*किसान मन के पहली तिहार माने गए हैं* - fastnewsharpal.com
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*किसान मन के पहली तिहार माने गए हैं*

 *छत्तीसगढ़ के लोक जीवन म रचे-बसे परब: अक्ती तिहार-*



*किसान मन के पहली तिहार माने गए हैं*



राजेंद्र साहू/मगरलोड

हमर भारत गांव मन के देस आय, जिंहा देस के अड़सठ प्रतिसत लोगन मन रइथें, लगभग बत्तीस प्रतिसत सहर मन म रइथें। गांव मन के लोक-परम्परा, तीज-तिहार, आचार-विचार, लोक-जीवन के ऊर्जा के स्त्रोत आय। एही लोक-परम्परा अउ लोक-संस्किरिति के कारन प्रत्येक छेत्र अउ प्रदेस के अपन अलग-अलग पहचान हवय।


हमर छत्तीसगढ़ के लोक-जीवन म रचे-बचे लोक-परब, अक्ती-तिहार किसान मन के पहली तिहार माने गे हे, याने इहां के किसान मन के नावा बछर ‘अक्ती’ ले सुरु होथे। ‘छाहुर बंधाय बर चला हो’ एकर बाद गांव के किसान मन अपन-अपन कोठी ले पांच या सात प्रकार के अन्न (बीज) चुरकी या महुआ पान के दोना म ले के ‘ठाकुरदिया जाथे, जिहाँ ‘ठाकुर देवता’ बिराजमान रइथें। हर गांव के ग्राम देवता के रुप म ठाकुर देव के पूजा-पाठ गाँव वाला मन करथें। बइगा ह ‘ठाकुर देवता’ के पूजा-पाठ करथे, किसान मन होम-धूप देथें अउ ठाकुर देव ल प्रनाम करके बीज मन ल भुइयाँ म बिखेर देथें, फेर नांगर के लोहा के फाल म भुइयां के खोदाई करके प्रतीक रुप म बीज के बोनी करथें। ओकर बाद महुआ पाना के दोना म पानी भर-भर के सिंचाई करथें। अउ भुइयां ल प्रनाम करके धरती दाई ले प्रार्थना करथें- ‘हे धरती दाई, हमर कोठी ल अन-धन ले भर देबे, तोरे किरपा ले हमर गाँव अउ परिवार मा सुख-समृद्धि आही।



अक्ती तिहार ल हमर छत्तीसगढ़ म ‘बर-बिहाव’ के कारन घलो जाने जाथें। ऐ दिन छत्तीसगढ़ के गांव-गांव अउ सहर-सहर म अब्बड़ बिहाव होथे। एही कारण अक्ती तिहार बिहाव अउ लगन के महा परब माने जाथे। बइसाख महीना के अंजोरी पाख तीज के दिन अकती तिहार ला मनाथे। सास्त्र पुरान मा येला ‘अक्षय तृतीया’ कहे जाथे। अक्छय के अरथ होथे-जेहर कभू नास नई होवय, ते पाय के ये दिन ला बड़ सुभ माने जाथे, अर्थात् ये दिन जौन भी कारज करे जाही वोहर बने सुभ होही, फलही-फूलही। हमर छत्तीसगढ़ म अकती के दिन अबड़ अकन गांव-गांव अउ सहर मा बर-बिहाव होथे। अइसे मानता हावय कि अकती के दिन जौन भी दुल्हा-दुलहिन के भांवर परथे, ओ जांवर-जोड़ी जिनगी भर सुखी रइथें। अकती के दिन कन्या दान करे म बेटी के माता-पिता ला जादा पुन्न मिलथे। कन्यादान ला महादान माने गे हे। बेटी घर के लछमी होथे अउ माता-पिता घर के लछमी के महादान करके ‘विष्णु भगवान’ रुप दमाद पा जाथे। अकती के दिन बर-बिहाव करे के जुन्ना रिवाज हावय, फेर छत्तीसगढ़ म कई ठन अउ रिवाज हावय जेला ऐही दिन मनाए जाथे। जइसे पुतरा-पुतरी बिहाव करे के रिवाज, देवी-देवता अउ पेड़ के पूजा करे के रिवाज, करसी पूजा करे के रिवाज है।

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