ऑनलाइन सत्संग का आयोजन संत श्री राम बालक दास जी के द्वारा प्रातः 10:00 बजे उनके विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों के माध्यम से किया जाता - fastnewsharpal.com
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ऑनलाइन सत्संग का आयोजन संत श्री राम बालक दास जी के द्वारा प्रातः 10:00 बजे उनके विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों के माध्यम से किया जाता

ऑनलाइन सत्संग का आयोजन संत श्री राम बालक दास जी के द्वारा प्रातः 10:00 बजे उनके विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों के माध्यम से किया जाता 



प्रतिदिन की भांति ऑनलाइन सत्संग का आयोजन संत श्री राम बालक दास जी के द्वारा प्रातः 10:00 बजे उनके विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों में किया जाता है जिसमें सभी भक्तों गुण जुड़कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त करते हैं 

         आज पुरुषोत्तम अग्रवाल जी ने जिज्ञासा रखी कि श्री जगन्नाथपुरी मंदिर के इतिहास, महत्व एवं इसकी विशेषता पर कृपया विस्तार से बताने की कृपा करेंगे बाबा जी।

        जगन्नाथ की की महिमा का गुणगान करते हुए बाबा जी ने बताया कि भगवान जगन्नाथ का पूजन विधान बहुत ही दिव्य और अलौकिक है, राजा इंद्रदूम को भगवान ने स्वयं सपने में आकर कास्ट की मूर्ति का निर्माण कराकर पूजन के लिए प्रेरित किया था और उन्होंने भगवान जगन्नाथ सुभद्रा जी और बलदाऊ जी की कास्ट की मूर्ति का निर्माण करवाया, इस मूर्ति को प्रति 12 वर्ष में बदला जाता है और भगवान जगन्नाथ के हृदय पट  में भगवान श्रीकृष्ण जब स्वधाम का गमन कीये तो उनका ब्रह्म तत्व का स्थायित्व है, ऐसा माना जाता है, भगवान जगन्नाथ जी के मंदिर का भी इतिहास बहुत ही अद्भुत है यह मंदिर के अंदर समुद्र की कोई आवाज नहीं सुनाई देती और जैसे ही हम मंदिर के बाहर आते हैं तो हमें समुद्र की कल कल की आवाज सुनाई देती है वैसे ही मंदिर के अंदर किसी भी पक्षी का आवागमन नहीं है और मंदिर के ऊपर भी कोई पक्षी नहीं उड़ सकता और कोई एरोप्लेन आदि भी नहीं उड़ता, इस मंदिर के ऊपर एक चक्र सुदर्शन लगा हुआ है जिसे किसी भी दिशा से देखने पर वह सीधा ही दिखाई देता है ध्वज भी इस मंदिर के ऊपर प्रतिदिन चढ़ाया व उतारा जाता है यदि एक दिन भी ध्वज को ना उतारा जाए तो मंदिर को 18 साल के लिए बंद कर दिया जाएगा इसीलिए ध्वज भी प्रतिदिन उतारा जाता है एवं चढ़ाया जाता है और ध्वज जिस दिशा में उड़ता है वह हवा की विपरीत दिशा होती है वह भी एक चमत्कार ही है मंदिर के ऊपर से ध्वज है उसकी छाया भी  दिखाई नहीं पड़ती

        कथा आती है कि स्वयं भगवान विष्णु जी ने अपने चारों धाम का यात्रा किया सर्वप्रथम वे बद्री धाम में पधारे और वहां पर तपत कुंड में उन्होंने स्नान किया इसीलिए यहां पर स्नान का बहुत अधिक महत्व है फिर वे  द्वारका धाम पहुंचे और वहां पर उन्होंने अपना श्रृंगार किया

 इसीलिए यहां पर भगवान के श्रृंगार का महत्व है इसके बाद वह तीसरे धाम जगन्नाथ धाम  पहुंचे वहां उन्होंने भोजन प्रसादी ग्रहण किया राजभोग ग्रहण किया इसीलिए यहां पर अन्न भोग का बहुत अधिक महत्व है यहां के भात का बहुत अधिक महत्व है और फिर महाविष्णु रामेश्वरम पहुंचे वहां पर उन्होंने शयन किया इस तरह  चार धाम के निर्माण की कथा आती है

        जगन्नाथ में भोजन प्रसादी का  बहुत अधिक महत्व है यहां के परसादी निर्माण की महिमा को पूरा जगत आज तक नहीं समझ पाया यहां पर सात हँडियो में भात बनाया जाता है और सबसे ऊपर की हंडी का ही भात सर्वप्रथम पकता है पहले हंडी पकती है फिर उसे उतारा जाता है तब वह ऊपर की दूसरी हंडी पर तीसरी चौथी और सबसे नीचे की हंडी का भात सबसे अंतिम में पकता है, यहां के भोजन प्रसादी का इतना अधिक महत्व है कि यहां पर एकादशी में भी भोजन प्रसादी ग्रहण करने पर एकादशी उपवास नहीं टूटता

     इस प्रकार आज का भगवान जगन्नाथ की कथा से सराबोर सत्संग पूर्ण हुआ ओर भगवान जगणनाथ जी के रथयात्रा पर्व की बाबाजी ने सभी को शुभकामनाएं दी

 जय गौ माता जय गोपाल जय सियाराम,

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