ललित सुरजन जी मानवीय संवेदनाओं से भरे,एक ऐसे मृदुभाषी स्वभाव के व्यक्ति रहे--ब्रह्मदत्त शर्मा - fastnewsharpal.com
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ललित सुरजन जी मानवीय संवेदनाओं से भरे,एक ऐसे मृदुभाषी स्वभाव के व्यक्ति रहे--ब्रह्मदत्त शर्मा

 ललित सुरजन जी मानवीय संवेदनाओं से भरे,एक ऐसे मृदुभाषी स्वभाव के व्यक्ति रहे--ब्रह्मदत्त शर्मा



गोबरा नवापारा नगर

ललित सुरजन जी मानवीय संवेदनाओं से भरे,एक ऐसे मृदुभाषी स्वभाव के व्यक्ति थे,जिनके सम्पर्क में कोई एक बार भी आया तो वह उनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रहता था, ओज और ऊर्जा से भरा दैदीप्यमान उनका सुदर्शन व्यक्तित्व हम सबके आकर्षण का केन्द्र था, यह कहना है साहित्यिक सामाजिक सरोकारों से जुड़े ब्रह्मदत्त शर्मा का, उनको अपने श्रद्धा सुमन समर्पित करते हुए उन्होंने बताया कि सुरजन जी के साथ इस अंचल के लोगों की ढेर सारी यादें जुड़ी हुई है,सन्1982 मे जब वे राजीव लोचन महाविद्यालय मे 31जुलाई को स्वर्गीय मुंशी प्रेमचंद जी की पुण्यतिथि पर व्याख्यान देने आए थे , तो मै उनकी वक्तृत्व कला से बहुत प्रभावित हुआ था, फकाफक सफेद कुर्ता पैजामा पहने हुए वे डॉक्टर धर्मवीर भारती के उपन्यास के नायक चन्दर की तरह से लग रहे थे, मैने अपने विद्यार्थी जीवन में बाद के दिनों में उनके"देशबन्धु"मे काम भी किया और तभी यह जाना कि वे सर्वहारा वर्ग के परम हितैषी थे, उनका यह गुण उनको आम लोगों से ऊपर एक महामानव बना देता था, हमारे अंचल के संत-कवि श्री कृष्णा रंजन जी के सार्वजनिक अभिनन्दन समारोह मे हमनें उन्हें आमंत्रित भी किया था पर अपनी व्यस्तताओं के चलते वे नहीं आ पाए, परम वैष्णव सुरजन जी को अन्तिम विदाई देते हुए मैं यही कहूँगा कि वे हमारे जैसे हजारों लोगों के प्रेरणा स्त्रोत थे, देशबन्धु से पिछले 30वर्षों से जुड़े पत्रकार रमेश चौधरी ने कहा कि ललित सुरजन जी उदारवादी प्रगतिशील सोच रखते थे, 20 साल पहले फिंगेश्वर में पत्रकारों के लिए एक कार्यशाला आयोजित हुई थी, जिसमें उन्होंने सभी समाचार पत्रों के संवाददाता ओं को पत्रकारिता के गुर बताए थे, वह सबक मुझे आज भी याद है, वे पक्के सिद्धान्तवादी व्यक्ति थे, सत्ता से समझौता न करते हुए आम जनता के हितों को सर्वोपरी रखना उनका स्वभाव था, आज के समय मे ऐसे लोग मिलना मुश्किल है.।

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