आज का चिंतन(सुविचार) - fastnewsharpal.com
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आज का चिंतन(सुविचार)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..04-12-2020*..🎋


✍🏻कश्तिया उन्ही की डूबती है, जिनके ईमान डगमगाते हैं, जिनके दिल में नेकी होती है, उनके आगे मंजिले भी सर झुकाती है।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷


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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻हमारी खुशी हमारी सोच पर निर्भर करती है, जैसे की हम शिकायत कर सकते हैं कि गुलाब की झाड़ियों में कांटें हैं या फिर खुश हो सकते हैं कि, कांटों की झाड़ियों में गुलाब है।

🌹 *σм ѕнαитι.*🌹


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            *💜●◆OM SHANTI ◆●💜*


_★ महर्षि मनु के अनुसार धैर्य, धर्म का प्रथम वह महत्वपूर्ण लक्षण है । धैर्य का अर्थ है धीरता, सहिष्णुता, स्थिरता और सहनशीलता । मन की शांत स्थिति का नाम है धैर्य है । विषम एवं प्रतिकूल परिस्थितियों के उत्पन्न होने पर भी मन में चिंता, शोक, व्याकुलता, क्षोभ और चंचलता के लक्षण उत्पन्न ना होना धैर्य है । धैर्य से इन पर नियंत्रण किया जा सकता है ।_ 


_◆ धैर्य धारण करना एक तप है । कहावत भी है सहज पके सो मीठा होये । पृथ्वी को धरणी कहा जाता है । मां को भी धैर्य की प्रतिमा कहा गया है क्योंकि मां सहनशील होती है । धैर्य ही बुद्धि के विकास का सूचक है । धैर्य ही साहस व दृढ़ता का प्रतीक है । धैर्य व्यक्ति के विकास की प्रथम सीढ़ी है । धैर्य ही सही मार्ग चुनने का अवसर प्रदान करता है ।कहा गया है उतावला सो बावला ।_


_◆ जो व्यक्ति कल के प्रति आसक्त नहीं हैं वही पूर्ण धैर्यवान हो सकता है । बीज की उगने से लेकर फल तक की यात्रा बड़े धैर्य के साथ होती है इसीलिए कवि ने लिखा है :_


_◆ धीरे धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय । माली सींचे सौ घड़ा, रितु आए फल होय ।।_


_◆ सब्र का फल मीठा होता है पर आज के युग में हमारी अपेक्षाएं व महत्वाकांक्षाये  हमें धैर्य रखने नहीं देती । सारी दुनिया  भागमभाग हो रही है । जबकि सच्चाई यह है कि हम ताउम्र दौड़ नहीं सकते है केवल चल ही सकते हैं । धैर्य धारण करना ही जीवन की सफलता का सरल मार्ग है । अतः इस गुण को धारण करने के लिए हमें अधिक से अधिक समय ईश्वरीय सानिध्य में रहना होगा ।_


                  *🔮★ ओम शांति ★🔮*


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        *♻️⚜️कलियुग के नजारे ⚜️♻️*   


   _★ आज चारो तरफ दुख , आशांती ,तनाव औंर बीमारींया बढति जा रही है ।कोई भी सुखी दिखाई नहीं दे रहा हे ।पापाचार ,भ्राष्टाचार ,दुराचार ,अत्येचार की अति हो रही है । धर्मसत्ता , राज्यसत्ता के नाम पर झगडे ही झगडे दिखाई दे रहे है । लूटमारी ढोंगबाजी के साथ -साथ धर्म के नाम पर , समाज सेवा के नाम पर बड़ा व्यापार तीव्र गति से बढ़ता जा रहा है । संम्पर्दायवाद बहूत बड गया है ,लोग अपना नाम प्रसिध्द करने मे ही लगे हुये है । धर्म बेचने की बोली लग रही है ,मान ,शान , चादर के चक्कर मे हालते बिगड़ रही है । सभी तरफ स्वार्थ ही स्वार्थ है ।कोई आगे बढ़ रहा है तो उसे गिराने की सोच चल रही है ।_

 

_★ देना पडेगा कर्मों का हीसाब   एक तरफ ' जैसा कर्म वैसा फल 'बता रहे है तो दुसरी तरफ जादू -मंत्र -तंत्र -भविष्य -वास्तुशात्र मे आटके हुए है , औरों को डराकर कमाई कर रहे है । ठगी मे उस्त्ताद बने हुऐ है । मरने के बाद 'स्वर्ग पधारा ' कहते तो रोना किस बात का ? सभी नियमो ऊलंगन हो चुका है । ना मंदिर सुरक्षित , ना मंदिर की मूर्ति सुरक्षित ,चारों तरफ पहरा ही पहरा लगा हुआ है । व्यसन -फैशन बढ़ रहे है । पैसे कमाने के लिए देह का प्रदर्शन हो रहा है । घर -घर मे बंटवारे , खून ,झगडे ,कोर्ट - केस चल रहे है । भाई -भाई दुश्मन बन गये है ।जन्म देने वाले माँ -बाप को आश्रम का रास्ता दिखाया है और बड़ी -बड़ी तीर्थ यात्रायें कर ,बड़े -बड़े मंदिर बनाकर ,थोड़ा -सा दान -पुण्य कर स्वयं को धर्मात्मा कहाने की कोशिश कर रहे है । कर्मों का हीसाब -किताब तो उन्हे देना ही पड़ेगा ।_


 _★ क्या यहीं जीना है ? खान -पान की पवित्रता का पूरा सत्यानाश हो गया है ।घर की रोटी विष बन गई है ,बाहर का खाना अम्रूत बन गया है ।पेटी भरने के लिए रात -दिन भाग रहे है ईससे पेट की बीमारी बढ़ गई है । रात को सुख की , चैन की नींद नहीं ,  नींद की गोली लेनी पड़ रही है । धर्म के लिए फुर्सत नहीं ,क्या यह सुख है ? क्या यही जीना ? क्या यही आनंद , प्रेम ,शांति है ? साल में एक दिन धर्म का महोत्सव मनाकर , गंगा में डुबकी लगाकर ,तीर्थ यात्रा करके ,किया हुआ पाप मिटेगा क्या ?' अकेला आया अकेला जाना 'यह केवल लिखत रह गई है । दशहरे पर रावण को जलाने की कोशिश करते है लेकिन घर -घर में रावण अर्थात काम ,क्रोध , लोभ ,मोह ,अहंकार बढ़ते ही जा रहे है ।बड़ी -बड़ी समस्यायें आ रही है लेकिन जग्रुत होने का नाम नहीं ,कुम्भकर्ण की नींद में है ।_

                               

_★ सर्वश्रेष्ट है शिव परम पिता गोद रूपी शरण  ईस महाभयानक समय में गीता ज्ञानदता का दिया हुआ वचन ' यदा -यदा ही धर्मस्य...' याद करे । वह समय अभी चल रहा है । अपना दिया हुआ वायदा पूरा करने वे अब ईस धरती पर पधारे है । यह खुशखबरी सभी मनुष्य आत्माओं के लिए , सभी धर्म वालों के लिए है । भगवान किसी माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते ,वे तो स्वयंभू है ईसलिए उनका अवतार या अवतरण होता है और वह हुआ भी है । अब जल्दी ही महापरिवतन होने वाला है भगवान कोई देह धारी नहीं , वे तो निराकार जोतिबिंदु शिव परमात्मा है । वही सबके मालिक है । वही दुखहर्ता -सूखकर्ता , भोलानाथ है , सबको मुक्ती -जिवनमुक्ती देने वाले अमरनाथ है । परमपिता - परमात्मा का परिवर्तन का कार्य पूरे विश्व में बहूत तेजी से चल रहा है । सतयुग की स्थापना के लिए पूरे विश्व में उनोनें प्रजापिता ब्रह्माकुमारी_

 

_★ ईस्वरिय विश्व विद्यालय की शाखाओं की स्थापना की है जिनमे राजयोग द्वारा कौड़ी जेसा जन्म हीरे जेसा बनता है ।यह ताकत सिर्फ उस प्रभू में ही है उनकी शरण ही श्रेष्ट शरण है ,बाकी कोई उपाय बचा नहीं है । सारी बातों की वीस्त्रुत जानकारी और अपना भाग्य बनाने के लिए बिना मूल्य लेकिन बहुमूल्य भाव भरा आमंत्रण है की नजदीकी सेवाकेन्द्र से अवश्ये संपर्क करें ।_



                   *💡★ ॐ शांती ★💡*


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