*जीवन में सुरक्षित रहना है तो नमृता की पोशाक पहनले---ब्रह्मा कुमार नारायण भाई*
जीवन में सुरक्षित रहना है तो नमृता की पोशाक पहनले---ब्रह्मा कुमार नारायण भाई
अलीराजपुर
जीवन का असली मकसद लड़ाइयां लड़ना नहीं बल्कि उनसे बचना है नम्रता एक ऐसा सुरक्षा कवच है जिसे पहन कर हर नाजुक और मुश्किल परिस्थिति में अपना बचाव किया जा सकता है।
आज से हम परमात्म स्नेह की शक्ति से अपने अंदर नम्रता का गुण धारण करेंगे और अपने लिए एक सुरक्षा कवच तैयार करेंगे।
कहते हैं कि:-अभिमान की ताकत फरिश्तों को भी शैतान बना देती है।
नम्रता साधारण व्यक्ति को भी फरिश्ता बना देती है। यह विचार इंदौर से पधारे जीवन जीने की कला के प्रणेता ब्रहमा कुमार नारायण भाई ने दीपा की चौकी में स्तिथ ब्रह्मा कुमारी सभागृह में वर्तमान जीवन को बचाने के लिए क्रोध को त्याग, नमृता की पोशाक पहने इस विषय पर नगरवासियों को संबोधित करते हुए बताया कि क्रोध क्या है और इसे कैसे दूर भगाए?
क्रोध को क्रोध से शांत नही किया जाता, बल्कि उसे और बढ़ाया जाता है जिसके परिणाम एक दूसरे के खून के प्यासे तक बन जाते हैं कुछ लोग। सिंपल सी बात है क्रोध एक आग समान है और आग में पेट्रोल,डीजल,केरोसिन और घी डालोगे तो ,वह और ही बढ़ता है घटता नही।
जब हम क्रोधी के साथ क्रोधी व्यवहार कर रहे हैं तो हम आग को बहुत तीव्र वेग से और तेज कर रहे होते हैं जो हमे पता नही होता। और उस समय यदि उसका सामना करते हैं या सफाई देते हैं या उनके सामने ही खड़े रहते या उस समय हम और ही हँसते है ऐसे बहुत सी बातें सामने वाले के क्रोध को और बढ़ाती है।
क्रोध के समय हम उसके सामने शांत खड़े रहे यहाँ तक ही सीमित नही है बल्कि हमे उस स्थान से थोड़ा दूर हो जाना चाहिये लोगो की नजर में यह कायरता होती लेकिन वास्तविक में ये बहुत बड़ी बुद्धि मानी है इस प्रकार हम क्रोधी को शांत होने का एक अवसर दे देते हैं इससे फिर से कुछ दिन बाद हम रिश्तो की बीच के दरार को खत्म होते देखते हैं तो इस हिसाब से बुद्धिमानी हुआ न।
कइयों का प्रश्न होता है कि हमे क्रोध बहुत आता है
पहले क्रोध को समझना जरूरी है कि कहा पर आता है तो वो कायरता है और कहा पर आता है तो बुद्धिमानी है। जब हम अपने से कमजोर लोग और उसकी बुराई को देखकर उस व्यक्ति पर क्रोध करते हैं तो समझ जाएं कि आप कायर हो।क्योकि कमजोर को दया किया जाता उन्हें प्यार से समझाया जाता है। लेकिन अपने अंदर की बुराई और दूसरों के अंदर की बुराइयों के प्रति क्रोध करना उस व्यक्ति पर नही उसकी बुराइयों पर और उसे हटाने के लिये कोई ऐसे योजना बनाये जो हम भी बदल जाये और वो भी बदल जाये यह है। बुद्धिमानी का क्रोध जिस क्रोध को करने से बिगड़ता हुआ काम और सम्बन्ध सदा के लिये अच्छा बन जाये वो बुद्धि मानी वाला क्रोध है और जिस क्रोध से सुधरा हुआ सम्बन्ध और काम बिगड़ जाए वो कायरता वाला क्रोध है।

