*आज का सुविचार*
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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..01-10-2020*..🎋
✍🏻बीत जाती है जिंदगी ये ढूंढ़ने में कि ढूंढ़ना क्या है,
जबकि मालूम नही ये भी,कि जो मिला है, उसका करना क्या है।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *Omshanti*🌷
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻जब हम अपनी चिंता को आस्था में परिवर्तित कर देते हैं, तब ईश्वर हमारे संघर्ष को आशिर्वाद में परिवर्तित कर देता है।
🌹 *ओमशान्ति*🌹
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*ENJOY BENEFITS OF*
*8 POWERS IN LIFE*
☝🏾 *अष्ठ शक्तिया..*💥
*1 सहन शक्ति::* सहन शक्ति द्दारा पारिवारिक सम्बन्धो की कडवाहट दूर होती है जिससे सम्बन्धो स्नेहमय और मीठे मधूर बनते है |
*2 समाने की शक्ति::* परिवारिक जीवन मै मान—अपमान,निंदा— स्तुति समा लेने से सम्बन्धो मे मिठास आ जाती हैं |
*3 परख ने की शक्ति::* गृहस्थ जीवन मे परख शक्ति से व्यवहार मे कुशलता प्राप्त होती हैं |
*4 निर्णय शक्ति::* व्यवहारीक और व्यवसाहिक क्षेत्र समस्याओ के समय योग्य निर्णय होता हैं, जिससे टेन्शन मुक्त बन जाते हैं |
*5 सामना करने की शक्ति::* शारीरिक,प्राकृतिक समस्याओ का सामना कर दु:खो का निवारण कर शक्ते हैं, एवं चिंता मुक्त हो शकते हैं |
*6 सहयोग की शक्ति::* योग से परमात्म शक्ति प्राप्त होती है कीसी अन्य को सहयोगी बन सहयोग ले शकते है, जिससे पहाड जैसा कोई कार्य या समस्या सहज ही पार कर शकते हैं |
*7 संकोचने की शक्ति::* मन के सारे संकल्पो को मन मे संकोचे जा शकते है, जिससे कर्म कौशल्य प्राप्त होते हैं |
*8 समेटने की शक्ति::* गुणग्राहक बन जाने से पुरानि बाते/ संस्कार सहज ही भूलने की क्षमता प्राप्त होती हैं, जिससे मनकी स्थिरता प्राप्त होती है
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*ॐ शांति*
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*👁️ दर्शन_ और_ देखने_में_अंतर 👁️*
*हम तीर्थ यात्रा पर जाते है किसलिए .❓*
*भव्य मंदिर और मूर्तियों को देखने के लिए या दर्शन के लिए..❗*
*देखने और दर्शन करने में क्या अंतर है ❓*
*देखने का मतलब है, सामान्य देखना जो हम दिनभर कुछ ना कुछ देखते रहते है ।*
*किन्तु दर्शन का अर्थ होता है-*
*जो हम देख रहे है उसके पीछे छुपे तथ्य और सत्य को जानना ।*
*देखने से मनोरंजन हो सकता है, परिवर्तन नहीं ।*
*किन्तु दर्शन से मनोरंजन हो ना हो, परिवर्तन अवश्यम्भावी है ।*
अधिकांश लोग मंदिरों में केवल देखने तक ही सीमित रहते है, दर्शन को नहीं समझ पाते । फलतः उन्हें वह लाभ नहीं मिल पाता जिसका महात्म ग्रंथो में मिलता है । हमारे शास्त्रों में तीर्थयात्रा के बहुत से लाभ बताये गये है उसका मतलब *ईश्वर को जानने से है.!*
किन्तु कुछ लोग तीर्थ यात्रा का मतलब केवल जगह – जगह भ्रमण करना और मंदिर और मूर्तियों को देखना ही समझते है ।
*यह मनोरंजन है, दर्शन नहीं ।*
इसलिए कहा गया है कि... *चारों तरफ लगाये फेरें फिर भी हर दम दूर रहे.!* क्योंकि हम शरीर से तो तीर्थयात्रा करते हैं, भ्रमण करते हैं आंखों से तो मुर्ति को देख रहे होते हैं... लेकिन...
*दर्शन के लिए चाहिए मन की आंखें... मन की आंखों से उस पार-ब्रह्म परमेश्वर का हम दर्शन कर सकते हैं... फिर हम दूनिया के किसी भी कोने में क्यों न हो.!*
*दर्शन क्या है .?*
*"दर्शन वह है जो हमारे जीवन को बदलने की प्रेरणा दे ।*
*दर्शन वह है जो हमारे जीवन का कायाकल्प कर दे ।*
*दर्शन वह है जो हमारे जीवन में आमूल – चूल परिवर्तन कर दे ।"*
*अंगरेजी में दर्शन का मतलब होता है –*
*फिलोसोफी, जिसका अर्थ होता है – यथार्थ की परख का दृष्टिकोण ।*
इसी के लिए हमारे वैदिक साहित्य में षड्दर्शन की रचना की गई । जिनमे जीवन के सभी आवश्यक और यथार्थ तत्वों की व्याख्या की गई है ।
*अब जीवन के व्यावहारिक दृष्टान्तों से दर्शन को समझने की कोशिश करते है.।*
रामकृष्ण परमहंस की दक्षिणेश्वर की काली को उनसे पहले और उनके बाद हजारों लोगों ने देखा किन्तु किसी को दर्शन नहीं हुआ ।
क्यों.?.?
क्योंकि, रामकृष्ण परमहंस ने, ना केवल काली की मूर्ति को देखा बल्कि उसके दर्शन को समझा इसलिए काली ने रामकृष्ण परमहंस को दर्शन दिये ।
श्री राम जी के मंदिर जाकर उनकी मूर्ति के दर्शन करने का मतलब है, उनके जीवन चरित को समझा जाये और उसी के अनुसार अपने जीवन में परिवर्तन किया जाये । यही श्रीराम का दर्शन है ।
*यदि हम श्रीराम की मूर्ति तो देखते है किन्तु अपने जीवन में कोई परिवर्तन नहीं करते है तो फिर हमें श्रीराम के दर्शन का कोई लाभ नहीं मिलने वाला ।*
*यदि हम पाप-कटेश्वर शिवजी का दर्शन करने जाते है और हमारे मन में क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष ही भरा है, और विकर्म , पाप करते ही रहते हैं... तो फिर दर्शन का क्या लाभ .?.?*
*फिर हमारे पाप कैसे कटेंगे.?.?*
यदि हम हनुमानजी का दर्शन करने जाते है और हमारा मन पवित्र नहीं है, स्त्रियों पर भी गलत दृष्टि जाती रहती है, तो फिर हनुमानजी का दर्शन करना भी बेकार ही हो जायेगा.।
ईश्वर का दर्शन वह है... जो हमारे जीवन को परिवर्तन कर दे.. तो ऐसा सच्चा दर्शन मन की आंखों से ही संभव है... जो अंधा मनुष्य भी कर सकता है.!
*तो आइये, ऐसे ईश्वर का मन से दर्शन और जीवन में सुख-शान्ति का अनुभव करने के लिए राजयोग मेडिटेशन किजिए..!*
राजयोग मेडिटेशन
ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय
विश्व विद्यालय में
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इसका सभी अवश्य लाभ ले...धन्यवाद.!
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