*सत्ता बदलते ही रेत माफिया बेखौप और नियमो की धज्जियां उड़ाते खुलेआम कर रहा है रेत डंप*
सत्ता बदलते ही रेत माफिया बेखौप और नियमो की धज्जियां उड़ाते खुलेआम कर रहा है रेत डंप
राजेन्द्र साहू मगरलोड
ब्लॉक मुख्यालय के आस पास के क्षेत्रों में अवैध रेत परिवहन जोरों से चल रहा है। जैसे ही सत्ता बदली वैसे ही रेत माफिया खुलेआम दिन के उजालों में रेत डंप कर रहा है। ना किसी का खौफ है। ना ही प्रशासन का डर है। नदी वही है,क्षेत्र की जनता वही और नेता भी वही है।बदली है तो सिर्फ सत्ता बदली है ।
ज्ञात हो ,की कुछ वर्षो पहले गांव के ही अपने आप को समाज के हितैषी बताने वाले नेता आज मौन बैठा है। लेकिन आज वही समाज सेवक अपने ही आंखों से पैरी नदी की श्रृंगार को, एवं खजाना को लुटता हुआ देख रहे हैं। उसी पैरी नदी की रेत को चोरी होता हुआ देख रहे आखिर क्यों अब आज वही पैरी नदी के श्रृंगार रूपी रेत को बचाने के लिए आवाज क्यो नही उठाया जा रहा है।की इसलिए की अब सत्ता बदल गयी, समय बदल गया हैं,ये अपने आप मे महत्वपूर्ण सवाल बना हुआ है।
ज्ञात हो,की पैरी नदी से रेत निकाल कर ग्राम पंचायत शुक्ला भांठा के नहर के पास डम कर हाईवा में लोडिंग करा कर शहरों की ओर अधिक दामों में रेत माफिया रेत को बेचा जा रहा है। छत्तीसगढ़ के जीवन दायनीय पैरी नदी कहे जाने वाली पैरी नदी का रात,दिन सीना चीरकर रेत चोरी कर रेत माफियो का हौसला बुलंद नजर आ रहा है। रेत माफियो के द्वारा दिन दहाड़े मंगलवार को 4:30 बजे हाईवा में लोडिंग करा रहा था। इस संबंध में हमारे प्रतिनिधि द्वारा ग्राम पंचायत शुक्ला भांठा के सरपंच का मोबाइल से संपर्क कर पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने बताया की हमारे पास कोई अनुमति नहीं दिया गया है और ना ही इस संबंध में हमें किसी भी प्रकार का जानकारी नहीं है।
और प्रशासन को कानो कान इसकी भनक भी नही लग रहा है। क्यो? प्रशासन चुप्पी साधा नजर आ रहा है यह बड़ा सवाल बना रहा है।क्षेत्र में हो रहे अवैध रेत परिवहन के विषय मे मगरलोड नायब तहसीलदार से मोबाईल फोन से पक्ष जानने की कोशिश किया गया तो संपर्क नहीं हो पाया और संपर्क हुआ तो मोबाइल रिसीव नहीं किया गया । अनुमान लगाया जा सकता क्या आगे भी क्षेत्र में इस प्रकार से अवैध रेत परिवहन होता रहेगा ? क्या विभाग के अधिकारी आगे भी इसी तरह मौन दिखेगा? ये महत्वपूर्ण सवाल बना हुआ। देखने वाली बात रहेगा आखिर कब तक शासन के खनिज संसाधनों को माफियाओ द्वारा चोरी करता हुआ नजर आयेगा और शासन को चुना लगाता रहेगा।मगरलोड क्षेत्र अंतर्गत ये भी देखने को मिला है। साथ ही शिकायत के बाद भी खनिज विभाग के कोई अधिकारी कर्मचारी रेत खदान में झाँकने तक भी नही पहुँचते और जब पहुँचते भी,है तो बड़ी मछली खदान से भग जाती है और अधिकारियों के हाथों सिर्फ छोटे मछली ही हाथ लगती है।इससे खुले आम आंखों से रेत माफियों एवं विभागी अधिकारीयो की मिलीभगत दिखाई पड़ता है। आपको बता दे कि सरकार को मिलने वाली लाखो की रायल्टी बतौर रुपये को खनिज विभाग के अधिकारी और माफियो द्वारा मिलीभगत कर शासन को मिलने वाली रॉयल्टी बतौर राशि को चुना लगाने में कोई कसर नही छोड़ा है। साथ ही अधिकारी अपने मुख्यालय में बैठकर ही क्षेत्र में अपनेकार्यो को पूरा करते नजर आते है जो शिकायत मिलने के बावजूद भी अवैध खनन व परिवहन पर रोक नही लगा ते हैं।
