*कबाड़ में नगद भुगतान का बड़ा खेल, पुलिस को माल से मतलब संख्या पता नही*
कोलवाशरी से लेकर डिपो तक पर हो रहा अवैध धंधे का प्रसार
कबाड़ में नगद भुगतान का बड़ा खेल, पुलिस को माल से मतलब संख्या पता नही
अजीत सिंह,बिलासपुर
कोयले के वैध-अवैध कोलडिपो से हर महिने पैसा उठाने का आरोप झेलने वाली पुलिस को यह पता ही नही कि उसके क्षेत्र में कितने कोल डिपो काम कर रहे है। हिर्री पुलिस कभी कभी कोलडिपो में कार्यवाही भी करती है। किन्तु उन्हें यह नही पता कि क्षेत्र में कितने वैध कोलडिपो काम कर रहे है। उनका कहना है कि कोल डिपो की जानकारी रखना खनिज विभाग का काम है। जब कभी भी पुलिस ने कोल डिपो पर कार्यवाही की खनिज कार्यालय को सुचना भी नही दी। इससे ज्यादा गंभीर मामला कोलवाशरी से कबाड़ बिक्री का है। जिले में जितनी भी कोलवाशरी कार्यरत है उन सब से कबाड़ बेचा जाता है। कबाड़ियों से कबाड़ का पुरा दाम नगद लिया जाता है और बदले में उन्हें एक ऐसा कागज दिया जाता है जिससे यह पता चलता है कि ट्रक पर लदा हुआ माल कोलवाशरी का ही है, और उसके एक निश्चित स्थान पर उतारा जाना है। जबकि वास्तविक्ता इससे हट कर होती। ट्रक पर लदा हुआ माल कबाड़ होता है और कबाड़ी में लदे हुए माल की पुरी कीमत कोल वाशरी को अदा की होती है। कई बार तो रास्ते में पुलिस ऐसी कबाड़ गाड़ियों से भरपुर माल भी वसूलती है। वसूली में वे थाने आगे है जिनके क्षेत्र में कोलवाशरी है। एक ट्रक कबाड़ के पीछे 6 से 7 लाख का खेल होता है। पुरा काम बिना बिल के होता है। अभी हाल ही में फिल कोल पर जिएसटी का जो छापा पड़ा है उसमें कई लाख रुपये की टैक्स चोरी का मामला इसी तरह का है। कोलवाशरी से कबाड़ लेने वाले कबाड़ी दुर्ग भिलाई क्षेत्र के है। जो लगातार बिलासपुुर की कोलडिपो और कोलवाशरी से कबाड़ उठाते है। बाहरी कबाड़ियों द्वारा जिले में लगातार घुसपैठ से स्थानीय कबाड़ी बेहद नाराज बताए जाते है। कबाडियों के भी इंतजामअली है। जो थाना दर थाना सैंटिंग कराते है। उन्हें भी इस नाराजगी का पता है और बाहरी कबाड़ियों की घुसपैठ से वे भी परेशान है।
