आज का सुविचार(चिन्तन) - fastnewsharpal.com
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आज का सुविचार(चिन्तन)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..17-05-2021*..🎋


✍🏻दिखावा और झूठ बोलकर व्यवहार बनाने से अच्छा है सच बोलकर दुश्मन बनाले तो शायद आप के कभी विश्वासघात नही होगा।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *ओमशान्ति*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥

✍🏻✍🏻हर समय अपनी समस्याओं के बारे में ही बात करना हमारी सबसे बुरी आदत है। अपनी इस आदत को बदलें और अब से सिर्फ खुशी की ही बातें करें। इसलिए सिर्फ खुशी की ही बातें करें।
🌹 *ॐ शान्ति*🌹
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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*17 मई:-*_ जो अच्छा बनने की हर विधि अपनाते उनकी हर इच्छा स्वतः पूरी हो जाती है ।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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      *किसी के कहने से यदि*
*"अच्छा" या "बुरा" होने*
                    *लगे तो ये संसार या तो*
*"स्वर्ग" बन जाये या पूरी*
            *तरह से "नर्क" इसलिए ये*
*ध्यान मत दो की कौन क्या*
                *कहता है,बस वो करो जो*
*"अच्छा"है और"सच्चा"है।* 
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*🕉️अभिनय के साथ किया गया कर्म कभी फलित नहीं होता चाहे सामाजिक कार्य हो या धार्मिक कार्य।*

*ज्यों - ज्यों अभिमान*
              *कम होता है,*
*पुन्य की प्राप्ति*
                *होने लगती है..!!*
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*टुटा हुआ विश्वास*
*और छूटा हुआ बचपन,*
*जिंदगी में कभी दुबारा वापस नहीं मिलता* !!
*" नफरतों में क्या रखा हैं ..,*
*मोहब्बत से जीना सीखो..,*
            *क्योकि*
*ये दुनियाँ न तो हमारा घर हैं ...*
                *और ...*
*न ही आप का ठिकाना ..,*
*याद रहे ! दूसरा मौका सिर्फ कहानियाँ देती हैं , जिन्दगी नहीं ...*
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*हर किसी के अन्दर अपनी*  
      *"ताकत"और अपनी"कमज़ोरी"*
*होती है...*
        *"मछली"जंगल मे नही दौड़*
      *सकती और"शेर"पानी मे राजा*
*नही बन सकता.....!!*
*इसलिए "अहमियत"  सभी को देनी चाहिये*....  
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अनमोल वचन :

माना कि अच्छा सोचने से जल्दी ही सब कुछ सही नहीं होता,समय लगता है लेकिन बुरा सोचने से सब कुछ बहुत जल्दी बिगड़ता है...इसलिए जितना हो सके हमेशा अच्छा सोचें और बुरी सोच से बचें......... 

🙏ओम् शान्ति🙏

💐आपका दिन शुभ हो💐

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♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️


👉 जटायु 🏵️

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अंतिम *सांस* गिन रहे *जटायु  ने कहा कि मुझे पता था कि मैं *रावण* से नही *जीत* सकता लेकिन तो भी मैं *लड़ा* ..यदि मैं *नही* *लड़ता* तो आने वाली *पीढियां* मुझे *कायर* कहती


 🙏जब *रावण* ने *जटायु* के *दोनों* *पंख* काट डाले... तो *काल* आया और जैसे ही *काल* आया ... 

तो *गिद्धराज* *जटायु* ने *मौत* को *ललकार* कहा, -- 


" *खबरदार* ! ऐ *मृत्यु* ! आगे बढ़ने की कोशिश मत करना... मैं *मृत्यु* को *स्वीकार* तो करूँगा... लेकिन तू मुझे तब तक नहीं *छू* सकता... जब तक मैं *सीता* जी की *सुधि* प्रभु " *श्रीराम* " को नहीं सुना देता...!


 *मौत* उन्हें *छू* नहीं पा रही है... *काँप* रही है खड़ी हो कर...

 *मौत* तब तक खड़ी रही, *काँपती* रही... यही इच्छा मृत्यु का वरदान *जटायु* को मिला।


किन्तु *महाभारत* के *भीष्म* *पितामह* *छह* महीने तक बाणों की *शय्या* पर लेट करके *मौत* का *इंतजार* करते रहे... *आँखों* में *आँसू* हैं ... रो रहे हैं... *भगवान* मन ही मन मुस्कुरा रहे हैं...! 

कितना *अलौकिक* है यह दृश्य ... *रामायण* मे *जटायु* भगवान की *गोद* रूपी *शय्या* पर लेटे हैं... 

प्रभु " *श्रीराम* " *रो* रहे हैं और जटायु *हँस* रहे हैं... 

वहाँ *महाभारत* में *भीष्म* *पितामह* *रो* रहे हैं और *भगवान* " *श्रीकृष्ण* " हँस रहे हैं... *भिन्नता* *प्रतीत* हो रही है कि नहीं... *?* 


अंत समय में *जटायु* को प्रभु " *श्रीराम* " की गोद की *शय्या* मिली... लेकिन *भीष्म* *पितामह* को मरते समय *बाण* की *शय्या* मिली....!

 *जटायु* अपने *कर्म* के *बल* पर अंत समय में भगवान की *गोद* रूपी *शय्या* में प्राण *त्याग* रहा है.... 


प्रभु " *श्रीराम* " की *शरण* में..... और *बाणों* पर लेटे लेटे *भीष्म* *पितामह* *रो* रहे हैं.... 

ऐसा *अंतर* क्यों?...     


ऐसा *अंतर* इसलिए है कि भरे दरबार में *भीष्म* *पितामह* ने *द्रौपदी* की इज्जत को *लुटते* हुए देखा था... *विरोध* नहीं कर पाये थे ...! 

 *दुःशासन* को ललकार देते... *दुर्योधन* को ललकार देते... लेकिन *द्रौपदी* *रोती* रही... *बिलखती* रही... *चीखती* रही... *चिल्लाती* रही... लेकिन *भीष्म* *पितामह* सिर *झुकाये* बैठे रहे... *नारी* की *रक्षा* नहीं कर पाये...!


उसका *परिणाम* यह निकला कि *इच्छा* *मृत्यु* का *वरदान* पाने पर भी *बाणों* की *शय्या* मिली और .... 

 *जटायु* ने *नारी* का *सम्मान* किया... 

अपने *प्राणों* की *आहुति* दे दी... तो मरते समय भगवान " *श्रीराम* " की गोद की शय्या मिली...!


जो दूसरों के साथ *गलत* होते देखकर भी आंखें *मूंद* लेते हैं ... उनकी गति *भीष्म* जैसी होती है ... 

जो अपना *परिणाम* जानते हुए भी...औरों के लिए *संघर्ष* करते है, उसका माहात्म्य *जटायु* जैसा *कीर्तिवान* होता है।


🙏 सदैव *गलत* का *विरोध* जरूर करना चाहिए। " *सत्य* परेशान जरूर होता है, पर *पराजित* नहीं। 


 

🙏🙏🙏

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