राजनीति
अक्सर आप लोगो ने देखा होगा ,चुनावी समर मे नेता जनता के बीच आकर बड़े बड़े दावे ,झूठे वादे कर के वोट मांगती है व चुनाव जितने के बाद जनता से दूरी बना लेती है ,लेकिन बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी रहे संजय नेताम का सरल स्वभाव आज भी जनता के बीच चर्चाओं मैं बना रहता हैं ,विधानसभा चुनाव मे संजय तब सुर्खियों मैं आये जब वे पहली बार वोट मांगने देवभोग नगर साप्ताहिक बाजार पहुंचे ,अपनो से बड़ो का पांव छुकर आशीर्वाद लेना
,हमउम्र से हाथ मिलाकर सहज भाव से बात करने का उनका स्वभाव सबका दिल जीत लिया हालांकि चुनाव मे उन्हें हार का सामना करना पड़ा लेकिन बहुत कम अंतर से ,चुनाव मे भाजपा के पूर्व विधायक डमरूधर पुजारी को कांटे की टक्कर देकर बहुत हि कम अंतराल 10 हजार मतों से हार का स्वाद चखना पड़ा ,जहाँ एक तरफ पूर्व मे बीजेपी के गढ़ पूर्व मैं एक कांग्रेस प्रत्याशीयों ने 20 हजार से अधिक मतो से चुनाव हारा तो वही और एक कांग्रेस प्रत्याशी ने लगभग 32 हजार से हार का सामना करना पड़ा था ,कांग्रेस नेता संजय नेताम इस बार भी विधानसभा चुनाव मे जीत के करीब थे लेकिन कांग्रेस पार्टी से ही पूर्व विधायक ने बगावत करके गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से चुनाव लड़कर 19 हजार वोट काट दिया जिसके फलस्वरूप कांग्रेस पार्टी से संजय नेताम को हार का सामना करना पड़ा ,वरना आज बिंद्रानवागढ़ का आवाज छत्तीसगढ़ के सदन भी गूंज उठता भी
,संजय नेताम मैं एक ओर खासियत यह है कि वे अपने कट्टर विरोधियों की बातों को दरकिनार कर अपने कार्यो मैं ज्यादा रुचि रखते है ,इसलिए जनता के उन्हें नेता नही बेटा मानती है वही नेता चुनाव हारने के बादबाद जनता के बीच से गायब हो जाते है लेकिन संजय नेताम मे ऐसी कोई मायूसी नही दिखी बल्कि अगले ही दिन से वे अंचल का सघन दौरा कर पुनः बड़ो का पांव छुकर आशीर्वाद लेने का सिलसिला जारी रहा ,
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मे जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 08 से जिला पंचायत चुनाव मे बतौर कांग्रेस पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान मे खड़े हुए ,हालांकि विरोधीयों को उनकी लोकप्रियता हजम नही हो रही थी और कांग्रेस पार्टी से ही अनेक नेता बगावत कर उनके खिलाफ चुनाव मैदान मैं खड़े हो गए ,हर तरफ संजय नेताम की मुशिकलें बढ़ गई लेकिन एक कहावत है न जिसके किश्मत मैं राजीतिक हो उसे कोई नही मिटा सकता ,विरोधियों ने संजय नेताम को हराने के लिए लाख कोशिश किया लेकिन जनता ने उन्हें आशीर्वाद देकर लगभग 12 हजार मतों से जीत का हार पहना ही दिया ,संजय नेताम कांग्रेस पार्टी के सबसे कद्दावर नेताओ मैं सुमार हो गए क्योंकि जनता और उनकी दूरी कम नही हुई जिसका उन्हें फायदा मिला और वर्तमान मे जिला पंचायत के उपाध्यक्ष है ,हालांकि विधानसभा चुनाव मे उनके हार के बाद जनता को पछतावा भी हुई क्योकि की बीजेपी का विधायक निर्वाचित होने के बाद प्रदेश मे कांग्रेस की सरकार बनी अगर संजय नेताम विधायक के पद पर चुने जाते तो क्षेत्र मैं और जाता विकास होता लेकिन आज भी संजय नेताम जनता के बीच जाकर उनकी हर सुख व दुख मैं साथ खड़े होकर विधायक से भी ज्यादा जनता के शुभचिंतक बन गए है ।
*पांव छूकर आशीर्वाद लेना आज भी नही भूले संजय ,इसलिए जनता उन्हें नेता नही बेटा कहती है----देवभोग*
गुरुवार, 27 अगस्त 2020
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पांव छूकर आशीर्वाद लेना आज भी नही भूले संजय ,इसलिए जनता उन्हें नेता नही बेटा कहती है
संजय नेताम
देवभोग ---स्पेशल रिपोर्टअक्सर आप लोगो ने देखा होगा ,चुनावी समर मे नेता जनता के बीच आकर बड़े बड़े दावे ,झूठे वादे कर के वोट मांगती है व चुनाव जितने के बाद जनता से दूरी बना लेती है ,लेकिन बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी रहे संजय नेताम का सरल स्वभाव आज भी जनता के बीच चर्चाओं मैं बना रहता हैं ,विधानसभा चुनाव मे संजय तब सुर्खियों मैं आये जब वे पहली बार वोट मांगने देवभोग नगर साप्ताहिक बाजार पहुंचे ,अपनो से बड़ो का पांव छुकर आशीर्वाद लेना
,हमउम्र से हाथ मिलाकर सहज भाव से बात करने का उनका स्वभाव सबका दिल जीत लिया हालांकि चुनाव मे उन्हें हार का सामना करना पड़ा लेकिन बहुत कम अंतर से ,चुनाव मे भाजपा के पूर्व विधायक डमरूधर पुजारी को कांटे की टक्कर देकर बहुत हि कम अंतराल 10 हजार मतों से हार का स्वाद चखना पड़ा ,जहाँ एक तरफ पूर्व मे बीजेपी के गढ़ पूर्व मैं एक कांग्रेस प्रत्याशीयों ने 20 हजार से अधिक मतो से चुनाव हारा तो वही और एक कांग्रेस प्रत्याशी ने लगभग 32 हजार से हार का सामना करना पड़ा था ,कांग्रेस नेता संजय नेताम इस बार भी विधानसभा चुनाव मे जीत के करीब थे लेकिन कांग्रेस पार्टी से ही पूर्व विधायक ने बगावत करके गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से चुनाव लड़कर 19 हजार वोट काट दिया जिसके फलस्वरूप कांग्रेस पार्टी से संजय नेताम को हार का सामना करना पड़ा ,वरना आज बिंद्रानवागढ़ का आवाज छत्तीसगढ़ के सदन भी गूंज उठता भी
,संजय नेताम मैं एक ओर खासियत यह है कि वे अपने कट्टर विरोधियों की बातों को दरकिनार कर अपने कार्यो मैं ज्यादा रुचि रखते है ,इसलिए जनता के उन्हें नेता नही बेटा मानती है वही नेता चुनाव हारने के बादबाद जनता के बीच से गायब हो जाते है लेकिन संजय नेताम मे ऐसी कोई मायूसी नही दिखी बल्कि अगले ही दिन से वे अंचल का सघन दौरा कर पुनः बड़ो का पांव छुकर आशीर्वाद लेने का सिलसिला जारी रहा ,
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मे जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 08 से जिला पंचायत चुनाव मे बतौर कांग्रेस पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान मे खड़े हुए ,हालांकि विरोधीयों को उनकी लोकप्रियता हजम नही हो रही थी और कांग्रेस पार्टी से ही अनेक नेता बगावत कर उनके खिलाफ चुनाव मैदान मैं खड़े हो गए ,हर तरफ संजय नेताम की मुशिकलें बढ़ गई लेकिन एक कहावत है न जिसके किश्मत मैं राजीतिक हो उसे कोई नही मिटा सकता ,विरोधियों ने संजय नेताम को हराने के लिए लाख कोशिश किया लेकिन जनता ने उन्हें आशीर्वाद देकर लगभग 12 हजार मतों से जीत का हार पहना ही दिया ,संजय नेताम कांग्रेस पार्टी के सबसे कद्दावर नेताओ मैं सुमार हो गए क्योंकि जनता और उनकी दूरी कम नही हुई जिसका उन्हें फायदा मिला और वर्तमान मे जिला पंचायत के उपाध्यक्ष है ,हालांकि विधानसभा चुनाव मे उनके हार के बाद जनता को पछतावा भी हुई क्योकि की बीजेपी का विधायक निर्वाचित होने के बाद प्रदेश मे कांग्रेस की सरकार बनी अगर संजय नेताम विधायक के पद पर चुने जाते तो क्षेत्र मैं और जाता विकास होता लेकिन आज भी संजय नेताम जनता के बीच जाकर उनकी हर सुख व दुख मैं साथ खड़े होकर विधायक से भी ज्यादा जनता के शुभचिंतक बन गए है ।
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