आज का सुविचार(चिन्तन) - fastnewsharpal.com
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आज का सुविचार(चिन्तन)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..04-07-2021*..🎋


✍🏻मन को वश करने के लिए दो तलवारों का प्रहार करना पड़ता है, एक हे अभ्यास और दूसरा है वैराग्य।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻ज़िद, गुस्सा, गलती, लालच और अपमान खर्राटों की तरह होते हैं, जो दूसरा करे, तो चुभते हैं परन्तु स्वयं करें, तो एहसास तक नहीं होता।

🌹 *σм ѕнαитι.*🌹

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*🎄🌹꧁!! जीवन का सत्य !!꧂🌹🎄​*

*मनुष्य का भौतिक जीवन अनेक सम्बन्धो से युक्त है। विश्व का कोई भी देश हो, धर्म हो या वर्ग हो, सबंधो का ताना-बाना सहज ही देखने में आता है। किन्तु आज इन सभी भौतिक सम्बन्धो में आत्मिकता ना रह कर, सिर्फ एक देह का दूसरी देह से सम्बन्ध हो कर रह गया है।*

*यही वजह है कि आज सम्बन्धो में स्नेह, सम्मान, प्रेम और सुरक्षा की जगह तनाव, भय और असुरक्षा की भावना ज्यादा दिखाई देती है। तो ऐसी विकट परिस्थिति में आवश्यकता है ऐसे परिणय सूत्र में बंधने की, उस परम साथी से सम्बन्ध जोड़ने की, जिसमे ना तो भय है, ना असुरक्षा है और ना ही कोई तनाव है। अगर कुछ है तो वह है सच्चा सुख, शान्ति, प्रेम, आनन्द, पवित्रता, ज्ञान और शक्ति। इस परिणय सूत्र का नाम है "परमात्म-परिणय"*  

*संसार में किसी विवाहिता को सदा सुहागिन रहने का आशीर्वाद यह सोच कर दिया जाता है कि उसके जीवन में सुख, प्रसन्नता और श्रृंगार हमेशा बना रहे। तो सोचिये उस सर्वशक्तिमान, सर्वगुणों के सागर अकालमूर्त परमपिता परमात्मा के संग परिणय सूत्र में बंधने के बाद प्रत्येक मनुष्य आत्मा हमेशा के लिए सुख, प्रसन्नता और सच्चे श्रृंगार की अधिकारी हो जायेगी ना।*

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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*04 जून:-*_ कोई भी बात आये उसे भगवान् को बताकर आप मुस्कुराते रहो ।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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अनमोल वचनः

जिसे परमात्मा का सिमरण हर पल है, उसका हर कार्य आसानी से हो जाता है।कठिन से कठिन परिस्थिति में भी ऐसे व्यक्ति को नहीं रोका जा सकता है,क्योंकि परमात्मा का ध्यान हर पल होने के कारण उसके पास आगे बढ़ने की ताकत और साहस हरदम होता है।

🙏🏻ओम् शांति 🙏🏻 

🎈आपका दिन शुभ हो 🎈

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🙏 *ॐ शांति* 🙏

हम सबमें अनंत शक्तियां हैं परन्तु सब *सुप्त* हैं, शक्ति व पवित्रता का अटूट सम्बन्ध है। जैसे-जैसे हम *विकारों* के *वश* होते जाते हैं तो हमारी हमारी शक्तियां सुप्त होती जाती हैं, क्योंकि किसी भी प्रकार के *विकार* से बुद्धि पर *धूल* जमती जाती है और हमारी निर्णय शक्ति समाप्त होती जाती है।

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐

*ओम शांति ब्रह्मा मुख द्वारा निराकार शिव भगवानुवाच l*
 
🌏आज तक दुनिया में जो भी महान बनाl उसको ही सहनशीलता का है पेपर देना l तभी दुनिया ने उसे महान माना l🤌🏻

 🔥इस परीक्षा से इंसान तो क्या, भगवान को भी पड़ता है गुजरना lक्रोध से वा अहंकार से, अपनी बात मनवाना, अपना कार्य करवानाl 🚶🏻‍♂️

🧚🏻‍♀️यह तो है दूसरों के दिलों में, घृणा वा नफरत पैदा करनाl लेकिन यह तो है विकारियो का विकारों से सामना करनाl यह भी है, आग में और ही घी डालना l🙇🏻‍♂️ 

🙏🏼हमें तो है, पावनता कि राह पर चलना l अवगुणों को तथा विकारों को, दिव्य गुणों से और पवित्रता से जीतनाl इसमें ही, बाप समान हिम्मत दिखानाl👨🏻‍🦳

👺 दूसरों के बुरे व्यवहार को भी समा लेना, उनको भी क्षमा करनाl यह है अपनी सहनशक्ति का सबूत देना l 😊

👽बुराई को अच्छाई से जीतना, यही है शक्तिशाली महावीर बननाl विकारों के वश में है, सारा ही जमाना, उनका काम है, दूसरों को हिलानाl👫

 💡अपना काम है, ज्ञान और योग बल से  अचल रहना l इसी सत्य की धारणा में है, विजई बननाl🏃🏻‍♂️



♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️


*🟢"सेवा भक्ति"🙏 🏵️

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          वृन्दावन में एक बिहारी जी का परम् भक्त था, पेशे से वह एक दुकानदार था। वह रोज प्रातः बिहारी जी के मन्दिर जाता था और फिर गो सेवा में समय देता और गरीब, बीमार और असहाय लोगों के उपचार, भोजन और दवा का प्रबन्ध करता।


वह बिहारी जी के मन्दिर जाता न तो कोई दीपक जलाता न कोई माला न फूल न कोई प्रसाद। उसे अपने पिता की कही एक बात, जो उसने बचपन से अपने पिता से ग्रहण की थी और जीवन मन्त्र बना रखी थी। उसके पिता ने कहा था बिहारी जी की सेवा तो भाव से होती है। जो उनके हर जीव की, पशु पक्षियों की सेवा करता है वह उन्हें प्रिय है। देखो उन्होंने भी तो गौ सेवा की थी। लेकिन एक बात थी मन्दिर में बिहारी जी की जगह उसे एक ज्योति दिखाई देती थी, जबकि मन्दिर में बाकी के सभी भक्त कहते वाह ! आज बिहारी जी का श्रंगार कितना अच्छा है, बिहारी जी का मुकुट ऐसा, उनकी पोशाक ऐसी, तो वह भक्त सोचता, बिहारी जी सबको दर्शन देते है, पर मुझे क्यों केवल एक ज्योति दिखायी देती है। हर दिन ऐसा होता।

          एक दिन बिहारी जी से बोला ऐसी क्या बात है की आप सबको तो दर्शन देते हैं पर मुझे दिखायी नहीं देते। कल आपको मुझे दर्शन देना ही पड़ेगा। अगले दिन मन्दिर गया फिर बिहारी जी उसे ज्योत के रूप में दिखे। वह बोला बिहारी जी अगर कल मुझे आपने दर्शन नहीं दिये तो में यमुना जी में डूबकर मर जाऊँगा। 

          उसी रात में बिहारी जी एक कोड़ी के सपने में आये जो कि मन्दिर के रास्ते में बैठा रहता था, और बोले तुम्हे अपना कोड़ ठीक करना है वह कोड़ी बोला-हाँ भगवान, बिहारिजी बोले – तो कल यहाँ से मेरा एक भक्त निकलेगा तुम उसके चरण पकड़ लेना और तब तक मत छोड़ना जब तक वह ये न कह दे कि बिहारी जी तुम्हारा कोड़ ठीक करे। कोड़ी बोला पर प्रभु यहाँ तो रोज बहुत से भक्त आते हैं मैं उन्हें पहचानुँगा कैसे ? भगवान ने कहा जिसके पैरों से तुम्हे प्रकाश निकलता दिखायी दे वही मेरा वह भक्त है।

          अगले दिन वह कोड़ी रास्ते में बैठ गया जैसे ही वह भक्त निकला उसने चरण पकड़ लिए और बोला पहले आप कहो कि मेरा कोड़ ठीक हो जाये। वह भक्त बोला मेरे कहने से क्या होगा आप मेरे पैर छोड दीजिये। कोड़ी बोला जब तक आप ये नहीं कह देते की बिहारी जी तुम्हारा कोड़ ठीक करें तब तक मैं आपके चरण नहीं छोडूँगा। भक्त वैसे ही चिंता में था, कि बिहारी जी दर्शन नहीं दे रहे, ऊपर से ये कोड़ी पीछे पड़ गया तो वह झुँझलाकर बोला "जाओ बिहारी जी तुम्हारा कोड़ ठीक करें" और मन्दिर चला गया। 

          मन्दिर जाकर क्या देखता है बिहारीजी के दर्शन हो रहे हैं, बिहारीजी से पूछने लगा अब तक आप मुझे दर्शन क्यों नहीं दे रहे थे, तो बिहारीजी बोले: तुम मेरे निष्काम भक्त हो आज तक तुमने मुझसे कभी कुछ नहीं माँगा इसलिए मैं क्या मुँह लेकर तुम्हे दर्शन देता, यहाँ सभी भक्त कुछ न कुछ माँगते रहते हैं, इसलिए में उनसे नजरें मिला सकता हूँ, पर आज तुमने रास्ते में उस कोड़ी से कहा कि, बिहारी जी तुम्हारा कोड़ ठीक कर दें इसलिए में तुम्हे दर्शन देने आ गया।

          

*भक्तों भगवान की निष्काम भक्ति ही करनी चाहिये, भगवान की भक्ति करके यदि संसार के ही भोग-सुख ही माँगे तो फिर वह भक्ति नहीं वह तो सोदेबाजी है। सबसे बड़ी परमात्मा की सेवा उनकी है जो वास्तव में बेबस और लाचार है। असहाय और दुःखियों की निस्वार्थ सेवा इस जगत की सबसे बड़ी सेवा है।*





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