आज का सुविचार(चिन्तन) - fastnewsharpal.com
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आज का सुविचार(चिन्तन)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..07-07-2021*..🎋


✍🏻दुनिया में सबसे मुश्किल काम अपना सुधार है और सबसे आसान दूसरों कि कमी ढूढ़ना।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻रिश्तों में मिठास रखने के लिए, सिर्फ एक ही शर्त है। दिल इस्तेमाल करे दिमाग नहीं प्यार बांटा तो रामायण लिखी गई और सम्पत्ति बांटी तो महाभारत। कल भी यही सत्य था आज भी यही सत्य है।

🌹 *σм ѕнαитι.*🌹

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   ओम शांती
*✍चलकर देखा है अक्सर,मैंने अपनी चाल से तेज.!!*

*पर वक्त,और तकदीर से आगे,* 

*कभी निकल न सका..* 

*जिनके पास अपने हैं,* 

        *वो अपनों से झगड़ते हैं..*

*जिनका कोई नहीं अपना,*

        *वो अपनों को तरसते हैं..!!*
  ॐ शांति
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अनमोल वचनः

कहते है "भगवान ने दुःख दिया" परंतु वह तो हमारा रूहानी मात-पिता है,उन्हें तो सुखदाता,सुखसागर कहते हैं फिर वह दुःख कैसे दे सकते ?  हम गाते भी हैं तुम मात-पिता हम बालक तेरे, तुमहरी कृपा ते सुख घनेरे और जो दुःख देता है उसे तो दुश्मन कहा जाता है और सुख दु:ख तो हमें अपने कर्म अनुसार मिलते हैं। 
 
🙏ओम शान्ति🙏

🍁आपका दिन शुभ हो 🍁

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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*07 जुलाई:-*_ में आत्मा परमात्मा का बच्चा उन्ही के जैसे शांत सुद्ध सत्य हु ये आत्मा सन्मान (self रेस्पेक्ट) स्वयम को दो।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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        *💠◆ माँसाहार या शवाहार ◆💠*

_★ मित्रों जिसे हम मांस कहते हैं वह  वास्तव में क्या है? आत्मा के निकल जाने के बाद पांच तत्व का बना आवरण अर्थात शरीर निर्जीव होकर रह जाता है। यह निर्जीव, मृत अथवा निष्प्राण शरीर ही लाश या शव कहलाता है। यह शव आदमी का भी हो सकता है और पशु का भी। इस शव को बहुत अशुभ माना जाता है। इसकी भूत मिट्टी आदि निकृष्ट चीजों से तुलना की जाती है।_

_● यदि कोई इसे छू लेता है तो उसे स्नान करना पड़ता है। जिस घर में यह रखा रहता है उस घर को अशुद्ध माना जाता है। और वहां खाना बनना तो दूर कोई पानी भी नहीं पीना चाहता। इसको देखकर कई लोग तो डर भी जाते हैं क्योंकि आत्मा के निकल जाने पर यह अस्त-व्यस्त और डरावना हो जाता है।_

_● मांसाहार करने वाले लोग इसी शव को  या लाश को खाते हैं। इसलिए यह मांसाहार, शवाहार या लाशाहार ही है।_

_# पात्र_आधुनिक_खाध_जंगली_

_● कहा जाता हैं कि प्राचीन समय में जब सभ्यता का विस्तार नहीं हुआ था उस समय मानव जंगल में रहता था।_

_● तो उसके पास जीवन में उपयोगी साधनों का अभाव था।_

_●उस समय पेट भरने के लिए वह जंगली जानवरों का कच्चा मांस खा लेता था।_

_●धिरे-धीरे कृषि प्रारंभ हुई अनेक  प्रकार के खादों का उत्पादन हुआ, शहर बसे और मानव ने अनेक जीवन उपयोगी साधनों का आविष्कार कर उस  आदिम जंगली जीवन को तिलांजलि दे दी।_

_● उस समय की भेंट में आज उसके पास मकान, वस्त्र, जूते, बर्तन, मोटर, कम्प्यूटर आदि सब उत्तम प्रकार के आरामदायक  साधन है।_

_● उपरोक्त तथ्य यदि सत्य है तो मानव ने काफी विकास कर लिया है।_

_●वह हाथ में लेकर खाने के बजाए, पत्तों ऊपर रखकर खाने के बजाय आधुनिक डिजाइन की प्लेस में चम्मच के प्रयोग से खाता है।_

_●डाइनिंग टेबल पर बैठना भी उसने सीख लिया।_

_●परंतु प्रश्न यह है कि वह खाता क्या है?_

_● उसकी प्लेट में है क्या ?_

_●यदि इतनी साज सज्जा, रखरखाव को अपना कर, इतना विकास करके भी उसकी प्लेट पर रखा आहार यदि आदिम काल वाला ही है,_
 
_●यदि इतना विकास करके भी वह उस जंगली मानव वाले खाने को ही अपनाए हुए हैं तो विकास क्या किया?_

_●यह तो वही बात हुई कि मटका मिट्टी के स्थान पर सोने का हो गया पर अंदर पड़ा पदार्थ जहर का जहर ही रहा।_

_●यदि सभ्यता ने विकास किया तो क्या सिर्फ बर्तनों और डाइनिंग टेबल कुर्सियों तक ही विकास किया?_

_● क्‍या खाने के नाम पर सभ्यता नहीं आई?_

_● फर्क  इतना ही तो है उस समय जानवर को मारने के तरीके दूसरे थे और आजकल तीव्रगति वाली मशीनें यह कार्य कर देती है परंतु मुख तो अपने को मानव कहलाने वाले का ही है।_

_● मारने के हथियार बदल गए परंतु खाने वाला मुख तो नहीं बदला।_

_● मुख तो मानव का ही है।_

_# पेट_बन_गया_शमशान_

_● शव को जब श्मशान में ले जाते हैं तो उसे चिता पर लिटा कर आग लगाई जाती है।_

_● परंतु मानव को देखिए,_

_● वह शव को अथवा शव के टुकड़ों को रसोईघर में ले जाता है।_

_●फिर उस को रसोईघर के बर्तनों में पकाता है।_

_● तो उसकी रसोई क्या हो गई?_

_● श्मशान ही बन गई ना!_

_● तो फिर उस लाश को मुंह के माध्यम से पेट में डालता हैं।_

_● सच पूछो तो ऐसे व्यक्ति के घर की हवा भी पतित बनाने वाली है।_

_● संत तुकाराम कहते हैं कि पापी मनुष्य यह नहीं देख पाता है कि सभी प्राणियों में प्राण एक सरीका होता है।_

_● जो व्यक्ति ना तो स्वयं कष्ट पाना चाहता है, ना मरना चाहता है वह निष्ठुरता पूर्वक दूसरों पर हाथ कैसे उठाता है?_

_● यही भाव संत दादू दयाल का है-_

_● कोई काहू जीव की, करें आत्मा घात। सांच कहू संसा नहीं, सो प्राणी  दोजखि जात।_

_● पूरी गंभीरता के साथ संत दादूदयाल जी कहते हैं कि 'मैं सच कहता हूं, मुझे इसमें तनिक भी शंका नहीं है कि ऐसा प्राणी नरक में जाता जाता है अर्थात पाप में डूब जाता है।_

_● वास्तव में मांस खाने वाले को इस शब्द का अर्थ समझना चाहिए मांस अर्थार्थ माम्सः मेरा वह। जिसको मैं खा रहा हूं वह मुझे खाएगा।_

_● यह एक दुष्चक्र है।_

 _●हिंसा इस चक्र को जन्म देती है - उसके इस जन्म में मैं उसे खाता हूं,_

_● अगले जन्म में मुझे हिंसा का शिकार होना होगा।_

_● और इस प्रकार मेरा भोजन ही मेरा कॉल बन कर जन्म जन्मांतर तक मेरे पीछे लगा रहेगा।_

_● इसलिए माँ प्रकृति की बड़ी संतान मानव को अपने छोटे भाइयों (मूक प्राणियों) को जीने का अधिकार देते हुए,  मैं जिऊँ और अन्य को मरने दो,  इस राक्षसी प्रवृत्ति को छोड़ देना चाहिए।_ 

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                *☀️● ओम शांति ●☀️*

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🙏 *ॐ शांति* 🙏

चरित्र एक *वृक्ष* है... प्रतिष्ठा, यश और सम्मान उसकी *छाया* । लेकिन विडंबना यह है कि वृक्ष का ध्यान बहुत कम लोग रखते हैं और उसकी *छाया* सबको चाहिये।

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐

*कुछ चीजें समीप जाने पर बगैर मांगे मिल जाती हैं जैसे...*
*बर्फ के पास शीतलता, अग्नि के पास गर्माहट और गुलाब के पास सुगंध।*

*भगवान👆🏻💫  से मांगने की बजाए निकटता🏛️🚶🏻‍♀️🚶🏻‍♂️👬🏻👭🏻👫🏻👨‍👩‍👧‍👦 बनाइए, सब कुछ अपने आप मिलना शुरू हो जाएगा।*


*इस तरह👩🏻😊👦🏻 मुस्कुराने की*
*आदत डालिये कि ..!*

*परिस्थिति🍪👚🏠💸🩺💊💉👫🏻👨‍👩‍👧‍👦🤝🏻 भी आपको🤦🏻‍♀️🤦🏻‍♂️परेशान*
*कर - कर के थक जाए ...!!*

*और जाते जाते बोले*

*आप👭🏻👬🏼👫🏻👩🏻😊👦🏻से मिल🤝🏻कर😊 खुशी हुई ...!!!*                        

*_Good👆🏻💫🇲🇰🌅🧘🏻‍♀️🧘🏻‍♂️morning._*

                 ..                                     *_दो गज🚶🏻‍♀️😷🚶🏻‍♂️ दूरी बहुत बहुत है जरूरी, सुरक्षित रहे, स्वस्थ रहे, अपनों👭🏻👬🏼👫🏻👨‍👩‍👧‍👦 के साथ मस्त रहे, अपना👩🏻💫👦🏻 खयाल रखें।_*

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               *🎊★ ओम शान्ति ★🎊*


_★ एक महात्मा के एक शिष्य भिक्षु बनने के पहले राजकुमार  था। दीक्षा ग्रहण करते ही वह उग्र तपस्या में लीन हो गया । तन की  सुधी को भी भूलकर वह मात्र तप करता रहा । परिणाम स्वरूप उसका शरीर सूखकर हड्डी का ढांचा मात्र रह गया ।_


_◆ एक दिन महात्मा की नजर उस भिक्षु पर पड़ी । उन्होंने उसे नजदीक बुलाया और कहा वत्स, जब तुम राजकुमार थे तब तुम वीणा बहुत अच्छी बजाया करते थे । आज भी एक राग बजाओ ।_


_◆ उन्होंने एक भिक्षु से वीणा मंगाकर उसे दी । उसने कहा  महात्मा इसके तार बहुत ही ढीले हैं इसको कसना आवश्यक है । महात्मा  बोले लाओ  मैं वीणा के तारों को कस दूँ, फिर तुम बजाना । जब दोबारा वीणा शिष्य के हाथों में आई तो वह उलझन में पड़ गया और बोला महात्मा यह अब भी संगीत उत्पन्न करने की दशा में नहीं है । इन तारों को मध्य में रखने से या संतुलन में रखने से ही वीणा के स्वर झंकृत होंगे । इसको यदि अभी बजाएंगे तो सभी तार टूट जाएंगे क्योंकि यह अत्यधिक कसा हुआ है ।_ 


_◆ महात्मा ने कहा वत्स ठीक इसी प्रकार यह जीवन भी वीणा के तार की तरह है । जीवन वीणा से आनंद, सुख, शांति और प्रेम के स्वर भी तभी झंकृत होंगे जब वह मध्य में अर्थात् संतुलित हो ।_


_◆ संतुलन ही समृद्धि और शांत जीवन का राज है । जीवन के विभिन्न पहलुओं में जब तक संतुलन नहीं होगा तब तक हम सफल नहीं हो सकते । जीवन का लक्ष्य बीच में ही छूट जाता है ।_


_◆ यदि हम एक नजर चारों तरफ दौडते हैं तो पाते हैं कि किसी भी सफल उद्योगपति या वैज्ञानिक या चित्रकार या साहित्यकार या कोई भी राजनीतिज्ञ या आध्यात्मिक जीवन के उच्च शिखर पर पहुंचने वाले, सभी का जीवन  संतुलित होता था । उस विशेष कार्य की कामयाबी में उनके सभी आंतरिक गुणों और शक्तियों में एक सही तालमेल था ।_


_◆ बहुत सी मानसिक शक्तियां और गुण है जिन्हें हमें व्यवस्थित करना होगा । जैसे स्वाभिमान और गर्व होना चाहिए लेकिन घमंड और अहंकार नहीं, मितव्ययी तो होना चाहिए परंतु कंजूस नहीं, अटल संकल्प वान तो होना चाहिए परंतु जीवन में अड़ियल जिद्दी रवैया ठीक नही, शांति और धैर्य तो होना चाहिए किंतु सुस्त और आलसी नहीं इत्यादि ..... ।_


_◆ इसके लिए जीवन में संतुलन की शक्ति में दक्षता हासिल करना  अत्यंत आवश्यक है ।_


_◆ परमपिता परमात्मा सर्वशक्तिमान है । वे शक्तियों के स्त्रोत है, गुणों मे अनंत हैं । जब हम आत्मिक स्थिति में स्थित होकर परमात्मा से जुड़ते हैं और अधिक से अधिक उनके सानिध्य में रहते हैं । तब आत्मा न केवल संतुलन की शक्ति से भरपूर होती है वरन् उनमें दक्ष भी होती जाती है ।_


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             *🌟★ OM SHANTI ★🌟*


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