*आज का सुविचार*
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💠 *Aaj_Ka_Vichar
17-09-2020*..🎋
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*_सब से कठिन काम है, सब को खुश रखना !_*
*_सब से आसान काम है, सब से खुश रहना !!_*
🌹🌹🌹🌹🌹🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀 ओमशान्ति
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *ओमशान्ति*🌷
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻जब भी किसी जरूरतमंद की आवाज़ तुम तक पहुंचे तो परमात्मा का शुक्र जरूर अदा कीजिए, क्योंकि उसने किसी की मदद के लिए आपको चुना हैं, वर्ना परमात्मा तो सबके लिए अकेला ही काफी हैं।
🌹 *ओमशान्ति*🌹
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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*17 सितम्बर:-*_ वक़्त और हालात दोनों इंसान की ज़िन्दगी में एक जैसे नही होते, वक़्त इंसान की ज़िन्दगी का हालात बदल देता है।
🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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*📚★ प्रेरणादायक ★📚*
_★ आदिवासियों के एक छोटे से गांव में एक बनिया अनाज तथा किराना की दुकान चलाता था । एक गरीब महिला ने ₹100 का नोट बनिए के हाथ पर रखा और ₹60 का सामान लिया, फिर बनिया अन्य ग्राहकों को सामान देने लगा । महिला खड़ी रही समय बीतता जा रहा था महिला ने बचे हुए ₹40 मांगे । बनिए ने कहा- तुम्हें ₹40 तो उसी समय दे दिए थे । महिला बोली, नहीं सेठ, तुमने मुझे पैसे नहीं दिए, मुझे कुछ और सामान भी लेना है, सो मुझे ₹40 दे दीजिए ।_
_◆ बनिये के बार-बार यह कहने पर कि मैंने रुपए दे दिए हैं, नौकर बोला सेठजी, इसके ₹40 देने अभी बाकी है । अब सेठ, नौकर पर बरस पड़ा- इतना ही तुझे है तो तू अपनी जेब से दे दे । यह सुन असहाय महिला फिर से गिड़गिड़ाई- सेठ, अभी भी मुझ गरीब के ₹40 दे दे वरना ....। महिला के ऐसा बोलने पर सेठ भड़क उठा, क्या कर लेगी, मैंने रुपए दे दिए हैं । सेठ, एक गरीब, लाचार की हाय मत लो, मैं आखरी बार कह रही हूं -महिला आंसू भर कर बोली लेकिन सेठ के दिल में तो लोभ था । वह बोला, क्या तुम को दोबारा चाहिए ?_
_◆ आखिर लाचार महिला का दिल जल उठा, अंतर्मन से हाय निकली, सेठ एक माह में तुम्हारी दोनों आंखों की रोशनी चली जाएगी और आज से ठीक एक वर्ष बाद तुम इस दुनिया में नहीं रहोगे । अब तो सेठ को और ज्यादा गुस्सा आ गया बोला, चली जा यहां से क्या तेरे कहने से ऐसा होगा ?_
_◆ लाचार की लगी हाय काम कर गई । ठीक 25 में दिन जब सेठ सुबह सोकर उठा तो उसे लगा कि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है । वह एक खंभे से टकराकर गिर पड़ा । घटना के 1 वर्ष बाद एक दिन अचानक उसे दौरा पड़ा और वह दुनिया से विदा हो ।_
_◆ मात्र ₹40 के लालच में गरीब की जो हाय ली उसका परिणाम कितना भयंकर निकला ? यह हाय इसी जन्म में पूरी नहीं हो जाती है, अगले जन्म तक भी पीछा करती है । हाय रे दुर्भाग्यशाली मानव । तेरा यह रुपया यहीं पड़ा है लेकिन वह हाय तेरा पीछा करती जा रही है । काश तू ₹40 का लोभ ना करता, महिला भी सुख से रहती, तू भी उम्र पूरी कर लेता । तेरी इस गलती से आने वाली पीढ़ियां शिक्षा ले यही शुभभामना है ।_
_◆ हराम और बेईमानी का पैसा क्या गुल खिलाता है, यह तो हम रोजाना ही देख रहे हैं । हमारे घर में जो पैसा आ रहा है, वह नीति से, प्रेम से, प्रसन्नता से, पवित्रता से, इमानदारी से, आशीर्वाद से यदि आ रहा है तो शांति देने वाला होगा अन्यथा नहीं । करोड़पति, अरबपति, लखपति यह सिर्फ पैसे के होते हैं पर शांति के तो भिखारी ही होते हैं । अपवाद अलग चीज है । बुजुर्गों ने सत्य कहा है - सताइए ना गरीब को रो देगा, सुन ली गर खुदा ने तो, जड़ से खोद देगा ।_
_◆ हमें यह तय करना है कि हमें शांति से कमाया गया, शांति प्रदान करने वाला कम पैसा चाहिए या अशांति के साथ कमाया गया अशांतकारी विपुल धन ।_
*🏮★ ओम शान्ति ★🏮*
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