*अनोखा पेड़*
अनोखा पेड़
जयलाल प्रजापति नगरी (धमतरी)
ना जाने इन चार सौ सालो मे दुनिया मे क्या क्या बदलाव हुए होंगे,कितने बाढ़,सूखे और भयंकर आंधी तूफान आये होंगे जिसमे दुनिया के नक्शे मे कितने बार बदलाव भी हुआ होगा लेकिन इन सब के बाद भी नही बदला है तो वह है धमतरी के दुगली गांव का सरई वृक्ष.ये पेड़ चार सौ सालो अडिग होकर खड़े हुए है जिसे आज लोग कुदरत का करिश्मा मानते है और इसे देव के रूप मे पूजा पाठ कर रहे है वही वनविभाग ने इस पेड़ को वन धरोहर का दर्जा दिलाने कोशिशो में जुटा है बता दे कि यह प्रदेश का दूसरा सबसे पुराना पेड़ है|
वैसे तो दूर से देखने पर ये दरख्त एकबारगी मामूली सा जान पडता है लेकिन जब अतीत के झरोखे मे झांकते है तो ये खुलासा होता है कि चार सदी तक वक्त के थपेड़ो को अपने सीने पर झेल चुका ये सरई पेड़ अलहदा है जिसके चलते लोग इसकी पूजा पाठ भी करने लगे है.
धमतरी से 50 किलोमीटर दूर दुगली गांव के
जंगलों के बीच मौजूद खास किस्म का यह सरई पेड़ है जो उम्र दराज के मामले मे
सूबे मे दूसरा मुकाम रखता है इस दरख्त की खासियतो के चलते लोग इसे सरई बाबा
के नाम से पुकारते है और इसकी इबादत करते है.दिलचस्प बात ये है कि चार सौ
सावन देख चुका यहा दरख्त सेहत के नजरिये से आज भी दुरूस्त नजर आता है और
लोगो को साफ हवा के साथ फल भी दे रहा है.किसी अजूबे की तरह लगने वाले इस
दरख्त को जिले के वन महकमे ने अब एक धरोहर मान लिया है और पेड़ के रख रखाव
मे कोई कसर बाकी नही रख रहा है.रोजाना महकमे के मुलाजिम दरख्त की निगहबानी
करते है जिसका नतीजा ये है कि आज तक कोई भी इस पेड़ पर कुल्हाड़ी चलाने की
जुर्रत नही कर पाया.महकमे के अफसरो की माने तो इस पेड़ लम्बाई और मोटाई ही
इसके उम्र की तस्दीक करते है.उनके मुताबिक इस पेड़ की लम्बाई 45 मीटर और
गोलाई 446 सेंमी है.अफसर इसे मदर ट्री बता रहे है और इसे वन धरोहर का दर्जा
दिलवाने शासन को प्रस्ताव भेज दिए जाने की बात कह रहा है.
ना जाने
कितने इतिहास को अपने आप मे समेटे हुआ है ये सरई का वृक्ष जो अपने आप मे
किसी कुदरत के करिश्मे से कम नही है जिसके चलते पूरे दुगली ईलाके के लोग
इसे देव रूप मान कर इस वृक्ष का पूजा पाठ करते है.साथ ही लोग इस पेड़ को सरई
बाबा के नाम से पुकारते है और इस पेड़ को अपने पूर्वज मानते है.लोगो को अगर
कोई परेशानी या तकलीफ होती है तो इस सरई बाबा के साथ साझा करते है जिससे
लोगो के सारी परेशानियां दूर हो जाते है.आलम ये है कि अगर घर मे शादी ब्याह
,जन्मोत्सव और कोई भी नया कार्य शुरू करने से पहले ईलाके के लोग इसकी पूजा
आराधना करने के बाद शुभ कार्य की शुरूआत करते है जिसके चलते लोग दूर दराज
से इस पेड़ को देखने आते है और पूजा पाठ करके मनोकामना मांगते है.
इस
सरई पेड़ का महत्व आदि जमाने से चली आ रही है जो इस पेड़ को अनोखा साबित
करती है.लोग बताते है की पहले पूर्वज के लोग भूख लगने पर सरई के फल और महुआ
के फल को पका कर खाते थे जिससे भूख शांत हो जाया करती थी और सरई के फल में
कई लाभकारी गुण होते है जिसके चलते इस सरई बाबा के पेड़ की पूजा पूर्वज
सदियो से करती आ रही है.
बहरहाल जिले का वनविभाग सरई बाबा के पेड़ की खासियत को लोग जाने पाए इसके लिए बकायदा एलबम भी बनाया गया है जिसमे इस पेड़ की उपलब्धि बताया गया है.साथ ही इस पेड़ को वन धरोहर की दर्जा दिलवाने की मुहिम मे विभाग के आला अधिकारी लगे है.वाकई मे ऐसे पेड़ अपने आप मे अनोखा है और इसे कुदरत का करिश्मा कहा जाये तो गलत नही नही है.


