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*आज का सुविचार*

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..22-09-2020*..🎋


✍🏻दिल पे हरगिज़ ना लीजिए अगर, कोई आपको बुरा कहे, कायनात में ऐसा कोई है ही नहीं, जिसे हर शख्स अच्छा कहे।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *ओमशान्ति*🌷


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  💥 *विचार परिवर्तन*💥

✍🏻किसी को देख कर या किसी के प्रभाव में आ कर अपनी सोच, बोल व कर्म कभी खराब न करें क्योंकि इनसे ही हम अपने भाग्य का निर्माण करते हैं।
🌹 *ओमशान्ति*🌹

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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*22 सितम्बर:-*_ शिवशक्ति, शक्तिसेना ने शिव का संग कर किया काम क्रोध मोह लोभ अहंकार रूपी राक्षसो का सर्वनाश उसका यादगार है नवरात्रि।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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अनमोल वचन :


हमेशा यह याद रहे कि जो हुआ अच्छा हुआ,अच्छा है और अच्छा ही होना है। बुराई को बुराई के रूप में न देखें। लेकिन बुराई में भी अच्छाई को महसूस करें, कोई भी बात आये तो “क्या होगा” यह ख्याल न आये,लेकिन फौरन ख्याल आये कि“अच्छा होगा”। जो बीत गया अच्छा हुआ। यह याद रखने से हमेशा बेफ़िकर रहेंगें.........


 🙏ओम् शान्ति 🙏


🌿आपका दिन शुभ हो 🌿


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🙏 *ॐ शांति* 🙏


लोग कहते हैं कि *विश्वास* करो तो भगवान हैं और न करो तो नहीं। अरे... ईश्वर एक *अनादि* शक्ति है, उसका *अस्तित्व* हमारे विश्वास से बनता या मिटता नहीं है। केवल उससे संपर्क करने के लिये हमें *विश्वास* की तार बिछानी पड़ती है।

 

🌸 सुप्रभात... 


💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐


आन्तरिक बल -1362


-आज्ञा चक्र -62- संस्कार -5- कड़े संस्कार कैसे जीते ?


-आत्मा  की  तीन शक्तियां  है, मन, बुद्वि  और संस्कार ।


-संस्कार शक्ति में पृथ्वी के समान  चुम्बकीय गुण  है ।


-पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र में जो चीज़ आ जाती है, वह उसे अपनी ओर खींच लेती है । पृथ्वी उसे अपनी चुम्बकीय क्षेत्र से बाहर नहीं जाने देती ।


-ऐसे ही किसी व्यक्ति के मन में कोई विचार  आता  है, कोई घटना घटती है,  मन से बाहर नहीं निकलती ।


-कलयुगी लोगो की सूरत अच्छी  है, सीरत अच्छी नहीं है । मन में परेशानी है । इस परेशानी का कारण यह है कि  व्यक्ति को पुरानी बाते भूलती नहीं है । जिसे हम कड़े संस्कार का नाम देते है ।


-सब से कड़ा संस्कार है विपरीत लिंग का आकर्षण । संसार का प्रत्येक व्यक्ति इस से पीडित है । इसी के कारण संसार कुम्भी पाक नरक बन चुका  है । 


- पांच  मुख्य और  पांच  सूक्ष्म संस्कार  भी बहुत कड़े है और दुखों का मुख्य कारण हैं  ।


-इन कड़े संस्कारो से बचने की बाप दादा ( भगवान ) ने बहुत युक्तियां बता रखी हैं   । हमारे सीनियर भाई  बहिनें भी  समय समय पर इस विषय पर क्लासिज  कराते  रहते हैं  ।


-कई  बार लोग कड़े संस्कारो की ऐसी  समस्याये बताते हैं, जिस से योगियों का मनोबल भी  कम हो जाता  है और  योगी मन से   परेशान रहने लगते हैं  ।


-प्रत्येक व्यक्ति के आस पास दो तरह की आत्माये रहती हैं 1 । एक तो मोह वाली  आत्माये और दूसरी हैं  विरोधी आत्माये ।


-लौकिक परिवार अर्थात मोह वाली आत्माये  बहुत स्नेह करती हैं ! इसमे जरूरत से ज्यादा समय खर्च करना पड़ता है । यह लोहे समान कड़ा बंधन है ।अलौकिक  परिवार की  स्नेही आत्मा/आत्माये  सोने की जंजीर के समान  कड़ा बंधन है । फिर भी  यह अच्छा  बंधन है । व्यक्ति इनके सम्बन्ध से आगे बढ़ता  है । बस इस में हमे युक्ति यह निकालनी  है कि उन  का और हमारा समय व्यर्थ  खर्च  न  हो । अभी हमे विश्व सेवा में समय लगाना है । फिर सतयुग में उचित समय पर हम इन स्नेही आत्माओ के साथ सुख पूर्वक रहेंगे, समय ही समय होगा । इन के प्रति मन में दिव्यता रखनी है । 


-इन आत्माओ को हर समय शुध्द संकल्प देते रहो । इन के प्रति आप की जैसी सोच  है यह वैसे ही बन जाते है । इन्हे अपने, जैसा मन से बनाओ । इनके प्रति मन में कहते रहो आई लव यू लाइक  यू रेस्पेक्ट यू  ।  


-अगर ये बीमार है, अगर इनका  योग नहीं लगता, अगर ये प्यार से वंचित है, अगर इन का पढ़ने में मन नहीं लगता, अगर ये आप का रेस्पेक्ट नहीं करते है , तो यह आप के लिये चेलेंज बन जायेंगे,अब नहीं बनेंगे तो द्वापर युग में बनेंगे । इस लिये इन के प्रति प्यार प्रवाहित करो । व्यक्ति सिर्फ प्यार से बदलता है । बाकी सब विधियों आसुरी हैं ।


-ये आत्माये आप पर निर्भर हैं  तो इनके रोटी कपड़े का और दूसरे खर्चे का ध्यान रखना है चाहे ये कितने भी  गंदे हो । बैरी अनाज का कह कर  इन्हे कभी ताना  नहीं मारना, इस से मनुष्य बहुत आहत होता है । बच्चो और महिलाओ के प्रति खास  रहम दिल बनना है ।


-जब यह घर  से बाहर जाते है उस समय उनको मन से सकाश देते रहो, उन्हे अपनी आंखो के सामने देखते रहो, तुम स्नेही हो, तुम बुद्विवान हो, तुम प्रोफेसर हो, तुम महान बन रहे हो, तुम बहुत अच्छा  व्यवहार करते हो, तुम कभी गलती नहीं कर सकते, आप के ये भाव  उन्हे बदल देंगे । 


 - याद रखो  बहिनें बाहर तब भटकती है जब घर  में भाई  प्यार नहीं करते । भाई  बाहर तब भटकते  है जब घर  में बहिनें प्यार नहीं करती ।


-बहिनें और भाई  एक दूसरे के लिये आक्सीजन है ।


-अगर आप मुखिया हैं  और नज़दीकी  सम्बन्धों या घर  में अशांति  है तो यह और कुछ  नहीं आप की सोच  के कारण है । अपनी सोच  बदलो, सब के प्रति दयालु बनो । 


-अगर आप परिवार के  मुखिया हैं  तो आप को देखते ही आप से छोटे  भाई बहिनों  के मन में आप की आरती उतारने के विचार  आये, आप को फूल देने को मन करे । ऐसा तब होगा जब आप मन से प्यार करेगें ।


-अगर आप हर रोज 20 पेज अव्यक्त मुरली या किसी  दूसरी  सकारात्मक बुक के पढ़ते  है  तो खुद  उड़ते रहेंगे और दूसरो को उडाते  रहेंगे ।

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