*नये किसान कानून को सदी का किसानों के लिए सबसे बड़ा काला कानून --कैलाश नाथ प्रजापति*
नये किसान कानून को सदी का किसानों के लिए सबसे बड़ा काला कानून --कैलाश
जयलाल, नगरी
बेलर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष कैलाश नाथ प्रजापति ने नये किसान कानून को सदी का किसानों के लिए सबसे बड़ा काला कानून बताते हुए प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसका विरोध किया है प्रजापति ने कहा कि केन्द्र सरकार ने वर्तमान में तीन नए बिल पास किये है ।केन्द्र सरकार द्वारा इन विधेयकों के संबंध में जो बातें कही जा रही है वह किसानों को गुमराह करने वाली है इससे किसानों को कोई फायदा नही होगा बल्कि नुकसान ही नुकसान होगा । प्रजापति ने कहा कि देश इस कोरोना के संकट काल मे लाकडाउन में उबरने का कोशिश कर रहा है वही यह अध्यादेश लाना समझ से परे है क्योंकि किसानों की मेहनत की कमाई पर बड़ी -बड़ी कंपनियों ओर बिचौलियों का कब्जा हो जाएगा । जिससे किसानों को घाटा उठाना पड़ेगा । प्रजापति ने कहा कि उक्त अध्यादेश पर आगामी सत्र में इस पर चर्चा किये बिना सवाल जवाब के बिल पास करना काला कानून के समान है । किसान अभी इतना सक्षम नहीं हुआ है की वह अपनी फसल अन्य राज्यों में जाकर बेच सके नये कानून की आड़ में मोदी सरकार चंद उद्योगपतियों को फायदा पहुचाने का काम कर रही है इस नये कानून में msp का उल्लेख ना होना बहुत बड़ा साजिश है किसानों के साथ 2011 में तात्कालिक गुजरात के मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमत्री ने उस समय msp को लेकर कानून बनाने की मांग किया था मगर आज जब वे खुद सत्ता में है तो इससे क्यों मुकर रहे है कैलाश नाथ प्रजापति ने आगे अपनी बात को रखते हुए कहा की किसानों के फसल बेचने के समय दाम घटा दिया जाएगा और जब किसानों के पास फसल नही बचेगी तब दाम बढ़ा दिया जाएगा एक तरह से किसान अपने ही खेतो पर मजदूर की तरह होजाएंगे और किसानों को अपनी उपज औने -पौने दाम पर बेचने मजबूर हो जायेगे । नये किसान कानून का समर्थन वहीं लोग कर रहे है जो नोटबंदी के समयउम्मीद पाले हुए थे वहीं लोग GST कानून पर अर्थशास्त्री बन कर तारीफ कर रहे थे आज काला धन की कोई बात नहीं करता ,GST की राज्य की राशि देने में मोदी सरकार की दावे हवा हवाई साबित हो गई ठीक इसी तरह के हवा हवाई दावे अब किसानों के नये कानून को लेकर किया जा रहा है अगर केँद्र की मोदी सरकार सही मायनों में किसानों का भला करना चाहती है तो उसे धान का समर्थन मूल्य 2500 रुपए क्विंटल करना चाहिये नही तो यह कानून वापस लेना चाहिये। क्योकि इस कानून से केन्द्र सरकार किसानों के पैदावार लूटने की साजिश कर रही है जिसे किसान कतई बर्दाश्त नही करेंगे ।
