*सात समंदर पार से मिले शब्दों को आरु साहू ने दी आवाज,सोशल मीडिया में छाया गीत*
सात समंदर पार से मिले शब्दों को आरु साहू ने दी आवाज,सोशल मीडिया में छाया गीत
जयलाल प्रजापति नगरी
सात समंदर पार रहकर भी अपनी मातृभूमि से प्यार को जब कोई शब्दों मे पिरोये और छत्तीसगढी मधुर आवाज इन शब्दों को सुरों में ढाल दे तो फिर क्या बात है.ऐसा ही वाक्या सोशल मीडिया में विमोचित हुए छइयां भुइयां एलबम की है.छत्तीसगढ़ की लाडली बेटी आरु साहू की खनकती आवाज को सात समंदर पार रहने वाली विभा साहू के शब्दों की ऐसी संगत मिली कि सुरों और संगीत की एक नई महफ़िल सज उठी।
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सोशल मीडिया में विभाश्री,आत्मा सिंह,छत्तीसगढ़ के गीतकार मीर अली मीर, छत्तीसगढ़ क्रन्तिकारी अमित बघेल व राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक की उपस्थिति में विमोचित होते ही यूट्यूब में गूंजने लगी आरु साहू की खनक भरी आवाज और सात समंदर पार न्यूयार्क से आई शब्दों की वो मिठास जिसे एक बार सुनने से जी नही भरता.इन गीतों को बार सुनने का जी करता है.नन्ही आरु की आवाज ने इन गीतों पर एक अलग ही छाप छोड़ी है वहीं विभा साहू ने अपने शब्दों की पकड़ को छत्तीसगढ़ की माटी की सौंधी महक को लोगो तक पहुचाने का काम किया है.गायिका आरु साहू के पिता शीत व चाचा बसंत ने कहा कि यह गीत रिलीज होते ही एक नए रिकार्ड की ओर अग्रसर है।
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छत्तीसगढ़ की लाडली आरु साहू की गीतों को वैसे भी पूरे हिंदुस्तान में काफी दुलार मिलता रहा है,लेकिन इस बार इस नन्ही गायिका को सात समंदर पार से शब्दों का साथ मिला है.छत्तीसगढ़ की संस्कृति को विदेशी धरती में रहने के बाद भी छत्तीसगढ़ की शब्दो को अपने दिल से पिरो कर प्रस्तुत करने वाली विभा साहू की संगत निश्चित ही एक नया आयाम स्थापित करेगी।




