*स्वस्थ्य सुविधाओ के लिए तीन चार किलो मीटर पैदल चलते हैं ग्रामीण,छत्तीसगढ़ की राजधानी से लगे चिखली के ग्रामीणो की दास्तां*
*स्वस्थ्य सुविधाओ के लिए तीन चार किलो मीटर पैदल चलते हैं ग्रामीण,छत्तीसगढ़ की राजधानी से लगे चिखली के ग्रामीणो की दास्तां*
सुरेन्द्र जैन/धरसीवां
लगता है प्रथक छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद भी सत्ताधरियों को छत्तीसगढ़ियों की कोई खास चिंता नहीं तभी तो राज्य की राजधानी रायपुर से लगे धरसीवां के चिखली गांव के ग्रामीणों को शिक्षा स्वस्थ्य जैंसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी तीन चार किलो मीटर पैदल सफर तय कर राजमार्ग किनारे के गांवो तक पहुचना पड़ता है।
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धरसीवां का चिखली ग्राम पंचायत तो है लेकिन यहां न तो पांचवी के बाद कि पढ़ाई के लिए स्कूल है न ही यहां उपस्वस्थ्य केंद्र जैंसी कोई सुविधा ।
*रायपुर बिलासपुर हाइवे से करीब 4 किलो मीटर अंदर है चिखली*
चिखली गांव रायपुर बिलासपुर हाइवे किनारे के ग्राम सांकरा से पठारीडीह मार्ग पर करीब 4 किलो मीटर की दूरी पर छोकरा नाला के आगे स्थित है कोरोना काल मे हालांकि अभी स्कूल तो बन्द हैं लेकिन जब शैक्षणिक सत्र नियमित रुप से चलता रहा तब पांचवी के बाद पढ़ाई के लिए यहां के बालक बालिकाओं को लगभग तीन चार किलो मीटर की दूरी पर स्थित ग्राम सोंडरा व सांकरा के शासकीय स्कूलों में पैदल व साइकिलों आना जाना पड़ता है ओधोगिक क्षेत्र उरला बीरगांव से भी इस गांव की दूरी पांच छह किलो मीटर है लेकिन वहां जाने के लिए भी पहले एक किलो मीटर बाजू के गांव कुम्हारी जाना पड़ता है तब कहीं जाकर सिटी बस से उरला जाना होता है हालांकि बर्तमान में कुम्हारी तक चलने वाली सिटी बस भी बन्द है इसलिए गरीब तबके के लोगो को महिलाओं को अपने हर जरूरी काम से पहले सांकरा तक पैदल ही सफर तय करना पड़ता है।
*सोंडरा का उपस्वास्थ्य केंद्र पड़ता है करीब*
ग्रामीणों को समीपी ग्राम सोंडरा का उपस्वस्थ्य केंद्र ही करीब तीन किलो मीटर पड़ता है छोटी छोटी बीमारियों के लिए उन्हें चिखली से पैदल ही आना पड़ता है यदि कोई अधिक बीमार पड़ जाए तो समझो मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा क्योकि फिर उन्हें सांकरा तक पैदल सफर तय कर सांकरा से यात्री वाहनों के माध्यम से धरसीवां या रायपुर जाना पड़ता है।
छत्तीसगढ़ की राजधानी से लगे गांवो में ही ये हाल हैं तो प्रदेश के दूरस्थ अंचलों के क्या हाल होंगे अंदाजा लगाया जा सकता है।
