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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..13-05-2021*..🎋
✍🏻खुशियों के लिए क्यों किसी का इंतज़ार करे आप ही तो हो अपने जीवन के शिल्पकार, चलो आज मुश्किलों को हराते हैं और दिन भर मुस्कुराते है।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *σм ѕнαитι*🌷
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻गलतियाँ हुई है, तो दण्ड भुगतना ही पडेगा उसका कोई विकल्प नहीं है दण्ड पाने से इतना भय है तो गलती करते समय सोचा क्यों नहीं गया कि एक दिन इसका परिणाम अवश्य आएगा।
🌹 *σм ѕнαитι.*
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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*13 मई:-*_ मन को तंदुरस्त रखने के लिए दिन में 3 बार 1-1 मिनट के लिए शान्ति में स्थित हो शान्ति के सागर को याद करना है।
🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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*लंबे समय तक चर्चा करने के बाद भी परिणाम कुछ विशेष नहीं आता। अनेक बार तो झगड़ा भी हो जाता है। तब लाभ के स्थान पर हानि होती है।* *इसका ज्वलंत उदाहरण - आप टेलीविजन में, जो अनेक घटनाओं पर की जाने वाली चर्चाएं हैं, उनमें देख सकते हैं। किस प्रकार से लोग सत्य को दबाते हैं और असत्य का को बढ़ावा देते हैं। न्याय को दबाते हैं, अन्याय को उभारते हैं।*
*ऐसा क्यों होता है? इसका सबसे बड़ा कारण है,* *मन का शुद्ध न होना*. *जब मन में शुद्धता नहीं होती, राग द्वेष पक्षपात आदि दोष मन में भरे हुए होते हैं, तब चर्चाओं से कोई लाभ नहीं होता। व्यर्थ समय नष्ट होता है, और शब्दों का दुरुपयोग होता है। परिणाम क्या निकलता है! आपस में राग द्वेष क्रोध ईर्ष्या जलन अभिमान आदि दोष और अधिक बढ़ जाते हैं, जो कि जीवन में अशांति उत्पन्न करते हैं। इसलिए ऐसी चर्चाओं से तो दूर ही रहना चाहिए।*
*यदि कुछ लोग बैठकर चर्चा करना चाहते हैं, किसी समस्या को सुलझाना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने मन को शुद्ध करें। राग द्वेष पक्षपात अन्याय को मन से निकाल कर दूर करें। तब निष्पक्ष भाव से किसी विषय पर चर्चा करें। समय भी लगाएं और उचित शब्दों का प्रयोग करें। तब तो ये सारी चर्चाएं करना सार्थक है, अच्छे परिणाम देने वाली सिद्ध होंगी।*अन्यथा समय और शक्ति का नाश, शब्दों का दुरुपयोग, तथा आपस में राग द्वेष का बढ़ना, लड़ाई झगड़े, अशांति आदि, यही कुछ परिणाम निकलेगा।*
ओम शांति
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अनमोल वचन :
*दुख पीछे देखता है,*
*चिंता इधर-उधर देखती है*,
*लेकिन विश्वास हमेशा आगे देखता है,*
*इसलिए स्वयं पर विश्वास बनाये रखें....*
*🌻Have a Nice Day🌻*
🙏ओम् शांति🙏
🎈आपका दिन शुभ हो 🎈
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*🏝️★ ओम शान्ति ★🏝️*
_अकबर बादशाह दिन भर यात्रा करते हुए बहुत दूर निकल गए । चलते चलते नमाज का समय हो गया । तब मार्ग में एक ओर नमाज का वस्त्र बिछाकर घुटनों के बल बैठ गए । उधर एक युवती अपने पतिदेव को खोजती आ रही थी । उसने नमाज का कपड़ा देखा नहीं और उसी के ऊपर पग रखती हुई आगे बढ़ गई । अकबर को उसकी गुस्ताखी पर क्रोध तो आया परंतु चुप रहे । थोड़ी देर में जब वह युवती अपने पतिदेव के साथ लौटी तो अकबर कहने लगे - तुझे दिखा नहीं मैं नमाज पढ़ रहा था और प्रभु भक्ति में था ? तुझे नजर नहीं पड़ा नमाज के कपड़े पर पग धरती गई ?_
_● युवती ने बड़े धैर्य से बोलीे, मैं तो अपने पतिदेव की खोज में गुम हो खो चुकी थी जिस कारण मुझे कुछ सूझा नहीं । परंतु तुम तो प्रभु भजन में लीन थे । तुमने मुझे कैसे देख लिया ? मालूम होता है कि भगवान से अभी प्रीत नहीं हुई । अकबर यह उत्तर सुनकर अवाक् रह गया ।_
_● ईश्वर से सच्ची दिल की प्रीत हो तो ना व्यर्थ दिखाई देगा, ना सुनाई देगा । लग्न में मगन । परमात्मा को बस हमारा शुद्ध मन चाहिए, मन निर्मल है तो प्रभु से सर्व प्राप्तियां करना कोई मुश्किल नहीं ।_
_● इस संसार में कोई भी मनुष्य चाहे कितना भी महान क्यों ना हो परंतु है तो अपूर्ण ही । भगवान ने कहा है कि देह सहित देह के सर्व धर्मो का परित्याग कर सिर्फ मुझे याद कर तो मैं तुझे सर्व पापों से मुक्त कर दूंगा । संपूर्ण बनने के लिए परमात्मा के प्रति समर्पित होना पड़ेगा अर्थात् तन, मन, धन, मन, वचन, कर्म, संकल्प श्वांस सभी रूपों से प्रभु के प्रति समर्पणमयता ही जीवन को संपूर्ण बना सकेगी ।_
_● शिव बाबा ने हम बच्चों को दिव्य नेत्र दिया है । उसे खुला रखें, सदा भाई भाई की दृष्टि पक्की रहे तो हम बाबा से शक्ति प्राप्त कर संपूर्ण बन जाएंगे । संपूर्ण अर्थात् सर्वगुण संपन्न, संपूर्ण निर्विकारी, संपूर्ण निरहंकारी ।_
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*♻️◆ OM SHANTI ◆♻️*
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🙏 *ॐ शांति* 🙏
भय एक *भावना* है जो *अज्ञानता* से उत्पन्न होती है। अज्ञानता यह है कि जिसे हम मेरा-मेरा कहते हैं.... वह वास्तव में *मेरा* है ही नहीं, यह *शरीर* भी नहीं। यदि कुछ सचमुच मेरा है तो बस मेरे विचार... क्योंकि वे मेरे साथ तब भी रहते हैं जब मेरा *शरीर* भी मेरे साथ नहीं होता।
🌸 सुप्रभात...
💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
*जीवन मे जब भी हम*
*खराब🚶🏻♀️😷🚶🏻♂️🤦🏻♀️🤦🏻♂️ दौर से गुजरते हैं*
*तब मन🙇🏻♀️🙇🏻♂️ मे यह विचार*
*जरूर आता है कि*
*परमात्मा👆🏻💫🇲🇰 मेरी🤦🏻♀️🤦🏻♂️ परेशानी देखता*
*क्यों❌ नहीं हैं*
*मेरे दुःख कम क्यों❌ नहीं करता*
*पर याद🙇🏻♀️🙇🏻♂️ रखना*
*जब परीक्षा🚶🏻♀️😷🚶🏻♂️📝 चल*
*रही होती है*
*तब शिक्षक👆🏻👩🏻🏫👨🏻🏫🤫 मौन रहता है*.शिक्षक की शिक्षा साथ रहती है जो परीक्षा 🚶🏻♀️😷🚶🏻♂️में, विघ्न में पास🤲🏻👏🏻✌🏻😊🩺💉💊 कर देती है।
सुरक्षित रहे, स्वस्थ रहे, अपनों के👬🏼👭🏻👫🏻👨👩👧👦 साथ मस्त👌🏻 रहे, अपना👩🏻💫👦🏻खयाल रखें। . दो🚶🏻♀️😷🚶🏻♂️ गज की दूरी बहुत बहुत है जरूरी, आप है भारत मा के कभी ना❌ हार माननेवाले👩🏻👦🏻 वीर।✌🏻. । good👆🏻💫🇲🇰🌅🧘🏻♀️🧘🏻♂️ morning😊
सुबह🌅 का प्यार भरा नमस्कार 🙏 ✍️ ज़िंदगी में समस्या
देनेवाले की "हस्ती" कितनी
भी बड़ी क्यों न हो,पर भगवान👆🏻💫 की "कृपादृष्टि"
से बड़ी नहीं हो सकती
✍️हंसते हुए चेहरों का अर्थ ये नहीं*
*कि इनके जीवन में*
*दुखों🤦🏻♀️🤦🏻♂️ की गैरहाजरी है..*
*बल्की इनके अंदर*
*परिस्थितीयों🚶🏻♀️😷🚶🏻♂️को संभालने की क्षमता है.. good👆🏻💫🇲🇰🌅🧘🏻♀️🧘🏻♂️morning.😊
🙏 *ॐ शांति* 🙏
जब *परमात्मा* को आपसे *प्यार* होता है तो वो आपके लिये वही करते हैं जो आपके लिये *अच्छा* होता है और उन सभी *लोगों* को आपसे *दूर* कर देते हैं जो आपके लायक नहीं होते।
🌸 सुप्रभात...
💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
सुबह🌅 का प्यार भरा नमस्कार 🙏 ✍️ ज़िंदगी में समस्या
देनेवाले की "हस्ती" कितनी
भी बड़ी क्यों न हो,पर भगवान👆🏻💫 की "कृपादृष्टि"
से बड़ी नहीं हो सकती
✍️हंसते हुए चेहरों का अर्थ ये नहीं*
*कि इनके जीवन में*
*दुखों🤦🏻♀️🤦🏻♂️ की गैरहाजरी है..*
*बल्की इनके अंदर*
*परिस्थितीयों🚶🏻♀️😷🚶🏻♂️को संभालने की क्षमता है.. good👆🏻💫🇲🇰🌅🧘🏻♀️🧘🏻♂️morning.😊
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*💎◆● OM SHANTI ●◆💎*
_*🎊🇲🇰“लौकिक सुखों से परे सच्चा सुख है आत्मिक सुख”*_
_✼ एक गाँव के मंदिर में एक ब्रह्मचारी रहता था। लोभ,मोह से परे अपने आप में मस्त रहना उसका स्वभाव था।_
_✼ कभी-कभी वह यह विचार भी करता था कि इस दुनिया में सर्वाधिक सुखी कौन है? एक दिन एक रईस उस मंदिर में दर्शन हेतु आया।_
_✼ उसके मंहगे वस्त्र,आभूषण,नौकर-चाकर आदि देखकर बह्मचारी को लगा कि यह बड़ा सुखी आदमी होना चाहिए। उसने उस रईस से पूछ ही लिया। रईस बोला-मैं कहाँ सुखी हूँ भैया! मेरे विवाह को ग्यारह वर्ष हो गए,किन्तु आज तक मुझे संतान सुख नहीं मिला।_
_✼ मैं तो इसी चिंता में घुलता रहता हूँ कि मेरे बाद मेरी सम्पति का वारिस कौन होगा और कौन मेरे वंश के नाम को आगे बढ़ाएगा? पड़ोस के गांव में एक विद्वान पंडित रहते हैं। मेरी दृष्टि में वे ही सच्चे सुखी हैं।_
_✼ ब्रह्मचारी विद्वान पंडित से मिला,तो उसने कहा-मुझे कोई सुख नहीं है बंधु,रात-दिन परिश्रम कर मैंने विद्यार्जन किया,किन्तु उसी विद्या के बल पर मुझे भरपेट भोजन भी नहीं मिलता। अमुक गांव में जो नेताजी रहते हैं,वे यशस्वी होने के साथ-साथ लक्ष्मीवान भी है।_
_✼ वे तो सर्वाधिक सुखी होंगे। ब्रह्मचारी उस नेता के पास गया,तो नेताजी बोले-मुझे सुख कैसे मिले? मेरे पास सब कुछ है,किन्तु लोग मेरी बड़ी निंदा करते हैं। मैं कुछ अच्छा भी करूँ तो उसमें बुराई खोज लेते हैं। यह मुझे सहन नहीं होता।_
_✼ यहां से चार गांव छोड़कर एक गांव के मंदिर में एक मस्तमौला ब्रह्मचारी रहता है। इस दुनिया में उससे सुखी और कोई नहीं हो सकता। ब्रह्मचारी अपना ही वर्णन सुनकर लज्जित हुआ और वापिस मंदिर में लौटकर पहले की तरह सुख से रहने लगा।_
_✼ उसे समझ में आ गया कि सच्चा सुख लौकिक सुखों में नहीं है बल्कि वह तो लौकिक चिंताओं से मुक्त अलौकिक की निः स्वार्थ उपासना में बसता है। समस्त भौतिकता से परे आत्मिकता को पा लेना ही सच्चे सुख व आनंद की अनुभूति कराता है।_
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*🔰◆ ओम शान्ति ◆🔰*
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