आज का सुविचार(चिन्तन) - fastnewsharpal.com
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आज का सुविचार(चिन्तन)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..06-06-2021*..🎋


✍🏻सादगी सर्वोत्तम सुन्दरता है, क्षमा अतुलनीय बल है, नम्रता सर्वश्रेष्ठ गुण  है एवं मित्रता सर्वोत्कृष्ट संबंध है।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻कठिनाई के समय में कुछ लोग टूट जाते हैं, जबकि कुछ नया कीर्तिमान बनाते है।अदाकार हमेशा कठिन परिस्थितियों में पैदा होते हैं न की आसान समय मे।

🌹 *σм ѕнαитι.*🌹


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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*06 जून:-*_ परमात्मा पिता ने हम सभी में एक जैसे ही गुण भरे है,उन्हें यूज़ करके हम  स्वयम और दुसरो को सुख दे सकते है।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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अनमोल वचन :

समय और हालात कभी भी, कहीं भी बदल सकते है..अब देखिये,कल तक निकटता प्यार का प्रतीक थी और आज दूरियाँ प्यार और परवाह की परिचायक हैं।परिस्थितियों के साथ चलें, सुरक्षित रहें...स्वस्थ रहें।
कुछ सिखाकर यह दौर भी गुजर जाएगा, फिर एक बार इंसान मुस्कुराएगा,मायूस ना होना,इस बुरे वक्त से,कल आज है और आज कल हो ही जाएगा। सावधानी ही सुरक्षा है.......      

🙏ओम् शान्ति 🙏

♻️आपका दिन शुभ हो ♻️

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🙏 *ॐ शांति* 🙏

अपने जीवन में *सकारात्मकता* कैसे बढ़ाएं? अपने मन को वो सोचने की आदत डलवाएं जो इन *आँखों* से नहीं दिखता... जैसे *आत्मा* और *परमात्मा* ! इसके बारे में जितना पढ़ते, देखते व सुनते जाएंगे... आपकी सकारात्मकता बढ़ती जायेगी।

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
*"व्यवहार" घर का  शुभ  कलश  है।*
                   *और*
*"इंसानियत" घर की "तिजोरी"।*

*"मधुर वाणी" घर की "धन-दौलत" है।*
                   *और*  
*"शांति"  घर  की  "महा लक्ष्मी"।*

*"पैसा"  घर  का  "मेहमान" है।*
                  *और* 
*"एकता" घर की "ममता।*

*"व्यवस्था" घर की "शोभा" है*
                 *और* 
*समाधान "सच्चा सुख"।*

*Good👆🏻💫🇲🇰🌅🧘🏻‍♀️🧘🏻‍♂️ Morning.*😊
🙏 *ॐ शांति* 🙏

लोग कहते हैं ज्ञान *बुढ़ापे* का सहारा है... जबकि ज्ञान अर्थात समझ, जब पूरा जीवन बेसमझी से बिता देंगे तो बुढ़ापे में सिवाए पछतावे के और कुछ नहीं रहेगा। अतः जीवन में जितनी जल्दी *ज्ञान* समझ आ जाए... उतना ही स्वयं के लिये *लाभदायक* है।

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
*अगर लोग सिर्फ जरूरत पर ही*      
         *आपको👩🏻💫👦🏻 याद करते हैं,*
       *तो उन्हें गलत मत समझिये,*
                     *क्योंकि* 
      *आप उनकी जिन्दगी की वो*     
            *रोशनी की💫 किरण हैं*
                 *जो उन्हें सिर्फ,*
      *अन्धेरों🌌😷 में ही दिखाई देती है…।*

 दो🚶🏻‍♀️😷🚶🏻‍♂️ गज की दूरी बहुत बहुत है जरूरी।                                                                                                        ..                                    शुभरात्रि🌌

♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️

        

         *👉🏿जडीबुटी☘🏵️                                                              🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅                        🔅🔅🔅                                                                                                                                               *बहुत समय पहले की बात है , एक वृद्ध सन्यासी हिमालय की पहाड़ियों में कहीं रहता था. वह बड़ा ज्ञानी था और उसकी बुद्धिमत्ता की ख्याति दूर -दूर तक फैली थी. एक दिन एक औरत उसके पास पहुंची और अपना दुखड़ा रोने लगी , ” बाबा, मेरा पति मुझसे बहुत प्रेम करता था , लेकिन वह जबसे युद्ध से लौटा है ठीक से बात तक नहीं करता।"*


*” युद्ध लोगों के साथ ऐसा ही करता है.” , सन्यासी बोला।*


*"लोग कहते हैं कि आपकी दी हुई जड़ी-बूटी इंसान में फिर से प्रेम उत्पन्न कर सकती है , कृपया आप मुझे वो जड़ी-बूटी दे दें.” , महिला ने विनती की।*


*सन्यासी ने कुछ सोचा और फिर बोला ,” देवी मैं तुम्हे वह जड़ी-बूटी ज़रूर दे देता, लेकिन उसे बनाने के लिए एक ऐसी चीज चाहिए जो मेरे पास नहीं है ."*


*”आपको क्या चाहिए मुझे बताइए मैं लेकर आउंगी .”, महिला बोली।*


*”मुझे बाघ की मूंछ का एक बाल चाहिए .”, सन्यासी बोला।*


*अगले ही दिन महिला बाघ की तलाश में जंगल में निकल पड़ी, बहुत खोजने के बाद उसे नदी के किनारे एक बाघ दिखा, बाघ उसे देखते ही दहाड़ा , महिला सहम गयी और तेजी से वापस चली गयी।*


*अगले कुछ दिनों तक यही हुआ , महिला हिम्मत कर के उस बाघ के पास पहुँचती और डर कर वापस चली जाती. महीना बीतते-बीतते बाघ को महिला की मौजूदगी की आदत पड़ गयी, और अब वह उसे देख कर सामान्य ही रहता. अब तो महिला बाघ के लिए मांस भी लाने लगी , और बाघ बड़े चाव से उसे खाता. उनकी दोस्ती बढ़ने लगी और अब महिला बाघ को थपथपाने भी लगी. और देखते देखते एक दिन वो भी आ गया जब उसने हिम्मत दिखाते हुए बाघ की मूंछ का एक बाल भी निकाल लिया।*


*फिर क्या था , वह बिना देरी किये सन्यासी के पास पहुंची, और बोली ” मैं बाल ले आई बाबा ।*


*“बहुत अच्छे .” और ऐसा कहते हुए सन्यासी ने बाल को जलती हुई आग में फ़ेंक दिया ।*

 

*”अरे ये क्या बाबा, आप नहीं जानते इस बाल को लाने के लिए मैंने कितने प्रयत्न किये और आपने इसे जला दिया …… अब मेरी जड़ी-बूटी कैसे बनेगी ?” महिला घबराते हुए बोली।*


*”अब तुम्हे  किसी जड़ी-बूटी की ज़रुरत नहीं है .” सन्यासी बोला ।” जरा सोचो , तुमने बाघ को किस तरह अपने वश में किया….जब एक हिंसक पशु को धैर्य और प्रेम से जीता जा सकता है तो क्या एक इंसान को नहीं ? जाओ जिस तरह तुमने बाघ को अपना मित्र बना लिया उसी तरह अपने पति के अन्दर प्रेम भाव जागृत करो.।"*


*महिला सन्यासी की बात समझ गयी, अब उसे उसकी जड़ी-बूटी मिल चुकी थी।*



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