आज का सुविचार
आज का चिन्तन(सुविचार)
शुक्रवार, 22 जनवरी 2021
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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..22-01-2021*..🎋
✍🏻जिन्दगी में हम कितने सही और कितने गलत हैं। यह सिर्फ दो ही शख्स जानते हैं। परमात्मा या अंतरआत्मा।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *σм ѕнαитι*🌷
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻अपनी ग़लती स्वीकार कर लेने में लज्जा की कोई बात नहीं है, इससे दूसरे शब्दों में यही प्रमाणित होता है कि कल की अपेक्षा में आज आप अधिक समझदार है, इसलिए सदा अपनी गलती को स्वीकार करें छिपाए नहीं।
🌹 *σм ѕнαитι.*🌹
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*👌🏾👌🏾शानदार बात👌🏾👌🏾*
*जीवन" में "तकलीफ़" उसी को आती है, जो हमेशा "जिम्मेदारियां" उठाने को तैयार रहते है,*
*और जिम्मेदारियां लेने वाले कभी हारते नही, या तो "जीतते" है, या फिर "सिखते" है.*
*अभिमन्यु की एक बात बड़ी शिक्षा देतीं हैं ...*
*" हिम्मत से हारना,*
*पर*
*हिम्मत मत हारना "...*
*🍃सुप्रभात!आपका दिन शुभ हो*🍃
खुद को आत्मा समझने से क्या लाभ होता है?
इस प्रश्न का उत्तर जिन्होंने दिया उनका संकलन निम्न प्रकार है:-
1 देह का भान निकलने लगता है।
2 देह अभिमान टूटता जाता है।
3 कर्मेन्द्रियां शांत और शीतल होने लगती है।
4 आत्मा भाई भाई की दृष्टि पक्की हो जाती है।
5 परमात्मा बाप से बुद्धि योग बिना मेहनत के सहज ही जुट जाता है।
6 संस्कार परिवर्तन होने लगते हैं।
7 आदि और अनादि संस्कार इमर्ज होने लगते हैं और द्वापरयुगी संस्कार मर्ज होने लगते हैं।
8 मन और बुद्धि का भटकना बंद हो जाता है।
9 दैहिक आकर्षण खत्म हो जाती है।
10 संबंधों में मधुरता आने लगती है।
11 आत्मा सतोप्रधान बन जाती है।
12 कर्म श्रेष्ठ होने लगते हैं।
13 बुद्धि विशाल एकाग्र और एक रस होने लगती है।
14 सर्व के प्रति रहम और कल्याण की भावना जागृत हो जाती है।
15 कर्म श्रेष्ठ होने लगते हैं।
16 सब अपने लगते हैं।
17 काया निरोगी और आयु बड़ी होने लगती है।
18 सर्व के प्रति दृष्टिकोण आत्मिक हो जाता है।
19 आत्मा संपूर्ण निर्विकारी बन जाती है।
20 आत्मा अपने सत्य स्वरूप में स्थित हो जाती है और परदर्शन और परचिंतन समाप्त हो स्वयं चिंतन में लग जाती है।
21 नष्टोमोहा स्थिति शीघ्र होती है।
22 व्यर्थ चिंतन से मुक्ति मिलती है।
22 कर्म सतोप्रधान होने लगते हैं।
23 आत्मिक प्रेम सर्व प्रति रहता है।
24 खुशी अविनाशी रहती है।
25 अविनाशी शान्ति की स्थिति रहती है।
26 मनसा वाचा कर्मणा सबको सुख देते हैं।
27 परिस्थिति आने पर भी निश्चिन्त रहते हैं।
28 आकर्षण मूर्त बन जाते हैं।
29 कम नींद लेकर भी सदा अथक दिखाई देते हैं।
30 सफलता गले के हार बन जाती है।
31 आत्मा और परमात्मा के बीच का अन्तर समाप्त होने लगता है।
ओम शांति।।
💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*22 जनवरी:-*_ एक शब्द की याद अगर सारे दिन में रहे की "मेरे पास अपने भाग्य को बनाने की कलम है" तो मन स्वतः ही *बुराई* से छुट जाएगा।
🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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🙏 *ॐ शांति* 🙏
कौआ अगर शहर की सबसे ऊँची इमारत पर भी बैठ जाए तो भी वह *कौआ* ही रहता है... *बाज़* नहीं बन पाता। उसी तरह मनुष्य अपने *कर्मों* से महान बनता है, ऊंचे *पदों* पर बैठने से नहीं...
🌸 सुप्रभात...
💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
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अनमोल वचन :
मत रख ऐ इंसान दिल में नफरत,कहते हैं कि जिस दिल में नफरत होती है उस दिल में भगवान नहीं रहते़.....
🙏 ओम् शान्ति 🙏
🌹आपका दिन शुभ हो 🌹
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♦️♦️♦️रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️
*🙏 अभिमान 🙏*🏵️
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श्रीकृष्ण भगवान द्वारका में रानी सत्यभामा के साथ सिंहासन पर विराजमान थे। उनके पास ही गरुड़ और सुदर्शन चक्र भी बैठे थे। बातों ही बातों में रानी सत्यभामा ने श्रीकृष्ण से पूछा, 'हे प्रभु, आपने त्रेता युग में राम के रूप में अवतार लिया था, सीता आपकी पत्नी थीं। क्या वे मुझसे वे ज्यादा सुंदर थीं?' कृष्ण समझ गए कि सत्यभामा को अपने रूप का अभिमान हो गया है। तभी गरुड़ ने कहा कि भगवान क्या दुनिया में मुझसे भी ज्यादा तेज गति से कोई उड़ सकता है?
सुदर्शन चक्र से भी रहा नहीं गया और वह भी कह उठे कि भगवान, मैंने बड़े-बड़े युद्धों में आपको विजयश्री दिलवाई है। क्या संसार में मुझसे भी शक्तिशाली कोई है? भगवान मंद-मंद मुस्कुरा रहे थे। वे जान रहे थे कि उनके इन तीनों भक्तों को अहंकार हो गया है और इनका अहंकार नष्ट होने का समय आ गया है। ऐसा सोचकर उन्होंने गरुड़ से कहा' हे गरुड़! तुम हनुमान के पास जाओ
और कहना कि भगवान राम, माता सीता के साथ उनकी प्रतीक्षा कर रहे हैं। गरुड़ भगवान की आज्ञा लेकर हनुमान को लाने चले गए। इधर श्रीकृष्ण ने सत्यभामा से कहा कि देवी आप सीता के रूप में तैयार हो जाएं और स्वयं कृष्ण ने राम का रूप धारण कर लिया। मधुसूदन ने सुदर्शन चक्र को आज्ञा देते हुए कहा कि तुम महल के प्रवेशद्वार पर पहरा दो। ध्यान रहे कि मेरी आज्ञा के बिना महल में कोई प्रवेश न करे। भगवान की आज्ञा पाकर चक्र महल के प्रवेश द्वार पर तैनात हो गए।
गरुड़ ने हनुमान के पास पहुंच कर कहा कि हे वानरश्रेष्ठ! भगवान राम माता सीता के साथ द्वारका में आपसे मिलने के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं। आप मेरे साथ चलें। मैं आपको अपनी पीठ पर बैठाकर शीघ्र ही वहां ले जाऊंगा। हनुमान ने विनयपूर्वक गरुड़ से कहा, आप चलिए, मैं आता हूं। गरुड़ ने सोचा, पता नहीं यह बूढ़ा वानर कब पहुंचेगा। खैर मैं भगवान के पास चलता हूं। यह सोचकर गरुड़ शीघ्रता से द्वारका की ओर उड़े। पर यह क्या, महल में पहुंचकर गरुड़ देखते हैं कि हनुमान तो उनसे पहले ही महल में प्रभु के सामने बैठे हैं। गरुड़ का सिर लज्जा से झुक गया।
तभी श्रीराम ने हनुमान से कहा कि पवन पुत्र तुम बिना आज्ञा के महल में कैसे प्रवेश कर गए? क्या तुम्हें किसी ने प्रवेश द्वार पर रोका नहीं? हनुमान ने हाथ जोड़ते हुए सिर झुका कर अपने मुंह से सुदर्शन चक्र को निकाल कर प्रभु के सामने रख दिया हनुमान ने कहा कि प्रभु आपसे मिलने से मुझे इस चक्र ने रोका था, इसलिए इसे मुंह में रख मैं आपसे मिलने आ गया। मुझे क्षमा करें।
भगवान मंद-मंद मुस्कुराने लगे। हनुमान ने हाथ जोड़ते हुए श्रीराम से प्रश्न किया, हे प्रभु! आज आपने माता सीता के स्थान पर किस दासी को इतना सम्मान दे दिया कि वह आपके साथ सिंहासन पर विराजमान है। अब रानी सत्यभामा के अहंकार भंग होने की बारी थी। उन्हें सुंदरता का अहंकार था, जो पलभर में चूर हो गया था। रानी सत्यभामा, सुदर्शन चक्र व गरुड़ तीनों का गर्व चूर-चूर हो गया था। तीनों भगवान की लीला समझ रहे थे। तीनों की आंख से आंसू बहने लगे और वे भगवान के चरणों में झुक गए।
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राजयोग के अभ्यास द्वारा बनें निर्भय और निश्चिन्त
_🔸मन के प्रकम्पन ही हमें दूसरों के पास या उनसे दूर ले जाते हैं हम vibrations के सिद्धांत द्वारा पड़ोसियों की भी समस्याओं को दूर कर सकते हैं ।सवेरे उठ स्वमान करें – मैं आत्मा मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ, फिर उनको भ्रकुटी के बीच चमकती आत्मा देख संकल्प करें ये तो मेरे गुड friends हैं , मेरे शुभचिंतक हैं , हमारे बीच सब कुछ ठीक हो जाएगा ।spiritual power आपको ऐसे संकल्प करने में मदद करेगी ।परमात्मा से बहुत अच्छा connection जोडें और उन्हें भी मदद देने के लिए आग्रह करें ।_
_🔸मन में भय का कारण आपके पूर्व जन्म या इस जन्म के कुछ बुरे अनुभव हो सकते हैं । इसको दूर करने के लिए 108 दिन तक स्वमान की practice करें - मैं आत्मा अजर , अमर , अविनाशी हूँ ,मैं आत्मा शिव शक्ति हूँ ,शिव की शक्तियाँ मेरे पास हैं । सुबह उठते ही कम से कम सात बार संकल्प करें – मैं आत्मा मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ , निर्भय हूँ । घर से कहीं बाहर जाने से पहले संकल्प करें – मेरे साथ सर्वशक्तिवान है , उनकी छत्रछाया में मैं सुरक्षित हूँ ।_
_🔸कुछ विशेष प्राप्ति के लिए मास्टर सर्वशक्तिवान के स्वमान का उपयोग करें।भगवानुवाच- जो मास्टर सर्वशक्तिवान का अभ्यास करते हैं वे अपनी संकल्प शक्ति द्वारा बहुत कुछ कर सकते हैं। अपराधबोध की समाप्ति और योग से प्राप्तियाँ_
_🔸स्वयं परमात्मा ने आकर हमें हमारा और स्वयं का परिचय दिया है , सृष्टि चक्र का ज्ञान समझाया है। उन्होंने ने ही राजयोग की शिक्षा प्रदान कर हमारी सभी उलझनें समाप्त कर दी हैं । इस योग के द्वारा हम वह करने में सक्षम हो गए जो हम करना चाहते हैं क्योंकि योग से ही मन की शक्ति , बुद्धि की शक्ति बढ जाती है और उनका शुद्धिकरण होने लगता है । योगबल से अपने आप ही संस्कार परिवर्तन होने लगते हैं , दिव्य संस्कार हम में प्रवेश करने लगते हैं ।_
_🔸मन में अपराधबोध होने का कारण है देह-अभिमान और माया से हार । इस अपराधबोध को नष्ट करने के लिए हमें मन में दृढ़ संकल्प रखना चाहिए कि मुझे अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढना है । Hard worker बनें , आलस्य-अलबेलेपन से दूर रहें | दूसरों को आत्मा देखने की practice करें । परमात्मा से योग लगाकर पवित्र बनने की शक्ति लें ।
ओम शांति
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