गरियाबंद में विशाल रैली का आयोजन: धूमधाम से मनाई गई शहर में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती, रैली का जगह-जगह हुआ स्वागत - fastnewsharpal.com
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गरियाबंद में विशाल रैली का आयोजन: धूमधाम से मनाई गई शहर में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती, रैली का जगह-जगह हुआ स्वागत

 गरियाबंद में विशाल रैली का आयोजन: धूमधाम से मनाई गई शहर में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती, रैली का जगह-जगह हुआ स्वागत



गरियाबंद

बाबा साहेब डॉ भीम राव अम्बेडकर की 131 वीं जयंती प्रदेश भर में मनाई जा रही है। वीर सुरेंद्र साय महाविधलय परिसर में स्थित बाबा साहेब की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया। इस दौरान बाबा के विचारों को परिलक्षित करने वाली झांकी भी निकाली गई



गरियाबंद में  भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती शहर में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर शहर  के अम्बेडकर चौक से एक विशाल रैली निकाली गई, जो शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए वीर सुरेंद्र साय महाविद्यालय पर समाप्त हुई।





बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 131 वीं जयंती को लेकर अम्बेडकर चोंक  से पैदल व बाइक रैली दोपहर 3 बजे से निकाली गई। रैली मस्जिद चौक  चौक,गोल बजार से होते हुए तिरंगा चौक  से होते हुए वीर सुरेंद्र साय महाविद्यालय पर  पहुंचीं 


रैली में डी.जे. पर बाबासाहेब की जीवनी सम्बन्धी प्रेरणादायक गानों पर युवाओं ने जमकर डांस किया। इस मौके अम्बेडकरवादी संगठनों से जुड़े पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद थे।



देशभर में आज संविधान के निर्माता बाबा साहेब बीआर अंबेडकर की जयंती मनाई जा रही है. 31 मार्च 1990 को उन्हें मरणोपरांत सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था. उन्होंने ना सिर्फ आजादी की लड़ाई में ना सिर्फ एक अहम भूमिका निभाई बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र के लिए संविधान निर्माण की भी जिम्मेदारी उठाई. हर साल उनकी जयंती को धूमधाम से सेलिब्रेट किया जाता है.



14 अप्रैल 1891 में जन्मे बाबा साहेब की इस साल 131वी जयंती मनाई जा रही है. आपको बता दें, डॉ. बीआर अंबेडकर की जयंती के दिन सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया गया है. उन्होंने देश से जाति प्रथा और समाज में कुव्यवस्था को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई थी. उनका मानना था कि सभी जाति के लोगों को एक जैसा अधिकार मिलना चाहिए ताकि आगे चलकर किसी भी प्रकार भेदभाव ना हो. उन्होंने अपने जीवन काल में कई महत्वपूर्ण आंदोलनों में भी हिस्सा लिया. एक दलित परिवार से आने वाले बीआर अंबेडकर ने अपने जीवन में बहुत यातनाएं झेलीं लेकिन कभी किसी कमजोर का साथ नहीं छोड़ा. यही वजह है कि वे आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं. उन्हें आज भी उतने ही आदर और सम्मान के साथ याद किया जाता है.

कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित-

सुरेंद्र सोनटेके,पुन्नू कुटारे सुजीत कुटारे, मुकुंद कुटारे संजीव सोनटेके, देवेंद्र कुटारे , भूषण गजभिये , किशोर रामटेके, नागेश गजभिये , दीपक बौद्ध, नारद मेश्राम छगन पचभिये गिरधर गजभिये नन्दकुमार सुभाष खापर्डे जितेश कुटारे मुकेश रामटेके गोविंद उइके जयप्रकाश कुटारे आदि जितेश सुखदेवे युवराज कुटारे भिवा शेंडे। सन्तोष खापर्डे गोरेलाल गनवीर तुषार डोंगरे शननी धारगवे विकाष रामटेके विशाल कुटारे जमुना गजभिये मेघा सुखदेवे शिला कुटारे अंजूदेवी सोनटेके पूर्णिमा गजभिये बिंदा बाई सोनटेके कुमारी डोंगरे सरला उइके कल्पना वैध राजेश वैध कपूर रामटेके गंगा रामटेके  सूरज रंगारी प्रवीण उइके चेतन मेश्राम पुरब खापर्डे देवेश सुखदेवे तुषार डोंगरे शननी धारगवे शननी धारगवे गीता उइके।

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