* चिकित्सा और विधि व्यवसाय के बीच होगा मरवाही में रोमांचक मुकाबला*
कांग्रेस और भाजपा ने मरवाही के उपचुनाव में डाॅ. के के धु्रव और डाॅ. गंभीर सिंह को अपना-अपना प्रत्याशी बनाया
अजीत सिंह,बिलासपुर
कांग्रेस और भाजपा ने मरवाही के उपचुनाव में डाॅ. के के धु्रव और डाॅ. गंभीर सिंह को अपना-अपना प्रत्याशी बनाया है। यदि कोई अनहोनी नहीं हुई तो जेसीसीजे से अधिवक्ता अमित जोगी प्रत्याशी होंगे। इसका यही अर्थ है कि दो डाॅक्टर मिलकर एक अधिवक्ता के खिलाफ चुनाव मैदान में होंगे। कुछ लोग ईशारों में यह भी कह रहे है कि एक अधिवक्ता और डाॅक्टर मिलकर दुसरे डाॅक्टर को निपटा देंगे। 9 तारीख से मरवाही में नामांकन पत्र बिक तो रहा है किन्तु अभी तक जमा होने का सिलसिला शुरू नहीं हुआ है। निर्वाचन आयोग के नए दिशा निर्देशोें के बाद नामाकंन पत्रों में शक्ति प्रदर्शन जैसी कोई प्रतिस्पर्धा नही होने वाली। जेसीसीजे का नामांकन पत्र जमा होने के पहले कानूनी दावंपेच उच्च न्यायलय और उच्चतम न्यायलय तक पहुंच गए है। अमित जोगी की पत्नी ऋचा जोगी ने हालहीं में मुंगेली जिले से जो एसटी प्रमाणपत्र हासिल किया उसकी वैधता पर आज ही निर्णय होना है और वे निर्णय पूर्व ही उच्च न्यायलय में रिटपिटिशन दाखिल कर चुकी है। पिटिशन के पूर्व ही जोगी परिवार के परम्परागत शिकायत कर्ता संतकुमार नेताम ने कैविएट दाखिल की है। साथ ही अमित जोगी ने एक रिटपिटिशन उच्चतम न्यायलय में लगाई है। असल में अमित और ऋचा जोगी न्यायालयों के माध्यम से आम जनता के बीच लगातार सहानुभुति का पात्र बन रहे है। मरवाही क्षेत्र की महिला मतदाताओं के बीच जो कि पुरूष मतदाता से ज्यादा है। यह संदेश जा रहा है कि सरकार जोगी परिवार की बहुु को चुनाव लड़ने से किस तरह रोक रही है वहीं अमित जोगी महिलाओं से सर पर आंचल रखवाकर अपना अभिभाक्तव सिद्ध कर रहे है। उनका कहना है कि पिता अजीत जोगी के गुजर जाने के बाद वे अनाथ नही हुए है बल्कि क्षेत्र के असंख्य नागरिक उनके गारजियन है। दुसरी ओर भाजपा के प्रत्याशी अपने चिकित्सा व्यवसाय के कारण जो समाज सेवा किए है उसे आधार बनाते है, और यही नीति कांग्रेस के के धु्रव की है। डाॅ. धु्रव 12 तारीख तक सरकारी डाॅक्टर थे। कोविड-19 के संकट पूर्ण समय में वे इस्तिफा देकर चुनाव लड़ने जा रहे है। इसे जनता नाकारात्मक तरीके से भी ले सकती है। नामांकन के पूर्व जोगी परिवार को एक लड़ाई कोर्ट में जितनी होगी। जिस पर उन लोगों की भी नजरें है जिन्हें मरवाही में मत नही देना है।
