बीमारियों का शिकार हो रहे ग्रामीण
कृषि छोड़ उधोग लगाने की मांग करने वालों सावाधान
*छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के आसपास ओधोगिक प्रदूषण का कहर*
*नियंत्रण से बाहर हुआ ओधोगिक प्रदूषण जिम्मेदार मौन*
मकान की छतों तालाबों के पानी पर प्रदूषण की काली परत
बीमारियों का शिकार हो रहे ग्रामीण
सुरेन्द्र जैन/धरसीवां
यदि आप भी विकास का पैमाना खेती किसानी कृषि कार्य की जगह लोहा बनाने वाली फेक्ट्रियो को मानते हैं तो एक बार छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अंतर्गत धरसीवां के ओधोगिक क्षेत्र सिलतरा जरूर आएं यहां कुछ दिन रहकर प्रदूषण के बीच जरूर बिताएं तालाबों के पानी पर जमी प्रदूषण की काली परत हटाकर जरूर नहाएं मकानों की छतो पर काली परत देखें और दिखाएं जमीन के अंदर तक तेजी से फैले प्रदूषण से दूषित भूजल का सेवन भी करें फिर अपने गांव वापस जाकर अंतर देखें कि आपके गांवो के हरे भरे खेतो मेड़ो पर लगे वृक्षो से जंगलों से मिलने वाली शुद्ध वायु शुद्ध पानी ठीक है या उधोगो के प्रदूषण के बीच जीवन ठीक है यह हम इसलिए कह रहे क्योकि उधोगो के प्रदूषण से आज छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के आसपास अधिकांश ग्रामीण अंचलों के लोगो का जीना मुहाल है औधोगिकीकरण के पहले तक जो ग्रामीण खेती किसानी कर कम खर्च में स्वस्थ्य जीवन जीते थे आज वह प्रदूषण के बीच टेंशनयुक्त जीवन अस्वस्थ्य जीवन जीने मजबूर हैं।
कहर बरपा रहा प्रदूषण
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के आसपास सांकरा सिलतरा सोंडरा मुरेठी आदि गांवों में ओधोगिक इकाइयों का बढ़ता प्रदूषण कहर बरपा रहा है....धरसीवां के ओधोगिक क्षेत्र सिलतरा की फेक्ट्रियो से रातभर लगातार ओर दिन में रुक रुककर निकलने बाले जहरीले धुंआ की काली परत आसपास के तालाबों के पानी के ऊपर मकानों की छतों पर ओर मकानों के अंदर तक पहुच रही है.....अपनी सभी सीमाएं लांघ चुके ओधोगिक प्रदूषण से हालात ये हैं कि राजधानी के आसपास ग्रामीण इलाकों में लोग अपने कपड़े खाने की सामग्री भी बाहर छतों पर सुखाने नही रख सकते यदि रख दी तो ओधोगिक प्रदूषण की काली छाया उस पर आ जाती है
क्या कहते हैं जिला पंचायत सदस्य
जिला पंचायत सदस्य राकेश यादव ने बढ़ते ओधोगिक प्रदूषण को लेकर कहा कि जब तक तन्त्र में भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारी रहेंगे प्रदूषण से मुक्ति मिलना संभव नही लग रहा उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के आसपास ही जब प्रदूषण नियंत्रण से बाहर है तो अन्य ओधोगिक इलाको में क्या हालात होंगे समझा जा सकता है....राकेश यादव ने कहा कि प्रदूषण के खिलाफ सत्ता में रहते हुए भी भाजपाइयों ने तत्कालीन विधायक की अगुवाई में हल्ला बोल अभियान चलाया था तब कुछ अंकुश लगा था लेकिन इसके बाद आज हालात बद से बदतर हो गए हैं यदि जल्द ही प्रदूषण फैलाने वाले उधोगो के खिलाफ सख्ती नही कि गई तो अब ग्रामीणो के साथ वह आंदोलन की तैयारी करेंगे।



