*आज का सुविचार*
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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..25-09-2020*..🎋
✍🏻सड़कों पर लगे सुंदर लैंप की तरह होते हैं वे हमारी यात्रा की दूरी को तो कम नहीं कर सकते लेकिन हमारे पथ को रोशन और यात्रा को आसान करते हैं।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *σм ѕнαитι*🌷
ओमशान्ति
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻मुसीबत आए तो ये मत सोचना कि अब कौन काम आएगा, बल्कि ये देखना अब कौन साथ छोड़ कर जाएगा।
🌹 *ओमशान्ति*🌹
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विडियो देखे व सुने
*25 सिंतबर 2020*
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*आज की पालना*
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जैसे आजकल साइन्स के साधनों द्वारा रफ माल को भी बहुत सुन्दर रूप में बदल देते हैं। तो आपकी श्रेष्ठ वृत्ति निगेटिव अथवा व्यर्थ को पॉजिटिव में बदल दे। आपका मन और बुद्धि ऐसा बन जाये जो निगेटिव टच नहीं करे, सेकण्ड में परिवर्तन हो जाये।
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अनमोल वचन:
संसार में आते तो सभी हैं.लेकिन सबके आने-आने में फर्क होता है । एक व्यक्ति आता है ,बाकी सब कुछ छोड कर केवल "उस"एक परमात्मा को पाने के लिए।वह अपने जीवन को इतना दिव्य
बनाता है कि देखते ही देखते आध्यात्मिक जगत में छा जाता है ।ऐसा व्यक्ति प्रभु प्रेमी होता है, ऐसों को संसार सालों-साल याद रखता है और एक व्यक्ति ऐसा आता है जो "उस" परमात्मा को छोड कर बाकी सब कुछ पा लेना चाहता है चाहे उसके लिए उसे कितना भी नीचा गिरना पडे,ऐसा व्यक्ति साधारण इन्सान होता है वह इन्सान होकर भी,न तो इन्सान की तरह जीता है और न इन्सान की तरह मरता है ।ऐसा व्यक्ति विषय-भोग प्रेमी होता है । ऐसों को जमाना याद करना तो बहुत दूर,जल्दी से जल्दी भुला देना चाहता है.........
🙏 ओम् शान्ति 🙏
🎈 आपका दिन शुभ हो 🎈
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*भावना के बदले भावना चाहिए, लेकिन कर्तव्य के बदले कुछ नहीं चाहिए। कर्तव्य तो निःस्वार्थ भावना से किए जाते हैं। छोटी-सी भूल सदियों की सजा बन जाती है, इसलिए हमें जीवन सही और व्यवस्थित तरीके से जीना चाहिए।*
*जिन माँ-बाप ने हमें खून दिया उन्हें बुढ़ापे में खून के आँसू बहाने पर मजबूर करना कायरता है। जिन्होंने अपने खून से हमे बड़ा किया उनके लिए खून बहा देना मानवता है। जबकि असहाय जीवों का खून बहा देना हिंसा और अमानवीयता है।*
*भगवान राम ने कर्तव्य की खातिर सौतेली माँ के वचनों को स्वीकार कर लिया, क्या आप भी इतने कर्तव्यनिष्ठ होकर अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। अगर नहीं तो आपका जीवन सार्थक नहीं है। श्रवण कुमार अपने पुत्र होने का कर्तव्य बगैर किसी तर्क के निभाता है। कर्तव्य के पालन में तर्क नहीं समर्पण की जरूरत पड़ती है।*
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✌👌
एक व्यक्ति एक दिन बिना बताए काम पर नहीं गया.....
मालिक ने,सोचा इस कि तन्खाह बढ़ा दी जाये तो यह
और दिल्चसपी से काम करेगा.....
और उसकी तन्खाह बढ़ा दी....
अगली बार जब उसको तन्खाह से ज़्यादा पैसे दिये
तो वह कुछ नही बोला चुपचाप पैसे रख लिये.....
कुछ महीनों बाद वह फिर ग़ैर हाज़िर हो गया......
मालिक को बहुत ग़ुस्सा आया.....
सोचा इसकी तन्खाह बढ़ाने का क्या फायदा हुआ
यह नहीं सुधरेगाऔर उस ने बढ़ी हुई
तन्खाह कम कर दी और इस बार उसको पहले वाली ही
तन्खाह दी......
वह इस बार भी चुपचाप ही रहा और
ज़बान से कुछ ना बोला....
तब मालिक को बड़ा ताज्जुब हुआ....
उसने उससे पूछा कि जब मैने तुम्हारे ग़ैरहाज़िर होने के बाद तुम्हारी तन्खाह बढा कर दी तुम कुछ नही बोले और आज तुम्हारी ग़ैर हाज़री पर तन्खाह
कम कर के दी फिर भी खामोश ही रहे.....!!
इस की क्या वजह है..? उसने जवाब दिया....
जब मै पहले ग़ैर हाज़िर हुआ था तो मेरे घर
एक बच्चा पैदा हुआ था....!!
आपने मेरी तन्खाह बढ़ा कर दी तो मै समझ गया.....
परमात्मा ने उस बच्चे के पोषण का हिस्सा भेज दिया है..
और जब दोबारा मै ग़ैर हाजिर हुआ तो मेरी माता जी
का निधन हो गया था...
जब आप ने मेरी तन्खाह कम
दी तो मैने यह मान लिया की मेरी माँ अपने हिस्से का
अपने साथ ले गयीं.....
फिर मै इस तनख्वाह की ख़ातिर क्यों परेशान होऊँ
जिस का ज़िम्मा ख़ुद परमात्मा ने ले रखा है......!!
!! एक खूबसूरत सोच !!
अगर कोई पूछे जिंदगी में क्या खोया और क्या पाया,
तो बेशक कहना,
जो कुछ खोया वो मेरी नादानी थी
और जो भी पाया वो प्रभू की मेहेरबानी थी,
खुबसूरत रिश्ता है मेरा और भगवान के बीच में,
ज्यादा मैं मांगता नहीं और कम वो देता नहीं.....!!


