*ऑनलाइन सत्संग परिचर्चा का आयोजन*
छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में स्थित श्री पाटेश्वर धाम के द्वारा संतवाणी चरितार्थ की जा रही है कहा गया है
आग लगी आकाश में झर झर गिरे अंगार
संत ना होते इस जग में तो जल मरता संसार
कोरोना काल जहां संपूर्ण सृष्टि को संतप्त कर रहा है ऐसे समय में पाटेश्वर धाम के संत राम बालक दास जी एवं उनके साधकों के द्वारा लगातार छह महीने से प्रतिदिन सुबह 10:00 से 11:00 बजे एवं दोपहर 1:00 से 2:00 ऑनलाइन सत्संग परिचर्चा का आयोजन सीता रसोई व्हाट्सएप ग्रुप एवं अन्य ग्रुपों में किया जाता है आज भी सत्संग परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसमें सभी भक्त जिज्ञासु एवम माताएं जुड़े
सभी ने अपनी जिज्ञासाए बाबा जी के सामने रखी एवं बहुत ही सुंदर और अपने प्रभावी ओजस्वी बातों के द्वारा सभी के जिज्ञासाओं को पूज्य बाबा जी ने शांत किया
आज रामफल जी बकेला धाम ने पंचकन्या का उल्लेख करते हुए उनकी महिमा और प्राकट्य के बारे में जिज्ञासा रखी इस विषय को स्पष्ट करते हुए बाबाजी ने बताया कि पंच कन्याओं में मंदोदरी अहिल्या तारा कुंती और द्रौपदी इन पांचों का नाम हमारे वेदों के अनुसार आता है पांचों सदा कुमारी हैं और अमर हैं इनका जन्म भी नहीं हुआ यह अयोनिजा और विभिन्न संसार के हित कारक कार्यों के लिए इनका अवतार हुआ इसीलिए यह पूज्य हैं और इनका दर्शन इनके नाम का स्मरण कुमारी कन्याओं के लिए जहां मन इच्छित वर प्राप्ति के लिए वही सुहागन माताओं के लिए अखंड सौभाग्य के लिए शुभ माना गया है साथ ही बाबा जी ने बताया कि पाटेश्वर धाम के नवनिर्मित मां कौशल्या जन्मभूमि मंदिर में इन 5 कन्याओं की मूर्ति भी प्रतिष्ठापित की जाएगी ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी ऐसे महान नारियों के दर्शन कर उनके चरित्र का अनुसरण कर सकें
रिचा बहना घोठिया ने भी प्रतिदिन की भांति आज आध्यात्मिक प्रश्न बाबाजी से रखें आज के प्रश्न में रिचा बहन ने विषय रखा की जिसका सिमरन किया जाए उसका स्वरूप ही सामने आता है अब आपको तय करना है कि संसार में संसार का ही स्मरण करते जीवन बिताएं या परमात्मा का सिमरन करें इस विषय पर प्रकाश डालते हुए बाबा जी ने कहा कि गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने भी कहा है जो मुझे जिस रूप में भजेगा मैं उसे उसी रूप में प्राप्त होउगा अतः हमें संसार में रहकर भी उस दिव्य परमात्मा का स्वरूप कभी नहीं भूलना चाहिए।
