ऑनलाइन सत्संग का आयोजन सीता रसोई संचालन व्हाट्सएप ग्रुप में 10:00 बजे पाटेश्वर धाम के संत श्री राम बालक दास जी के द्वारा - fastnewsharpal.com
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ऑनलाइन सत्संग का आयोजन सीता रसोई संचालन व्हाट्सएप ग्रुप में 10:00 बजे पाटेश्वर धाम के संत श्री राम बालक दास जी के द्वारा

ऑनलाइन सत्संग का आयोजन सीता रसोई संचालन व्हाट्सएप ग्रुप में 10:00 बजे पाटेश्वर धाम के संत श्री राम बालक दास जी के द्वारा 



प्रतिदिन की भांति ऑनलाइन सत्संग का आयोजन सीता रसोई संचालन व्हाट्सएप ग्रुप में 10:00 बजे पाटेश्वर धाम के संत श्री राम बालक दास जी के द्वारा किया गया 

        रामफल जी  ने जिज्ञासा की, गुरुदेव ब्राम्हण को देवता क्यों कहा जाता है इस पर प्रकाश डालने की कृपा हो 

                 बाबा जी ने बताया कि मनुष्य जन्म में यदि कोई देव श्रेणी है तो वह ब्राह्मण है इसका अर्थ यह नहीं कि ब्राह्मण जाति में जन्म लेने वाला या ब्राह्मण कुल में जन्म लेने वाला हर बालक ब्राह्मण हो,वह जन्म लेते समय शूद्र ही होता है जब तक वह दीक्षा लेकर के यग्योपवित धारण नहीं करता तब तक वह ब्राह्मण नहीं होता साथ ही ब्राह्मण कर्म भी करना आवश्यक है जैसे दान लेना और दान देना वेद पढ़ना और वेद पढ़ाना यज्ञ करना और यज्ञ करवाना है 6 कर्म ब्राह्मणों के लिए अत्यधिक आवश्यक है, साथ ही अग्निहोत्र भी होना आवश्यक है, ब्राह्मणों को धर्म पर स्थिर होना आवश्यक है वही ब्राम्हण देव  श्रेणी में आते हैं हर ब्राह्मण देवता नहीं हो सकता 

                   रोम साहू जी ने जिज्ञासा रखी की 

आंखों देखा घी भला 

ना मुख मेला तेल। 

साधु से झगरा भला 

ना दुष्टन सो मेल।। 

बाबा जी कबीर साहेब की वाणी पर प्रकाश डालने की कृपा करें।,बाबाजी ने बताया कि यह पंक्तियां कबीर दास जी के द्वारा उद्धृत है जो की बहुत ही सुंदर और सच्चा ज्ञान है कहा गया है कि  तेल को मुंह में लेने से अच्छा एक बूंद घी का दर्शन कर लेना   अर्थात यदि हम संत व्यक्ति से लड़ झगड़ भी ले तो भी हम उनसे सुलह कर लेंगे लेकिन ऐसे व्यक्ति से कभी भी मेल मिलाप नहीं करना चाहिए जो दुष्ट  हो वह आपके लिए हानिकारक ही होगा

                 पाठक परदेसी जी ने जिज्ञासा रखी की 

बोली ठोली मस्करी, हंसी खेल हरामl

मद माया और स्त्री, नहीं संतन के कामll

महात्मा कबीर के इस दोहे पर प्रकाश डालने की कृपा हो भगवान, संत कबीर की वाणीयों को स्पष्ट करते हुए बाबा जी ने बताया कि यहां पर संतो के क्या-क्या गुण होने चाहिए इसे स्पष्ट किया गया है संत वे होते हैं जो कभी किसी को ताना नहीं मारते मस्करी अर्थात मजाक नहीं उड़ाते झूठी बातों को कहकर उस का आनंद नहीं लेते 

 आनंद लेना ही है तो  सत्य संभाषण करके आनंद लेना चाहिए अच्छी भगवान की कथा सुनकर उसका आनंद लेना चाहिए संतो को तो बहुत ही गंभीरता से और सोच विचार कर लिए गए निर्णय पर ही बोलना चाहिए

 इस प्रकार आज का ऑनलाइन सत्संग संपन्न हुआ

 जय गौ माता जय गोपाल जय सियाराम

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