*चाक और पेंसिल पर कलाकारी का जुनून है,सौ से अधिक कलाकृति बना चुका है वनांचल का यह युवा*
चाक और पेंसिल पर कलाकारी का जुनून है,सौ से अधिक कलाकृति बना चुका है वनांचल का यह युवा
जयलाल प्रजापति नगरी(धमतरी)
:दुनिया मे असम्भव नाम की कोई चीज नही होती,इस वाक्य को चरितार्थ करने में जुटा हुआ है नगरी इलाके के मुकुंदपुर गांव के 21 वर्षीय कलाकार भानुप्रताप कुंजाम.भानुप्रताप अन्य कलाकारों से बिल्कुल अलग है यह कलाकर बोर्ड पर लिखने वाले चाक पर अलग अलग लगभग 100 तरह की आकृतियां बना चुके है इतने से भी इस युवा कलाकार का मन नही भरा तो इसने पेंसिल की नोक पर बारीक कलाकारी करना प्रारम्भ कर दिया और लगातार अपनी कलाकारी से लोगो को हैरत में डाल रहे है,लेकिन वनांचल में रहने व प्रचार प्रसार से दूर रहने के कारण भानुप्रताप उस मुकाम को हासिल नही कर पा रहे हैं जिसके वे सच्चे हकदार है.
के टीम को जब इस कलाकार के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने भानुप्रताप से मुलाकात कर इस कला की शुरुआत से लेकर अब तक कि जानकारी ली.भानुप्रताप ने बताया कि जब वे बारहवीं कक्षा में पढ़ते थे तो उन्होंने किसी अखबार में पढ़ा था कि चाक व पेंसिल में कलाकृति बनाना लगभग नामुमकिन है बस तभी से इस युवा ने अपने मन मे ठान लिया कि की असम्भव को वो सम्भव बना कर ही रहेगा.प्रारम्भ में चाक में विभिन्न आकृतियों को उभारने में काफी वक्त लगता था किंतु अब भानुप्रताप महज 10 से 15 मिनेट में आकृतियों को उकेर देते है.बीएससी की पढ़ाई पूरी कर चुके भानु के माता पिता मजदूरी करते हैं और भानु पीएससी की तैयारी कर राज्य सेवा में जाना चाहता है किंतु खाली समय मे उसके अंदर का कलाकर जाग उठता है और चाक,पेंसिल,साबुन और यहां तक कि अस्पताल से मिलने वाली टेबलेटो में भी विभिन्न आकृतियां बनाने में लग जाते है.
भानुप्रताप जैसे कलाकार सुदूर ग्रामीण अंचल में होने के कारण उस मुकाम को हासिल नही कर पा रहे हैं जिसके वे सच्चे हकदार हैं, इस कलाकार को जरूरत है उन पारखी लोगो की जो इनकी कला को लोगो तक पहुचाये और इस ग्रामीण अंचल के अदभुत कलाकार को उसका वास्तविक हक दिलाये.


