*आज का सुविचार*
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💠 *आज का सुविचार*💠
🎋 *..21-10-2020*..🎋
✍🏻किसी-भी आदमी की सहनशीलता एक खिचे हुए रबड की तरह होती है, एक सीमा से ज्यादा खीच जाने पर उसका टूटना तय है।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *σм ѕнαитι*🌷
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻प्रेम से भरी हुईं आँखें, श्रद्धा से झुका हुआ सर, सहयोग करते हुऐ हाथ, सन्मार्ग पर चलते हुए पाँव और सत्य से जुडी हुई जीभ, ईश्वर को बहुत पसंद है।
🌹 *ओमशान्ति*🌹
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✤ *अमर प्रेम - Immortal LOVE* ✤
✦ शायद आपने गहराई से ना सोचा हो मगर अध्यात्म की सारी खोज जो परमात्मा से शुरू होती है, वो प्रेम पर जाकर ख़त्म होती है। फिर वो क्राइस्ट हो, बुद्ध हो, महाबीर हो।
✦ अंत में विचारणीय बात ये है कि इन सबने परमात्मा के नहीं अपने अपने धर्म ईजाद किये। अगर सच में ही जिसने भी आकर परमात्मा का धर्म स्थापित किया होता तो उस पहले धर्म के बाद कोई और धर्म बन ही नहीं पाता
बात वहीँ ख़त्म हो जाती। और इसीलिए अंततः सबने प्रेम से मिल कर रहने की बात की।
✦ प्रेम वो बंधन है जो जीवन मुक्ति दिलाता है। एक न दिखने वाली डोर से सारा चराचर जगत आपस में बंधा हुआ है। वो डोर है प्रेम की।
✦ प्रेम की भाषा सभी प्राणी मात्र, जीव जंतु, पेड़ पौधे, चाँद तारे और नक्षत्र तक समझते है। क्यूं कि प्रेम ही वो रोशनी है जिससे परमात्मा ने इस जगत की रचना की है।
✦ आत्मा प्रकाश है, परमात्मा प्रकाश है। ये प्रकाश प्रेम ही है। इसीलिए दुनिया में कोई ऐसा नहीं जिसके प्राणों को प्रेम की प्यास न हो।
✦ क्यूं दुनिया का हर प्यार करने वाला सिर्फ़ प्यार में खोया रहना चाहता है। फिर वो प्रेमी आत्मा का हो या परमात्मा का। सबको सच्चे प्रेम की तलाश रहती है। फिर भी सबकी सच्चे प्रेम की तलाश पूरी नहीं होती। क्यूं?
✦ जीसस के लाख समझाने पर भी उसका धर्म कई शाखाओं में बंट गया,यही हर धर्म के साथ हुआ। क्यों की जब उन्होंने प्रेम को ढूंढा तो उन्होंने वो प्रेम एकांत में रह कर अपने अंदर ढूंढा।
✦ हम वो प्रेम बाहर ढूंढते हैं। ये फर्क़ है। जिस प्रेम को हमने बाहर से पाया है उसका सम्बन्ध शरीर के आकर्षण से है इसीलिए शरीर छूटते ही साथी भी छूट जाते हैं। कोई कितना ही जनम जनम के बंधन की बात करे।
✦ सिर्फ़ एक से ये बंधन हो नहीं सकता क्यों की सारा जीवन हमारे प्रेम की शक्ति साथ में दूसरे दूसरे रिश्तों में बंटती चली जाती है। इसीलिए अक्सर ऐसा होता है जिसके लिए आज जान देने को तैयार थे कल उसी की जान भी लेने को तैयार हो जाते हैं।
✦ कर्मों की गति बहुत गहरी है। ऐसा भी नहीं कि soul mate नहीं होते। मगर उसकी परिभाषा समझना भी ज़रूरी है।
✦ Soul mate वाले प्रेम का अर्थ है,जब कोई निस्वार्थ भाव से प्रेम करे। अब वो प्रेम माँ का, पिता का, दोस्त का, संबंधी का, यहाँ तक किसी स्कूल के अध्यापक, गुरु या ऐसे सोशल वर्कर का भी हो सकता है, जिससे आप हद से ज़्यादा प्रभावित हों।
✦ अगर प्रेमी-प्रेमिका भी अगले जन्म में मिलते हैं तो ये तभी संभव होता है, जब उनके कार्मिक अकाउंट पहले दूसरे लोगों से पूरे हो गए हों। इसीलिए आप राधा और कृष्ण के प्रेम को ही ले लें। उनकी पत्नी भी दूसरे को दर्शाया है।
✦ अगर सच में ही सच्चा प्यार हर जन्म में पाना है तो ये बिलकुल सही वक़्त है। क्यों की आपकी हर जन्म की कहानी आप ख़ुद लिखते हैं। परमात्मा तो सिर्फ़ निर्देशक हैं। प्रेम का अमृत जिस बर्तन में इकठ्ठा होता है, वो है पवित्रता। पवित्रता ही हर जन्म सुख शांति और आनंद प्रदान करती है।
✦ परमात्मा भी आत्मा ही हैं,उन्हें परमात्मा का दर्ज़ा इसीलिए प्राप्त है, क्यूं की वो ever pure यानि सदा पवित्र हैं। दुनिया में हर कोई विकार से जन्म लेता है इसलिए सिवाय परमात्मा के कोई हमें फिर से पवित्र नहीं बना सकता।
✦ हमारा परमात्मा से जो प्रेम है वो हमारी पवित्रता के अनुरूप घटता बढ़ता रहता है। मगर परमात्मा का प्रेम हमारे लिए हमेशा एक सा रहता है। इसीलिए अगर सच्चा प्रेम पाना है तो उसे पहले अपने अंदर भरना भी पड़ेगा।
✦ सच्चा प्रेम बाँटेंगे तो सच्चा प्रेम लौट कर आएगा। तो सच्चे प्रेम की तलाश बाहर करने की बजाय उसे परमात्मा से connect हो कर भीतर भरना शुरू कीजिए।
✦ एक बार परमात्म प्रेम की बगिया में मन का फूल खिलने शुरू होगा तो आपसे सच्चे प्रेम की सुगंध आपके लिए निम्मित सच्चे प्रेम को जन्म जन्म आपसे मिलवा ही देगी।
✦ फिलहाल तो इस रंग बदलती दुनिया में परमात्मा ही हमारा सच्चा माशूक़ है और परमात्मा का प्रेम हमारे लिए अमर प्रेम है।
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