*आज का सुविचार*
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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..19-09-2020*..🎋
✍🏻रब ने सभी को धनुष के आकार के होंठ दिये है मगर इनसे शब्दों के बाण ऐसे छोड़िये जो सामने वाले के दिल को छू जाये ना की दिल को छेद जाये।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *ओमशान्ति*🌷
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻हमारी कमाई हुई संपत्ति का बंटवारा कोई भी कर सकता है लेकिन हमारे कर्मों का बंटवारा कोई नहीं कर सकता। हमारे द्वारा किये हुए कर्मों का फल हमें ही मिलेगा।
🌹 *ओमशान्ति.*🌹
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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*19 सितम्बर:-*_ एकाग्रचित होकर किया गया कार्य अवश्य ही सफल होता है, यदि मन को *परमात्मा* में एकाग्र करो तो हर कार्य में सफलता ही मिलती है।
🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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एक गुरु ने अपने शिष्य से कहा, और भले कहीं से भी भिक्षा मांग कर लाओ परंतु उत्तर दिशा में स्थित जंगल से लगते गांव से कभी ना लाना । शिष्य गुरु की बात का पूरे मनोयोग से पालन करता रहा पर एक दिन गलती हो गई और भिक्षा लेने उसी वर्जित गांव में जा पहुंचा । वहां ऐसे लोगों की बस्ती थी जो मांस मदिरा खाते पीते थे । जब वह पहुंचा तो उसे भी मरा हुआ बछड़ा गांव के बाहर फेंकने के लिए कहा गया और बदले में खूब सारी भिक्षा दे दी गई । आश्रम पर पहुंचकर गुरुजी के आदेशानुसार उसने भोजन पकाया, दोनों ने खाया परंतु आज गुरु जी की समाधि नहीं लगी, मन चंचल होने लगा । आखिर अनुभवी गुरु को शक हुआ, शिष्य से भिक्षा के बारे में पूछा तो शिष्य ने सत्य बता दिया ।
गुरुजी तो मौन हो गए पर शिष्य को बड़ा पश्चाताप हुआ और कुछ दिन बाद उसने शरीर छोड़ दिया । जंगल से लगते हैं गांव से एक दिन एक व्यक्ति गुरुजी के पास आया और बोला, हे महात्मा, मेरे घर बालक जन्मा है पर दूध पीता नहीं है । गुरुजी ने कहा, बच्चे का मस्तक दिखाइए । तब बालक को सामने लाया गया और महात्मा जी नें आत्मिक नजर से देखते ही पहचान लिया कि यह बालक पूर्व जन्म में मेरा वही शिष्य था जो इस गांव के, इसी घर से भिक्षा लाया था । आज उसी घर में उसका पुनर्जन्म हो गया है ।
महात्मा जी ने मन ही मन उससे बात की और दूध न पीने का कारण पूछा । बच्चे ने भी आत्मिक भावों से मानो उत्तर दिया कि एक बार इस घर का अन्न खाने से यहां जन्म लेना पड़ा, अब रोज रोज इस घर का खाऊंगा, पियूंगा तो पता नहीं कौन से रसातल में जाऊंगा । महात्मा ने उसे इशारे से आश्वासन दिया कि जन्म लिया है तो खाना तो पड़ेगा लेकिन, भगवान को दिल से याद करने से अपवित्र भोजन के बंधन से वो तुझे मुक्त कर देगा, ईश्वरीय साधना से एक दिन तू बहुत महान बन जाएगा । बच्चा बाल्यकाल से ही साधना में रत रहकर बहुत महान व्यक्ति बन गया ।
हमें हमारे सम्मानीय आदरणीय बड़े हमें जिस काम के लिए मना करते हैं उसमें हमारे कल्याण का राज भरा होता है इसीलिए हमें उसकी अवमानना या उल्लंघन नहीं करना चाहिए । दूसरी यह की अन्न का प्रभाव मन पर, फिर पूर्ण जीवन पर और पुनर्जन्म पर भी पड़ता है । तामसिक पदार्थों, तामसिक वृत्तियों से बना भोजन हमारी साधना की कमाई को ले डूबता है और फिर उस अन्न बंधन से मुक्त होने के लिए हमें वही जन्म भी लेना पड़ता है ।
शिव बाबा कहते हैं कि संन्यासी लोग गृहस्थियों का अन्न खाते हैं तो अगले जन्म में उन्हीं के यहां जन्म लेना पड़ता है और फिर नए सिरे से सन्यास की साधना करनी पड़ती है । पिछली साधना अन्न के प्रभाव से समाप्त हो जाती है । इसीलिए बाबा ने नियम बताया, बाबा की याद में सात्विक पदार्थों से बना हुआ भोजन प्रभु स्मृति में खाओ तो वह दुख भंजन प्रसाद बनकर जन्म जन्मांतर के कर्म बंधनों को काटने वाला सिद्ध होगा ।
आजकल लोग शिष्टाचार वश, मित्रता वश, आत्मीयता वश और कई बार स्वाद वश भी दूसरों के दिए खाद्य पदार्थ को ठुकराना नहीं चाहते । मानवता के शत्रु इसी भावना का गलत फायदा उठा कर कईयों को बहुत कष्ट में डाल देते हैं । इसीलिए सांसारिक सुरक्षा के लिए भी और आध्यात्मिक सुरक्षा के लिए भी हर खाद्य पदार्थ को परखकर प्रयोग करना है, नहीं तो जीवन रक्षक भोजन को जीवन नाशक बनते देर नहीं लगती है ।


