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माहे रमजान शुरू,रोजा रखने से ईमान और होता है मजबूत

 माहे रमजान शुरू,रोजा रखने से ईमान और होता है मजबूत



जयलाल प्रजापति/नगरी

कोरोना संकट के बीच मुस्लिम भाईयों ने खुदा की रजा के लिए रोजा रखा। उनका कहना है कि अल्लाह तआला अपने बंदों की आजमाईश करता है। जो सच्चा बंदा होगा, उसके इम्तेहान में कामयाब होगा। उधर, माहे रमजान में विशेष नमाजे तरावीह भी अदा की जा रही है। 

इस्लाम में रमजान की अपनी एक अहमियत है। मुसलमान भाई इस पवित्र महीने में अल्लाह तआला की इबादत में मशरूफ रहते है। मंगलवार को चांद की तस्दीक होने के बाद शहर की जामा मस्जिद समेत विभिन्न मस्जिदों में विशेष नमाजे तरावीह अदा की गई। अंजुमन इस्लामियां कमेटी के अनुसार जामा मस्जिद में मुफ्ती मोहम्मद जुबैर ने नमाजे तरावीह अदा कराई। रात 3 बजे के बाद सेहरी की गई। उल्लेखनीय है कि इस साल भीषण गर्मी में रमजान का महीना शुरू हुआ है। करीब 16 घंटे तक भूखे-प्यासे रहकर मुस्लिम भाई रोजा रख रहे हैं। इसमें नन्हें-नन्हें बच्चे भी शामिल है। दस साल के बच्चे मोहम्मद नूर ने बताया कि अल्लाह की याद करते हुए मैंने रोजा रखा। भूख-प्यास जरूर लगी, लेकिन सब्र का दामन नहीं छोड़ा। 

रूह को मिलता है सुकून

रोजदार मोहम्मद अनीस, अख्तर रजा, गुलाम कादिर, अहमद कुरैशी, सिद्दीक सोलंकी ने कहा कि सच्ची नीयत से रोजा रखा जाए तो भूख और प्यास की शिद्दत महसूस नहीं होती। खुदा हर रोजादारों के साथ रहता है। रोजदार कामरान रजा, नजीर अहमद सिद़्दीकी ने बताया कि वे बचपन से ही रोजा रखते आ रहे हैं। इस फर्ज को अदा करने से उन्हें रूह को सुकून मिलता है। 

ईमान को करता है मजबूत रोजदार सैय्यद हसन अली, बब्बू भाई, अजमल भाई, मो. दिलावर रोकडिय़ा ने बताया कि हर बालिग मोमिन पर इस्लाम में रोजा फर्ज किया गया है। खुदा का शुक्र है कि उसने रोजा रखने की हमें तौफिक दी। रोजदार मोहम्मद आजम रिजवी, जमाल रिजवी, नजीर अहमद सिद्दीकी, मोहम्मद एजाज का कहना है कि रोजा ईमान को और मजबूत करता है। इस महीने में खुदा की राह में की गई इबादत कबूल होती है। 

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