वीडियो--जब प्रेम के दो शब्द सुनकर भावुक हुए किसान की आंखों से अश्रुधारा बहने लगी...
जब प्रेम के दो शब्द सुनकर भावुक हुए किसान की आंखों से अश्रुधारा बहने लगी...
सुरेन्द्र जैन/धरसीवां
भारत ही नही अपितु सारे संसार का पालनहारा अन्नदाता किसान कितनी तकलीफें झेलकर भी अपना धर्म निभा रहा है लेकिन उसे कभी किसी से प्रेम के दो शब्द भी शायद नसीब नही होते इसीलिए तो जैंसे ही एक गरीब वृद्ध किसान से प्रेमपूर्वक चर्चा की उसके पैरों में जुते चप्पल नही होने का कारण पूंछा तो उस किसान की आंखों से अश्रुधारा निकल पड़ी हालांकि इस किसान ने रोने का कारण पूछने पर कहा ये तो प्रेम के आंसू है कभी किसी ने इतने अच्छे से प्रेम से पूंछा नही....जी हां यह किसान छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के समीप धरसीवां के कुम्हारी गांव का एक छोटा सा मात्र एक एकड़ जमीन का किसान है.....कुम्हारी में धान खरीदी के शुभारंभ ओर नवीन सोसायटी भवन के भूमिपूजन समारोह के पश्चात जब इस किसान पर इस प्रतिनिधि की नजर पड़ी तो उसे नँगे पैर देख आश्चर्य हुआ .....नँगे पैर धान तौलाने आये इस किसान का नाम उसने डेरहा बताया....डेरहा नामक वृद्ध किसान से चर्चा शुरू कर जैंसे ही उससे पूछा कि आपके पैरों में जुते चप्पल नही क्या आप नँगे पैर ही खेती किसानी करते हैं तब अचानक किसान की आंखों से अश्रुधारा फूट पड़ी उसने अपनी पगड़ी खोली ओर आंसू पोंछने लगा .....इस प्रतिनिधि को लगा कहीं हमने कुछ गलत तो नही पूंछ लिया जो यह वृद्ध किसान रोने लगा जैंसे ही उससे पूंछा क्या हुआ आप क्यों रोने लगे तब उसका जबाब था प्रेम के कारण आज तक उससे किसी ने प्रेम से ऐंसे नही पूछा...प्रेम के दो शब्द सुनकर भावुक हुए किसान डेरहा ने बताया कि उसकी एक एकड़ जमीन है पहले तो एक एकड़ में ही खेती किसानी करता था क्योकि खेती किसानी घाटे का सौदा बन गई थी लेकिन अब जब से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने समर्थन मूल्य पच्चीस सौ रुपये किया है तब से दो एकड़ जमीन रेगा पर लेकर 3 एकड़ में वह खुद कृषि कार्य करता है....यह सीमांत कृषक अपनी कृषि भूमि पर स्वयं ही पसीना बहाता है और धान की खेती करता है खेती किसानी ही एकमात्र उसकी आय का स्रोत है जिससे वह अपनी पत्नी व बच्चो का लालन पालन करता है जरूरत है ऐंसे छोटे किसानों की हर संभव मदद करने की जिनकी आय का स्रोत सिर्फ कृषि है कृषि के अलावा जिनके पास ओर कोई धन्धा नही ऐंसे छोटे किसानों के लिए भी भूपेश सरकार को कोई विशेष नीति बनानी होगी।
