*आधुनिक जीवन में तनाव न हो यह संभव नहीं है* - fastnewsharpal.com
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*आधुनिक जीवन में तनाव न हो यह संभव नहीं है*

आधुनिक जीवन में तनाव न हो यह संभव नहीं है



अलीराजपुर

 आधुनिक जीवन में तनाव न हो यह संभव नहीं है। जीवन मिला है तो रोजमर्रा की परेशानियां भी मिली हैं. गरीब, मध्यवर्गीय, धनी, धनकुबेर – सभी किसी-न-किसी कारण से चिंतित रहते हैं और तनाव उनके शरीर को खोखला करता रहता है। समस्याओं की प्रतिक्रिया करने से तनाव उपजता है. तनाव जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है। अपने दैनिक जीवन का निरीक्षण करके और कुछ आदतों को बदलकर आप सभी नहीं तो कुछ तनाव उत्पन्न करने वाले कारणों को कम कर सकते है।

 हांलाकि मेरा यह मानना है कि हमारा ज्यादातर तनाव अवांछित होता है और इसे कुछ सरल और कुछ कम सरल उपाय अपनाकर कम किया जा सकता है। यह चुटकियों में संभव नहीं है - यह लक्ष्य कठिन है लेकिन हासिल करने योग्य है। 



 तनाव उत्पन्न करने वाले कारणों को कुछ समझ और विचारपूर्वक दूर किया जा सकता है। यह विचार इंदौर से पधारे जीवन जीने की कला के प्रणेता ब्रहमा कुमार नारायण भाई ने दीपा की चौकी पर स्थित ब्रह्मा कुमारी सभागृह में अपने तनाव को पहचाने इस विषय पर नगरवासियों को संबोधित करते हुए बताया कि सबसे पहले- तनाव को पहचानें :- यह सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। जो बातें आपको तनावग्रस्त करती हैं उन्हें यदि आप केवल पहचान ही लेंगे तो उन्हें दूर करने के उपाय करना आसान हो जायेगा। स्वयं को दस मिनट दें और सोचें कि आज आप तनाव में और दबाव में क्यों रहे. सप्ताह में ऐसा कितने बार होता है? कौन से लोग, गतिविधियाँ, बातें आपकी ज़िन्दगी को बोझिल बनाती हैं? टॉप 10 की एक लिस्ट बनायें और देखें कि क्या आप उनमें कुछ परिवर्तन ला सकते हैं या नहीं। एक-एक करके उन्हें सुधारते जाएँ और प्रयासरत रहें।

2) अनावश्यक संकल्पों को छोड़ दें :-* हम अपने जीवन में कई सारे संकल्प करते हैं। हमें यह करना है,  हमें वह करना है। पत्नी, बच्चे, कामकाज, घर-गृहस्थी, समाज, धर्म, शौक, और ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े कई सारे संकल्पों को हम पूरा करने में लगे रहते हैं। इनमें से प्रत्येक की समीक्षा करें। क्या ऐसा कुछ है जो अच्छे परिणाम की अपेक्षा तनाव देता है। इस कार्य को निर्ममतापूर्वक करने की ज़रुरत है। जो कुछ भी आपके शुख-शांति के रास्ते में आता है उसे बेवज़ह ढोने में कोई तुक नहीं है. उस संकल्प को पहले दूर करें जो ज्यादा तनाव देता हो।

3) टालमटोल करने की प्रवृत्ति छोडें :-* हम सभी ऐसा करते हैं। इसके कारण काम का दबाव बढ़ता जाता है। ‘अभी ही करना है’ की आदत डाल लें। अपने इनबॉक्स और टेबल को साफ़ रखें।

4) व्यवस्था लायें :-* कुछ हद तक सभी व्यक्ति अव्यवस्था के बीच रहते हैं। यदि हम व्यवस्था बनाये रखने का प्रयास करें और इसमें प्रारंभ में सफल हो भी जाएँ तो भी अव्यवस्था को जगह बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता। अपने माहौल में अव्यवस्था रखने से तनाव बढ़ता है। इससे हमें चीज़ें तलाशने में देर लग जाती है और कामकाज में बाधा आती है। अपने परिवेश में व्यवस्था लायें। शुरुआत अपनी टेबल और दराज़ से करें। घर के किसी एक कोने से शुरुआत करें। पूरे घर को दुरुस्त करना ठीक न होगा। छोटे से हिस्से से शुरुआत करें और व्यवस्था को वहां से आगे फैलने दें।

5) जल्दी उठें :-* देर से उठना कई परेशानियों की जड़ है. किसी दिन 15 मिनट देर से उठें तो पाएंगे की रोजमर्रा के सभी काम करने के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। कामकाज पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। जल्दी उठने की आदत डालें। इसी के साथ जल्दी सोने की आदत भी डालनी चाहिए। काम पर जल्दी निकालने से आप ट्रेफिक की समस्या से बच जाते हैं और ड्राइविंग में मज़ा भी आता है। यह जांचें की आपको तैयार होने में कितना समय लगता है और कहीं पहुँचने में कितना समय लगता है। इस समय को कम करके न आंकें। एक छोटा सा अंतराल भी बड़ा बदलाव ला सकता है. सिर्फ दस मिनट का परिवर्तन लाकर देखें। आपको फर्क पता चलेगा।

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