आज का चिंतन(सुविचार) - fastnewsharpal.com
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आज का चिंतन(सुविचार)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..01-02-2021*..🎋


✍🏻विश्वास और प्रेम में एक ही समानता है, दोनों में से किसी को भी जबरदस्ती पैदा नहीं किया जा सकता है।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *ॐ शांति*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻खुद को कभी गिरने ना दें, क्योंकि गिरी हुई इमारत की ईंट तक लोग ले जाते हैं और खड़ी इमारत को कोई हाथ तक नही लगाता।

🌹 *σм ѕнαитι.*🌹

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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*01 जनवरी:-*_ ये आश मत रखिये के दूसरे आपसे प्यार करे व् आप पर ध्यान दे, इसके बजय आप दुसरो से प्यार करे वा उसका ध्यान रखे।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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अनमोल वचन :

जैसे हर ताले की एक चाबी होती है,वैसे ही हर मुश्किल का एक हल होता है।आज से हम ये विश्वास रखें कि हमारे साथ सदा है भगवान,इसलिए हमारी हर मुश्किल का हो जाता है समाधान.........

🙏ओम् शांति 🙏

🎈आपका दिन शुभ हो🎈

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*सुख-दुख* ॐ शान्ति
*हम होते ही कौन हैं , मालिक के काम में दखलअंदाज़ी करने वाले ....*
*जो कुछ हो रहा है , उस मालिक की मर्ज़ी से ही तो हो रहा है ..*
*इसलिये कभी जीवन में दुःख भी आ जायें तो चिन्ता नहीं करनी चाहिये ..*
*क्योंकि उसकी ☝🏻गत वो ही जाने , न जाने कौन से कर्म कटवाने होंगे , कौनसा लेनदेन चुकता करना होगा , हमें क्या खबर ?*
*इसलिये मालिक की रज़ा में राज़ी रहने में ही समझदारी है ..*
*मालिक के भाणे में रहना सीखें हम लोग ...और बाकी सब कुछ उस परमपिता परमात्मा पर छोड़ दें , विश्वास रखें बस ... अपने विश्वास को डगमगाने बिल्कुल ना दें ... फिर देखें कि कैसे हमें मालिक इन दुःखों को सहन करने शक्ति हमें बख्शते हैं ...*
*सहनशक्ति तो क्या मालिक इन दुःखों को कैसे पहाड़ से राई में तब्दील कर देते हैं , हमें पता तक नहीं चलता ...*
*बस जरूरत है अटूट विश्वास और सच्ची सेवा की , जिसकी ओर तो हम लोगों का बहुत कम ध्यान जाता है ....*
*इसलिये हम लोग ये प्रण करें कि उठते-बैठते , सोते-जागते ,चलते-फिरते , खाते-पीते , काम-काज करते , कभी-भी , कहीं-भी अपनी असली कमाई यानी सिमरन-ध्यान की ओर ध्यान दें ....ना कि बाकी की फालतू और बेमतलब की चीज़ों की ओर .....*
*फिर देखें कि सच्चा सुख क्या होता है..!!*
     ॐ शांति
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♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️


👉 निंदा का फल 🏵️ 

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एक बार की बात है की किसी राजा ने यह फैसला लिया के वह प्रतिदिन 100 अंधे लोगों को खीर खिलाया करेगा।


एक दिन खीर वाले दूध में सांप ने मुंह डाला और दूध में विष डाल दी और ज़हरीली खीर को खाकर 100 के 100 अंधे व्यक्ति मर गए।


राजा बहुत परेशान हुआ कि मुझे 100 आदमियों की हत्या का पाप लगेगा।


राजा परेशानी की हालत में अपने राज्य को छोड़कर जंगलों में भक्ति करने के लिए चल पड़ा, ताकि इस पाप की माफी मिल सके।


रास्ते में एक गांव आया। राजा ने चौपाल में बैठे लोगों से पूछा की क्या इस गांव में कोई भक्ति भाव वाला परिवार है ? ताकि उसके घर रात काटी जा सके।


चौपाल में बैठे लोगों ने बताया कि इस गांव में दो बहन भाई रहते हैं जो खूब बंदगी करते हैं। राजा उनके घर रात ठहर गया।


सुबह जब राजा उठा तो लड़की सिमरन पर बैठी हुई थी। इससे पहले लड़की का रूटीन था की वह दिन निकलने से पहले ही सिमरन से उठ जाती थी और नाश्ता तैयार करती थी।


लेकिन उस दिन वह लड़की बहुत देर तक सिमरन पर बैठी रही। 


जब लड़की सिमरन से उठी तो उसके भाई ने कहा की बहन तू इतना लेट उठी है ,अपने घर मुसाफिर आया हुआ है। 


इसने नाश्ता करके दूर जाना है। तुझे सिमरन से जल्दी उठना चाहिए था।


तो लड़की ने जवाब दिया कि भैया ऊपर एक ऐसा मामला उलझा हुआ था। 


धर्मराज को किसी उलझन भरी स्थिति पर कोई फैसला लेना था और मैं वो फैसला सुनने के लिए रुक गयी थी, इस लिए देर तक बैठी रही सिमरन पर।


उसके भाई ने पूछा ऐसी क्या बात थी। तो लड़की ने बताया कि फलां राज्य का राजा अंधे व्यक्तियों को खीर खिलाया करता था। 


लेकिन सांप के दूध में विष डालने से 100 अंधे व्यक्ति मर गए। 


अब धर्मराज को समझ नहीं आ रही कि अंधे व्यक्तियों की मौत का पाप राजा को लगे, सांप को लगे या दूध नंगा छोड़ने वाले रसोईए को लगे।


राजा भी सुन रहा था। राजा को अपने से संबंधित बात सुन कर दिलचस्पी हो गई और उसने लड़की से पूछा कि फिर क्या फैसला हुआ ?


लड़की ने बताया कि अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया था। 


राजा ने पूछा कि क्या मैं आपके घर एक रात के लिए और रुक सकता हूं ? 


दोनों बहन भाइयों ने खुशी से उसको हां कर दी।


राजा अगले दिन के लिए रुक गया, लेकिन चौपाल में बैठे लोग दिन भर यही चर्चा करते रहे कि..


कल जो व्यक्ति हमारे गांव में एक रात रुकने के लिए आया था और कोई भक्ति भाव वाला घर पूछ रहा था। 


उस की भक्ति का नाटक तो सामने आ गया है। रात काटने के बाद वो इस लिए नही गया क्योंकि जवान लड़की को देखकर उस व्यक्ति की नियत खोटी हो गई। 


इसलिए वह उस सुन्दर और जवान लड़की के घर पक्के तौर पर ही ठहरेगा या फिर लड़की को लेकर भागेगा। 


दिनभर चौपाल में उस राजा की निंदा होती रही।


अगली सुबह लड़की फिर सिमरन पर बैठी और रूटीन के टाइम अनुसार सिमरन से उठ गई।


राजा ने पूछा.. "बेटी अंधे व्यक्तियों की हत्या का पाप किसको लगा ?"


लड़की ने बताया कि.. "वह पाप तो हमारे गांव के चौपाल में बैठने वाले लोग बांट के ले गए।"


निंदा करना कितना घाटे का सौदा है। निंदक हमेशा दुसरों के पाप अपने सर पर ढोता रहता है। 


और दूसरों द्वारा किये गए उन पाप-कर्मों के फल को भी भोगता है। अतः हमें सदैव निंदा से बचना चाहिए। 



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