गांवो के गौठानो में अव्यवस्था मुख्य मार्गो पर नजर आते हैं आवारा मवेशी,राज्य सरकार का रोका छेका अभियान फेल-इमरान सोलंकी
गांवो के गौठानो में अव्यवस्था मुख्य मार्गो पर नजर आते हैं आवारा मवेशी,राज्य सरकार का रोका छेका अभियान फेल-इमरान सोलंकी
गोबरा नवापारा
राज्य सरकार की रोका-छेका अभियान पूरी तरह से फ्लॉप होता नजर आ रहा है उक्त बातें भाजपा गोबरा नवापारा अल्पसंख्यक मोर्चा के मंडल अध्यक्ष इमरान सोलंकी ने कही। शासन के निर्देशों के बावजूद गोबरा नवापारा नगर व अंचल में रोका छेका अभियान धरातल पर नजर नहीं आ रहा है। पशुओं की सुरक्षा और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए राज्य सरकार ने रोका छेका अभियान की शुरुआत की थी। जिसके तहत मवेशियों को गौठानों में रखने की योजना है।शासन की महत्तवकांक्षी योजना का क्रियान्वयन सिर्फ दिखावे तक ही सीमित नजर आ रहा है। गोबरा नवापारा नगर पालिका क्षेत्र से लगें गावो में आज भी मवेशी सड़कों पर बैठे नजर आ रहे हैं। ये मवेशी किसी बड़े हादसों को आमंत्रित कर रहे है। बारिश के बाद मवेशी अक्सर मुख्य सड़कों पर बैठ जाते है, जिनकी चिंता न तो नगर पालिका प्रशासन कर रहा है और न ही सरकार का कोई नुमाइंदा?
नगर के मुख्य मार्गो सदर रोड गंज रोड रायपुर रोड पर मवेशियों का जमावड़ा-
मुख्य मार्गो में बेतरतीब तरीके से आवारा मवेशी बैठे रहते है।जिससे सदर रोड, गंज रोड, रायपुर रोड, की सड़कों पर हमेसा दुर्घटना होती रहती है। इन पशुओं के कारण हर साल कई वाहन चालक हादसे का शिकार होते है।आवारा पशुओं के सड़कों पर बैठने के कारण हो रही सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और मवेशियों को संरक्षित रखने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रोका छेका अभियान की शुरुआत की थी। लेकिन इस अभियान की वास्तविकता की पोल नगर पालिका क्षेत्र सहित अंचल की सड़कों पर बैठे मवेशी खोल रहे है
इमरान सोलंकी क्या कहते है-
अल्पसंख्यक मोर्चा मण्डल अध्यक्ष गोबरा नवापारा इमरान सोलंकी का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश भर में करोड़ो रुपए खर्च कर ग्राम पंचायतों में गौठान निर्माण करा रही हैं। और रोका छेका कार्यक्रम चला रही लेकिन ये फेल होती नज़र आ रही हैं। गोबरा नवापारा नगर सहित अंचल की बात करें तो दिन रात सड़को में मवेशियों के जमावड़ा लगा रहता है। जब मवेशियों को सुरक्षित रखने के लिए करोड़ो रुपए खर्च कर गांव गांव में गौठान निर्माण करा रही है और मवेशी सड़को में घुम रहे हैं तो इस प्रकार की योजना किस काम की है। राज्य सरकार की गौठान पूरी तरह फेल हैं।
ठप पड़ता नजर आ रहा अभियान-
बता दें कि प्रदेश में रोका-छेका अभियान कहीं धीमा तो कहीं ठप है।राज्य सरकार ने फसलों की सुरक्षा और किसानों की आय को बढ़ाने के लिए कृषि की परंपरा रोका-छेका अभियान की शुरुआत 19 जून 2020 को किया गया था। इस वर्ष भी 1 जुलाई को प्रदेश के ग्राम पंचायतों के गौठान में रोका-छेका कार्यक्रम आयोजन किया गया था।
शहरों की सड़कों पर घूम रहे मवेशियों से होने वाले हादसों को रोकने के लिए भी यह कदम अहम माना गया, पकड़े गए मवेशियों को कांजीहाउस और गोठानों में रखने के आदेश दिए गए है। लेकिन ज्यादातर जगहों पर तस्वीर इसके विपरीत नजर आ रही है।

