आज का सुविचार(चिन्तन) - fastnewsharpal.com
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आज का सुविचार(चिन्तन)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..19-05-2021*..🎋


✍🏻हौसला और घोंसला मत छोडीए, सब सही हो जायेगा। क्यूकी डर ही वायरस है, और विश्वास ही वेक्सिन है।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻किसी भी मुश्किल परिस्थिति को पार करने के लिये अपनी स्थिति को शक्तिशाली बनाना ही सुरक्षित रहने का एकमात्र रास्ता है। इसके लिये भगवान पर निश्चय, पुण्य कर्म का खाता और सत्य ज्ञान पर पकड़ जरूरी है।
🌹 *σм ѕнαитι.*🌹
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अनमोल वचन:

जो लोग दूसरों को अपनी दुआओं में शामिल करते हैं, खुशियों सबसे पहले उनके दरवाजों को ही खटखटाती हैं आइए,आज से हम सभी के लिए दुआएँ मांँगे..... 

🙏ओम् शांति🙏 

♻️आपका दिन शुभ हो♻️

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              ओम शांति
*हम लाख किसी के लिए अच्छा करते रहें । लेकिन, हमारी एक गलती पिछली सभी अच्छाइयों को धो कर रख देती है । हम लाख किसी की फिक्र करें, लेकिन यदि किसी समय हम किसी एक मौके पर कुछ भूल गए, तो सारा पिछला किया कूड़े के ढेर का हिस्सा बन जाता है । इसलिए आप कुछ भी करके किसी को हमेशा खुश नहीं रख सकते या यह कहें कि आप कुछ भी करके सबको खुश भी नहीं रख सकते । क्योंकि, लोगों की आपसे अपेक्षाओं का कोई अंत नहीं है।*
     ओम शांति
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      ओम शांति
*"जो केवल अपना भला चाहता है*

*वह दुर्योधन है.*

*जो अपनों का भला चाहता है।*

*वह युधिष्ठिर है..*

*और जो सबका भला चाहता है*

*वह बाबा है...*

*अत: कर्म के साथ-साथ भावनाएँ भी महत्व*

*रखती हैं...!!!"*
      ॐ शांति
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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*19 मई:-*_ में इस शरीर को चलानेवाली आत्मा और मुज आत्मा के पिता परमात्मा, इस सत्य को दिल से स्वीकार करने से सत्यता की शक्ति बढ़ेगी।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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🙏 *ॐ शांति* 🙏

अपने मन से नकारात्मक सोच को निकालने के लिये... सकारात्मक सोच को उत्पन्न करें। अपने हर नकारात्मक सोच पर कहें कि मैं इस बात को नहीं मानता! इस प्रकार धीरे-धीरे आपके नकारात्मक विचार *रुकते* और *बदलते* रहेंगे।

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐


♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️


👉 निंदा का फल 🏵️ 

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एक बार की बात है की किसी राजा ने यह फैसला लिया के वह प्रतिदिन 100 अंधे लोगों को खीर खिलाया करेगा।


एक दिन खीर वाले दूध में सांप ने मुंह डाला और दूध में विष डाल दी और ज़हरीली खीर को खाकर 100 के 100 अंधे व्यक्ति मर गए।


राजा बहुत परेशान हुआ कि मुझे 100 आदमियों की हत्या का पाप लगेगा।


राजा परेशानी की हालत में अपने राज्य को छोड़कर जंगलों में भक्ति करने के लिए चल पड़ा, ताकि इस पाप की माफी मिल सके।


रास्ते में एक गांव आया। राजा ने चौपाल में बैठे लोगों से पूछा की क्या इस गांव में कोई भक्ति भाव वाला परिवार है ? ताकि उसके घर रात काटी जा सके।


चौपाल में बैठे लोगों ने बताया कि इस गांव में दो बहन भाई रहते हैं जो खूब बंदगी करते हैं। राजा उनके घर रात ठहर गया।


सुबह जब राजा उठा तो लड़की सिमरन पर बैठी हुई थी। इससे पहले लड़की का रूटीन था की वह दिन निकलने से पहले ही सिमरन से उठ जाती थी और नाश्ता तैयार करती थी।


लेकिन उस दिन वह लड़की बहुत देर तक सिमरन पर बैठी रही। 


जब लड़की सिमरन से उठी तो उसके भाई ने कहा की बहन तू इतना लेट उठी है ,अपने घर मुसाफिर आया हुआ है। 


इसने नाश्ता करके दूर जाना है। तुझे सिमरन से जल्दी उठना चाहिए था।


तो लड़की ने जवाब दिया कि भैया ऊपर एक ऐसा मामला उलझा हुआ था। 


धर्मराज को किसी उलझन भरी स्थिति पर कोई फैसला लेना था और मैं वो फैसला सुनने के लिए रुक गयी थी, इस लिए देर तक बैठी रही सिमरन पर।


उसके भाई ने पूछा ऐसी क्या बात थी। तो लड़की ने बताया कि फलां राज्य का राजा अंधे व्यक्तियों को खीर खिलाया करता था। 


लेकिन सांप के दूध में विष डालने से 100 अंधे व्यक्ति मर गए। 


अब धर्मराज को समझ नहीं आ रही कि अंधे व्यक्तियों की मौत का पाप राजा को लगे, सांप को लगे या दूध नंगा छोड़ने वाले रसोईए को लगे।


राजा भी सुन रहा था। राजा को अपने से संबंधित बात सुन कर दिलचस्पी हो गई और उसने लड़की से पूछा कि फिर क्या फैसला हुआ ?


लड़की ने बताया कि अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया था। 


राजा ने पूछा कि क्या मैं आपके घर एक रात के लिए और रुक सकता हूं ? 


दोनों बहन भाइयों ने खुशी से उसको हां कर दी।


राजा अगले दिन के लिए रुक गया, लेकिन चौपाल में बैठे लोग दिन भर यही चर्चा करते रहे कि..


कल जो व्यक्ति हमारे गांव में एक रात रुकने के लिए आया था और कोई भक्ति भाव वाला घर पूछ रहा था। 


उस की भक्ति का नाटक तो सामने आ गया है। रात काटने के बाद वो इस लिए नही गया क्योंकि जवान लड़की को देखकर उस व्यक्ति की नियत खोटी हो गई। 


इसलिए वह उस सुन्दर और जवान लड़की के घर पक्के तौर पर ही ठहरेगा या फिर लड़की को लेकर भागेगा। 


दिनभर चौपाल में उस राजा की निंदा होती रही।


अगली सुबह लड़की फिर सिमरन पर बैठी और रूटीन के टाइम अनुसार सिमरन से उठ गई।


राजा ने पूछा.. "बेटी अंधे व्यक्तियों की हत्या का पाप किसको लगा ?"


लड़की ने बताया कि.. "वह पाप तो हमारे गांव के चौपाल में बैठने वाले लोग बांट के ले गए।"


निंदा करना कितना घाटे का सौदा है। निंदक हमेशा दुसरों के पाप अपने सर पर ढोता रहता है। 


और दूसरों द्वारा किये गए उन पाप-कर्मों के फल को भी भोगता है। अतः हमें सदैव निंदा से बचना चाहिए। 



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