ब्रह्मा कुमारी संस्था में हर्ष उल्लास के साथ मनाई गई दीपावली ,जो दीपक की तरह जलता है वही जीवन में खुशियां बटोरता है---ब्रहमा कुमार नारायण भाई - fastnewsharpal.com
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ब्रह्मा कुमारी संस्था में हर्ष उल्लास के साथ मनाई गई दीपावली ,जो दीपक की तरह जलता है वही जीवन में खुशियां बटोरता है---ब्रहमा कुमार नारायण भाई

  ब्रह्मा कुमारी  संस्था में हर्ष उल्लास के साथ मनाई गई दीपावली ,जो दीपक की तरह जलता है वही जीवन में खुशियां बटोरता है---ब्रहमा कुमार नारायण भाई 



  

 आलीराजपुर,

, दीपावली  का हम सभी के जीवन में इसका गहरा महत्व है दीपावली का आध्यात्मिक अर्थ  आत्मा की ज्योति जब ज्ञान घृत से जग जाती है तो यह जीवन हल्का फरिश्ता समान बन जाता है और पूरा विश्व स्वर्णिम बन जाता है। जो दीपक की तरह जीवन में जलता है औरो को ज्ञान प्रकाश बाटता है, वही जीवन में खुशियां बटोरता है ।यह विचार इंदौर से पधारे जीवन जीने की कला के प्रणेता ब्रह्माकुमार नारायण भाई ने दीपावली पर्व पर नगर वासियों को संबोधित करते हुए बताया।  जब आपके लाख समझाने पर आपका कोई अपना रास्ते पर न आये तो उसके लिये दुआ करो, क्योंकि वह कमजोर आत्मा है। जिसे शब्दों की नहीं, शक्ति की आवश्यकता है, और शुभ भावना व दुआ कि शक्ति हीआत्मा की वास्तविक दवा है।





 परमपिता परमात्मा शिव जो हम सभी आत्माओं के परमपिता हैं, उनकी की शक्ति सूरज की किरणों की तरह ही है,जो निरंतर हम आत्माओं पर पड़ती है,बस हमे ऊपर का पर्दा हटाने की जरूरत है। तो आत्मा की ज्योति जग जाती है जिससे विश्व में और जीवन में सवेरा आ जाता है । इस अवसर पर ब्रह्मा कुमारी सेवा केंद्र की संचालिका माधुरी बहन ने बताया कि दीपावली के बाद नव वर्ष मनाया जाता है हिंदी  वर्ष परिवर्तन होता है अर्थात  परिवर्तन के बारे में आपने बताया कि बहुत से मनुष्य ऐसे होते हैं जो अपने जीवन में परिवर्तन लाना नहीं जानते! उन्हें अपने संस्कारों को बदलने की कला नहीं आती! चाहते हुए भी वे अपने स्वभाव को नहीं बदल पाते और इसलिए वे परेशानियों से घिर जाते हैं! परन्तु परिवर्तन एक ऐसी कला है जिसके द्वारा मनुष्य के जीवन की चढ़ती कला हो जाती है! अपने में और दूसरों में परिवर्तन वही ला सकते जिसमे दूसरों की खूबियों को देखना और उन खुबियों पर खड़ा करके उन्हें अच्छे कामों में लगाना और अच्छाई में परिवर्तन करके उनकी बुराई परिवर्तन की कोशिश करना

    उन्हें अपने साथ मिला लेना प्रेम से अपना बना लेना और स्वयं में उनका विश्वास बिठाकर, उन्हें स्नेह देकर,उनके अवगुण को मैत्री भाव से हर लेना!उन्हें अपने से आगे रखना अर्थात् आगे बढ़ाना!उनके कार्य की यथोचित सरहाना करना, ' वाह-वाह ' करके उन्हें हिम्मत दिलाना तथा और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना!अपने उँचे विवेक द्वारा उनकी विवेक-युक्त्त रीति से उनकी विचारधारा को पलटना!अपने हर एक कार्य में अलौकिकता के द्वारा उन्हें अलौकिक बनाना*जब तक हम यह नहीं समझेगे कि परिवर्तन पहले मुझे करना है तब तक हमारे  मे परिवर्तन की प्रक्रिया  आयेगी नहीं!इस कार्यक्रम में नगर के अनेक समाजसेवी और विद्वत जन बुद्धिजीवी उपस्थित थे कार्यक्रम के अंत में सभी ने आत्मा का प्रतीक दीपक जलाए और महालक्ष्मी जी की आरती करके अपने जीवन को इनके समान बनाने की प्रेरणा प्राप्त कि। सभी को नव वर्ष के आरंभ की, दीपावली की मिठाइयां बांटी गई और आतिशबाजी की गई।

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