कोरोना
*जिस दिन ये थक गए ,उस दिन हमारी सबसे बड़ी गलती का एहसास हमें होगा*
बुधवार, 23 सितंबर 2020
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जिस दिन ये थक गए ,उस दिन हमारी सबसे बड़ी गलती का एहसास हमें होगा
छत्तीसगढ़ संविदा स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा कोरोना महामारी संकट के समय अपनी जान जोखिम में डालकर सेवाएं दे रहे हैं। आपको बता दें कि 21 मार्च से जब से देश में महामारी बतौर कोरोना लोगों को अपनी चपेट में ले कर अपनी संख्या बढ़ाते जा रहे हैं वहीं स्वास्थ्य कर्मी को स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी जो एक जिम्मेदार पद पर बैठे हैं उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों को सुरक्षा किट नही दे रहे है साथ ही उनके द्वारा संकट के समय में अपनी जान जोखिम में डालकर अपनी सेवाएं दे रहे
स्वास्थ्य कर्मियो को सुरक्षा प्रदान नहीं कर रहे हैं दूसरी बात यह भी है कि राज्य में बैठे सरकार जो चुनाव के पहले अपने घोषणा पत्र में लिखा गया है कि सबसे पहली प्राथमिकता यही रहेगी कि जो संविदा पद पर है उन्हें नियमितीकरण किए जाने का बाद में सरकार बनते ही अपने घोषणा पत्र में लिखा गया शब्द ही सरकार पद में आते ही भूल गए है और महज 3 सालों से पद में बैठे अब अपनी घोषणापत्र को ही भूल गए हैं आपको बता दें कि महज 10 से 20,000 की वेतन में यह स्वास्थ्य कर्मी अपनी सेवाएं दे रही है पर उच्च पद में बैठे स्वास्थ्य अधिकारी जो अपने ऑफिस में बैठकर ही फरमान जारी करते हैं उन्हें क्या पता इस कोरोना संकट के समय अपनी सेवाएं देना अपनी जान जोखिम में डालकर साथ ही परिवार को भी जोखिम भरे इस स्थिति में रखकर अपनी सेवाएं दे रही है। आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ संविदा स्वास्थ्य कर्मी द्वारा किए जा रहे धरना में उच्च अधिकारी जो स्वास्थ्य विभाग में बैठे हुए हैं अपना फरमान जारी कर बातें कहते जा रहे हैं पर यह सोचकर भी देखें कि यदि वह इस स्थिति में अपनी सेवाएं देते तो क्या करते। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी अपनी ही नेतागिरी करने में कोई कदर नही छोड़ रहे और सख्त कार्यवाही करने की बाते कर रहे हैं। साथ ही संविदा स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा अपनी मांग करना कोई गलत नही है और यह मांग जायज है। वही स्वास्थ्य विभागबके आला अधिकारी यह सोचे कि इस स्थिति में बिना सुरक्षा किट के अपनी सेवा देने इस वीडियो में देखे अधिकारी ऐसी युक्त आफिस में बैठ कर फरमान जारी करना गलत है। और जो स्वास्थ्यकर्मी कोरोना संक्रमित स्थान में अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं व जान गवा चुके है उनके परिजन से जाकर पूछे कि क्या होता है इस स्थिति में कार्य करना।
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