*आत्म रंजन जान रहे फिर भी मनोरंजन हो रहा है,नशाखोरी पर पूज्य निर्यापक मुनिश्री सुधासागर जी के अनमोल वचन* - fastnewsharpal.com
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*आत्म रंजन जान रहे फिर भी मनोरंजन हो रहा है,नशाखोरी पर पूज्य निर्यापक मुनिश्री सुधासागर जी के अनमोल वचन*

 *आत्म रंजन जान रहे फिर भी मनोरंजन हो रहा है,नशाखोरी पर पूज्य निर्यापक मुनिश्री सुधासागर जी के अनमोल वचन*



   सुरेन्द्र जैन/ धरसीवां

चन्द्रोदय तीर्थ चांदखेड़ी में विराजमान निर्यापक श्रमण विद्या गौ के सुदोग्धा 108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन मे कहा*

*आत्म रंजन जान रहे हैं फिर भी मनोरंजन हो रहा है*

1.नशा-आत्म रंजन जान रहे हैं फिर भी मनोरंजन हो रहा है हम जान रहे हैं अच्छा क्या बुरा क्या फिर भी पाप किए जा रहे हैं हमको पता है गुटखा खाना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है खाने वाला कहता है कि यह शराब गुटखा का खाना गलत है हमे आंखों से देखने का नशा है आंखों के नशे से परमार्थ नष्ट हो जाता है गुटखा शराब से तो संसार खराब होता है आंखों के नशे से परमार्थ नष्ट हो जाता है  हमारा नशा भी अलग-अलग प्रकार के होते हैं।

2.क्षमा अनायास-पाप तो हम पूछ कर नहीं करते क्रोध करते हैं तो पूछकर नहीं करते,क्षमा को भी पुछकर नहीं करना जैसे क्रोध अनायास आया क्षमा भी अनायास आ जायें अपनी अच्छाइयां छुपाने का भाव आये,अच्छे कार्य अपनों से बड़ों से पूछकर करते हैं तो पाप कार्य भी बड़ों से पूछकर करना हैं।

3.पाप सब जगह मिलता-हीरा जो है कोयले की खान में निकलता है इसी प्रकार महान आत्माएं भी संसार की गंदगी में से निकलती है तीन प्रकार की पर्याय होती है अनादि अनंत अभी तक पापी थे आगे भी पापी रहेंगे अभी तक संसार मे भ्रमण किया आगे भी संसार मे भ्रमण करेंगे,पापियों ने पाप को शाश्वत कर दिया वो तो अनादि मिथ्यादृष्टि है ओर रहेगा अच्छी वस्तुएं पुरुषार्थगम्य हैं पतन तो हो जाएगा बुरे परिणाम कैसे करते हैं किसी ने नहीं सिखाया पाप कैसे करने हैं अनादि काल से है धर्म ही तो क्या अधर्म ही संसार का स्वभाव बन गया है चारों तरफ कोयला है उसके बीच में छोटा सा हीरा निकल जाता है उसी आशा के बल पर हाथ काले कर लेते है हीरा तो कोयला मे मिलता हैं हिरा की कोई खान नहीं होती।

4.पाप छुपाते-हम धर्म कार्य करते हैं तो परिवार और बड़े से पूछकर करते हैं पाप कार्य छुपाकर करते हैं महान आत्मा वो अच्छाए है अपने मे नहीं मानता संसारी अपने में अच्छाई और दूसरों में बुराई मानता है कोई धर्म करता है तो सबको बता कर करते है लेकिन पाप जब करते हैं जो किसी को नहीं बताते छुपा करके करते हैं।

*प्रवचन से शिक्षा*-अपने में दोष नहीं हो तो भी दोषी मानना सकंलन ब्र महावीर*

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