*मुफलिसी में जिंदगी जीने को मजबूर है यह परिवार,नही सुन रहा कोई फरियाद* - fastnewsharpal.com
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*मुफलिसी में जिंदगी जीने को मजबूर है यह परिवार,नही सुन रहा कोई फरियाद*

मुफलिसी में जिंदगी जीने को मजबूर है यह परिवार,नही सुन रहा कोई फरियाद


जयलाल प्रजापति नगरी(धमतरी)

 केंद्र सरकार गरीबों की मदद के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना चला रही है लेकिन क्या इस योजना का लाभ इन परिवारों को मिल रहा है.इसकी हकीकत क्या है धमतरी के बेलरगांव में रहने वाले श्रवण कुमार की तकलीफों को देखकर समझा जा सकता है.हालांकि श्रवण कुमार के पत्नी के नाम पर आवास स्वीकृत जरूर है लेकिन जिम्मेदारों के लापरवाही की वजह से अब भी यह परिवार बाजार में शेड के नीचे रहने को मजबूर है.



मुफलिसी में जी रहे श्रवण और उनका यह परिवार बीते 10 वर्षो से अपनी जान जोखिम में डालकर टीन शेड के नीचे रहने के लिए मजबूर है.इस परिवार ने कई बार ग्राम पंचायत के सरंपच सचिव से लेकर कलेक्टर तक आवेदन देकर थक चुका है, लेकिन अब तक उन्हें एक आवास नसीब नहीं हो पाया है.परिवार के पास अपने भरण पोषण के लिए इंतजाम तक नहीं है ऐसे में वे कैसे अपने लिए खुद का घर बना सकते है.इसलिए उन्होंने काफी दौड़ भाग कर आवास योजना स्वीकृत कराया.पर लापरवाह सिस्टम के चलते श्रवण और उनके परिवार को स्वीकृति के दो साल बाद भी आवास नही मिल पाया.



नगरी ब्लॉक के बेलरगांव के रहने वाले श्रवण रोजी मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करते है.पत्नी मानसिक रूप से विकलांग है और बेटा मूकबधिर है.परिवार में कुल चार लोग है और वर्षो से ये बाजार स्थित शेड में रहते आ रहे है चाहे वह भारी बरसात हो या भीषण गर्मी.वैसे सरकार और शासन की ओर से इस परिवार को सुविधा के नाम पर सिर्फ राशन मिल पाता है लेकिन घर में दो दिव्यांग है उन्हें कोई पेंशन नही मिलती.ऐसे में पूरे परिवार की जिम्मेदारी श्रवण के ऊपर है।

श्रवण बताते है कि परिवार से अलग होने के बाद उनके पास न घर रहा और न कमाने का जरिया बचा.इसलिए उन्होंने अपना आशियाना बाजार शेड को ही बना लिया.इस बीच उन्हें कई सारी समस्याओं से जूझना पड़ा.उसने जब प्रधानमंत्री आवास योजना के बारे में सुना तो उसने ग्राम पंचायत में आवेदन दिया.दो साल पहले उनके नाम पर आवास स्वीकृत भी हो गया लेकिन काम अब तक शुरू नही हो सका है और अब वह पक्के आवास के लिए दर दर भटक रहा है।

ग्राम पंचायत की माने तो योजना का लाभ देने के लिए पंचायत के पास जमीन नही है इस वजह से श्रवण को आवास योजना लाभ नही मिला.लेकिन उनकी माली हालात को देखते हुए उन्हें योजना का लाभ दिलाने के लिए प्रयास किया जाएगा.इधर जिला प्रशासन नियमों का हवाला देते हुए उन्हें योजना का लाभ दिलाने की बात कर रहा है।

जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना की बात करें तो वर्ष 2016-17 में आवास बनानें का लक्ष्य 12900 था.इनमें से 12792 आवास का निर्माण हुआ.वही करीब 108 आवास अपूर्ण है.इसी तरह वर्ष 2017-18 में लक्ष्य 3064 था.इनमें पूर्ण 3038 और अपूर्ण 26 रहा.वर्ष 2018-19 में लक्ष्य 16586 रहा जिसमें 15840 पूर्ण हुए तो वही 746 अपूर्ण रहा.वर्ष 2019-20 में लक्ष्य 4000 मिला है जिसमें से पूर्ण-112 हुए है वही अपूर्ण अवासों की संख्या 3888 है.बताया जा रहा है कि 2018-19 से हितग्राहियों को राशि नही मिल रही है इसलिए वजह से काम पेंडिंग है.इसके अलावा इनमें से कुछ लोगों की मृत्यू हो गई और कई पलायन कर गए।

बहरहाल श्रवण एक बार फिर सरकार और प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहा है देखना होगा कि अब प्रशासन कब नींद से जागती है और एक गरीब को कब तक उनका आशियाना मिलता है।

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