आज का चिंतन(सुविचार)
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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..28-11-2020*..🎋
✍🏻केवल रक्त सम्बंध से ही कोई अपना नही होता प्रेम, सहयोग, विश्वास, निष्ठा सुरक्षा, सहानुभूति और सम्मान ये सभी ऐसे भाव है जो परायो को भी अपना बनाते हैं।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *σм ѕнαитι*🌷
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻कभी जीने की आशा, कभी मन की निराशा, कभी खुशियों की धूप, कभी हकीकत की छांव, कुछ खोकर कुछ पाने की आशा, शायद यही है जीवन की परिभाषा।
🌹 *σм ѕнαитι.*🌹
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🙏 *ॐ शांति* 🙏
लोग कहते हैं... झूठे संसार में *झूठा* बनना पड़ता है अन्यथा लोग आपको *मूर्ख* समझने लगते हैं... गलत! जिसके संकल्प *शुद्ध* हैं उसकी बुद्धि *तीक्ष्ण* होती है, जिससे उसके निर्णय, बोल व कर्म श्रेष्ठ होते हैं, जो दूसरों के लिये *प्रेरणास्रोत* बन जाते हैं। इसलिये जितनी *पवित्रता* उतनी रायल्टी...
🌸 सुप्रभात...
💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
*जिसे जीना आता है वह बिना किसी सुविधा के भी👩🏻😊👦🏻खुश मिलेगा।*
*जिसे जीना❌ नहीं आता वह सभी सुविधाओं🍱👔👗🏠🏬🛵🚲🛺🚘 के होते हुए भी🤦🏻♀️🤦🏻♂️ दुखी मिलेगा....*
*जिंदगी म्यूजिक प्लेयर नहीं है जिसमें आप अपनी पसंद के गीत सुन सकें।*
*जिंदगी एक📻 रेडियो है उसमें जो भी🚶🏻♀️😷🚶🏻♂️ आ🧑🏻⚕️👨🏻🎨👨🏻✈️👩💻💻📱 रहा 🤦🏻♀️🤦🏻♂️💃🏻🕺🏻है उसी से मनोरंजन करें।*
आंतरिक बल 853
-कर्म और आक्सीजन ( 3)
-आक्सीजन वह मूल तत्व हैं जिस से प्रत्येक प्राणी जीवित है !
-जल, पृथ्वी, वायु, अग्नि, आकाश का निर्माण आक्सीजन से ही हुअा हैं ।
-प्रणायाम से आक्सीजन जितनी सूक्ष्म होती जाती हैं, उतना ही शक्तिशाली हो जाती है ।
-आक्सीजन का प्रभाव शरीर, मन और बुद्वि तीनो पर पड़ता है ।
-आक्सीजन का मन से घनिष्ट संबंध होता है ।
-जरा भी मन में व्याकुलता हो, क्रोध हो, भय हो, आलस्य हो, ईर्ष्या हो, उस समय आक्सीजन कम हो जाती है । मन में कोई भी विकार आते ही भगवान क़ी याद के साथ लम्बे लम्बे और धीरे सांस भी लिया करो ।
-जब कोई भी परेशानी आये उस समय सांस रोक कर भगवान को याद करो । नकारात्मक तरंग उसी समय रुक जाएगी । आक्सीजन न मिलने से मन नकारात्मक विचार छोड़ देता है ।
-हम अपने घर का ताप संतुलित करने लिये ए. सी., हीटर, ब्लोअर का उपयोग करते हैं ।
-शरीर और मन का ताप नियंत्रित करने के लिये सांस का प्रयोग करते हैं ।
-जब ठंडक क़ी जरूरत होती है तॊ हम बाए नाक से सांस लेते हैं ।
-जब गर्मी क़ी जरूरत होती तॊ हम दाय नाक से सांस लेने लगते हैं ।
-ये दोनो कार्य बारी बारी से हमारा दिमाग अपने आप करता रहता है ।
-सांस लेते समय अधिक से अधिक आक्सीजन अंदर खींचनी चाहिए ।
-इसके लिये सांस छोड़ते समय अधिक जे अधिक वायु बाहर निकाले - तब अपने आप हम सांस लेते समय अधिक हवा अंदर खींचेंगे ।
-शरीर में जहां रोग है वहां शरीर से बाहर एक इंच ऊचाई पर या उसकी सीध में जो पीठ में स्थित रीढ़ क़ी हड्डी के मनके पर भगवान के विदू रूप को देखें ।
- ऐसे भगवान को देखते हुए कहते रहें आप शांति के सागर है और सांस को अधिक से अधिक बाहर निकाले और फिर धीरे धीरे सांस अंदर खींचे ।
-ऐसे करने से शरीर के रोगी हिस्से को भरपूर आक्सीजन और भगवान क़ी शक्ति मिलेगी जिस से आप जल्दी ही ठीक हो जाएंगे ।
- ऐसा अभ्यास धीरे धीरे करते हुए हर दिन बढ़ाते रहें । कम से कम 100 बार हर रोज करना है । परन्तु इस पर शोध क़ी जरूरत है ।
-आप ने झाड़ फूंक करने वालो को देखा होगा वह किसी व्यक्ति का उपचार करते समय कुछ मन्त्र पढ़ते हैं फिर पीड़ित स्थान पर फूंक मारते हैं !
-आप भी दूसरों का उपचार करने के लिये उनके पीड़ित स्थान से एक इंच ऊपर भगवान का बिंदू रूप देखें या अपने इष्ट को देखें और भगवान के गुन गाये आप शांति के सागर हैं । ऐसा करते हुए अपना सांस ज़्यादा से ज़्यादा बाहर निकाले और उसके पीड़ित अंग पर छोड़े । फिर सांस ले लेवे और दुबारा सांस उसके पीड़ित भाग पर गिरता हुअा देखें ।
-यह अभ्यास धीरे धीरे लम्बे लम्बे सांस लेते हुए भी अपने और दूसरे के लिये कर सकते हैं ।
-इस से संबंधित शरीर के हिस्से को ऑक्सिजन और भगवान क़ी शक्ति ठीक कर देंगी ।
- यह पुस्तक आप को पसंद आएगी ! पसंद आने पर अपनी मर्जी से आर्थिक सहयोग भेजना और अगर आप को आर्थिक चैलेंज है तो अपने लिए गिफ्ट समझना ! चाहे आप कितने भी व्यस्त हैं, विश्व का कल्याण कर रहे हैं या अंश मात्र भी तन, मन, धन और संबंधों में अतृप्ति है, कृपया एक बार जरूर पढ़ें ! फिर भी आप की मर्जी है ! आप के पढ़ने मात्र से, आप को , आप के आस पास वालों को , आप के प्रिय लोगों और सारे विश्व को लाभ मिलेगा !






