹आपका दिन शुभ हो 🌹
♻🍁♻🍁♻🍁♻🍁♻🍁♻
💞💞💞💞💞💞💞
ओम शांति
*_सबसे बुरी परिस्थितियों को पार किए बिना कोई भी जीवन के सर्वश्रेष्ठ मोड़ों से गुजर नहीं सकता।_*
*_जीवन में हर परिस्थिति का सामना करने के लिए हिम्मत रखे।_*
*_जीतने वाले कभी हार नही मानते और हार मानने वाले कभी जीतते नही।_*
*परिस्थिति का सामना करने के लिए साहस रखें तो आप अपनी शक्तियों पर करना शुरू कर देंगे*
ॐ शांति
💞💞💞💞💞💞💞
♻🍁♻🍁♻🍁♻🍁♻🍁♻
अनमोल वचनः
पैसे से सिर्फ सुविधायें मिलती हैं सुख नहीं,सुख मिलता है आपस के प्यार से व अपनों के साथ से, अगर सिर्फ सुविधाओं से सुःख मिलता तो अमीर लोगों को कभी दुःख न होता....
🙏ओम् शान्ति🙏
🌹आपका दिन शुभ हो 🌹
♻🍁♻🍁♻🍁♻🍁♻🍁♻
✻ *जीवन में शान्ति और सुकून चाहिए तो जीवन जीने के तरीके को बदलना पड़ेगा।* ✻
✦ आध्यात्मिकता हमे जीवन को सही तरह से जीने का तरीका बताती है। आध्यात्मिकता में हर बात का समाधान है। भौतिकता में दिखावा है, झूठ है, आवरण पर आवरण चढ़ा हुआ है। ऐसे नही कि हम सच्चाई को जानते नही, जानते हैं लेकिन एक लहर की तरह सच्चाई मन में उठती है फिर बह जाती है। और फिर से उसी आसक्ति में बंधन में खो जाते हैं।
✦ हमारा जीवन उस कटी पतंग की तरह है जो चील को आसमान में उड़ते हुए देखती है और सोचती है कि इसको ना तो कोई बंधन है, ना कोई डोरी है और मुझे डोरी से बाँधा गया है जिस पर किसी और का नियंत्रण है। व्यर्थ के इस बंधन को मैं भी काट देती हूँ। वह डोरी काट देती है। हवा का एक झोंका आता है जो उसे उड़ा कर दूर ले जाता है। और वह कांटो वाले पेड़ में उलझ जाती है।
✦ पतंग की तरह हम भी यही गलती करते हैं। मनमर्जी से चल कर स्वतंत्र होने की सोचते है पर ज्यादा बंधनो में बंध जाते हैं। हम अध्यात्म रूपी डोरी को काट देते हैं और फिर कटी पतंग की तरह कांटो के उलझते रहते हैं।
✦ आध्यात्मिकता हमे सिखाती हैं...जल्दी उठ कर भगवान को याद करो, किसी से गलती हो गई तो माफ़ कर दो, बीती को भुलाना सीखो, किसी से अनबन हुई तो उसे किनारे कर पुन: हाथ मिला लो, नम्र बन जाओ ये बाते बन्धन नही बल्कि हमारी सुरक्षा हैं।
✦ भगवान कहते हैं...अपने आप को बदलो। दुःख भीतर से निकलता है इसलिए सुधार भी भीतर से होगा। और भीतर से सुधार होगा आध्यात्मिक ज्ञान को जीवन में धारण करने से।
✦ ईर्ष्या को जीवन से निकाल दे...तो मन में ख़ुशी रहेगी जो मन दर्पण से सपष्ट दिखाई देगी। ख़ुशी तब कम होती है जब मन में किसी के प्रति ईर्ष्या या द्वेष का भाव उत्तपन्न होता है परन्तु ज्ञानवान मनुष्य को चाहिए कि जब उसके मन में ऐसा भाव उतपन्न हो तब सोचें कि यह तो मेरी गिरावट की निशानी है।
✦ संसार में हर एक आत्मा का अपना अपना पार्ट है। कोई भी अपने पुरुषार्थ से या पूर्व कर्म की प्रालब्ध के रूप में ऊपर चढ़ता है तो उसको देख कर तो यह सोचना चाहिए कि इसने कभी ना कभी कोई ऐसा उच्च कर्म किया है जिससे इसको ऊँची गति मिली है, अब मैं भी उच्च पुरुषार्थ करूं।
✦ यहां तो हर एक का पार्ट अलग अलग है। सब एक तो हो ही नही सकते। दूसरों के प्रति ईर्ष्या या द्वेष रखने से दूसरों की प्रालब्ध कम तो हो नही जाती बल्कि अपने ही जीवन में गिरावट आने के फलस्वरूप् अपनी ही प्रालब्ध में घाटा पड़ता है और अपने ही मन में अशांति आती है, आध्यात्मिक उन्नति भी रुक जाती है और योगाभ्यास में भी विघ्न पड़ता है।
✦ अत: सही तरीका तो यही है कि दूसरों की उन्नति को देख कर हम अपना पार्ट अपने ही पुरुषार्थ से उच्च बनाने की कोशिश करें। दूसरों की उन्नति को देख कर यदि हम अपने मन में खुश होंगे तो निश्चय ही यह दृष्टिकोण उन्नति पर ले जाने वाला सिद्ध होगा।
*सदैव प्रसन्न रहिये!!*
*जो प्राप्त है-पर्याप्त है!!*
*❤️🙏🏻ओम् शान्ति जी🙏🏻❤️
▱▰▱▰▱▰▱▰▱▰▱▰▱▰▱▰▱