*पत्रकार कमल शुक्ला पर हुए हमलें के दोषियों को सख़्त सजा मिलें- श्रवण साहू* - fastnewsharpal.com
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*पत्रकार कमल शुक्ला पर हुए हमलें के दोषियों को सख़्त सजा मिलें- श्रवण साहू*

 पत्रकार कमल शुक्ला पर हुए हमलें के दोषियों को सख़्त सजा मिलें- श्रवण साह


एक पत्रकार पर हमला सत्य और सच से जागृत होने वाले जनमानस पे हमला है

अभिमन्यू नेताम,कुरूद

ऑल इंडिया मीडिया एसोसिएशन के धमतरी जिला प्रभारी और सामाजिक कार्यकर्ता श्रवण कुमार साहू ने वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला पर हुए जानलेवा हमले की कड़ी निंदा करते हुए घटना को लोकतंत्र पर हमला बताया हैं। और हमलें में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की हैं।


जिला प्रभारी श्रवण साहू ने कहा कि पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर मुहिम चलाने वाले वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला पर हमला स्तब्ध और विचलित करने वाली ख़बर हैं। वे प्रशासन द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार, रेत खनन के नाम पर सत्ताधारी पार्टी के लोगों द्वारा किये जा रहे घोटालों और आदिवासी विकास योजनाओं के नाम पर हो रही लूट को उजागर कर रहे थे। इससे वे सत्ताधारी पार्टी के नेताओं, प्रशासन के भ्रष्ट अधिकारियों और स्थानीय माफिया -- तीनो के निशाने पर थे। कांग्रेस के शासन काल में पुलिस थाना के सामने पुलिस की मौजूदगी में असामाजिक तत्वों द्वारा पिस्टल लहराकर कानून एवं न्याय को अपने हाथ मे लेना यह दर्शाता हैं कि छत्तीसगढ़ में गुंडाराज और तानाशाही को बढ़ावा मिल रहा हैं। अगर कमल शुक्ला जैसे निर्भीक, आईटी कार्यकर्ता और वरिष्ठ पत्रकार के साथ यह सब हों सकता तो आम पत्रकारों का खासकर के सुदूर क्षेत्रों में काम कर रहे पत्रकारों का क्या हाल होगा यह अपने आप मे एक गंभीर चिंता का विषय है। यह हमला किसी एक पत्रकार पे नही बल्कि सत्य और सच से जागृत होने वाले जनमानस पे हमला है। 


उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार एक ओर जहां प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की बात करती है वहीं दूसरी तरफ सरकार के इशारों पर चलने वाले गुंडे-बदमाश पत्रकारों पर जानलेवा हमला करने पे आमादा हो गए हैं। सरकार के गुंडों ने आज उस पत्रकार पर हमला किया है जो हमेशा पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए पूरे सिस्टम से अकेले ही लड़ते रहें हैं। इस घटना से साफ है कि प्रदेश में जनहित के मुद्दों पर ईमानदारी से काम करने वाले पत्रकार पहले भाजपा राज में जितने असुरक्षित थे, उतना ही वे आज कांग्रेस राज में भी है।


इस घटनाक्रम का वायरल वीडियो और पत्रकार का बयान हमलावरों की पहचान करने के लिए काफी है और इन्हें शीघ्र गिरफ्तार किया जाना चाहिए किन्तु अब तक दोषियों की गिरफ्तारी करने में पुलिस प्रशासन के हाथ पांव फूल रहें हैं। पर्दे के पीछे सक्रिय दोषियों को भी नहीं छोड़ा जाना चाहिए। इन असामाजिक तत्वों से सांठगांठ करने वाले प्रशासन के अधिकारियों को निलंबित कर पीड़ित पत्रकारों को न्याय दिलाने की मांग  करते हैं।

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