आज का चिंतन(सुविचार) - fastnewsharpal.com
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आज का चिंतन(सुविचार)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..02-01-2021*..🎋


✍🏻जीवन में पैसा नहीँ व्यवहार कमाइये, क्योंकि शमशान में 4 करोड़ नहीँ 4 लोग छोड़ने आएंगे।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥

✍🏻जिस तरह सिलाई मशीन में धागा नहीं डालने पर वो चलती तो जरूर है, पर वह कुछ सील नहीं सकती, उसी तरह यदि जिंदगी में परमात्मा को याद नहीं करोगे तो, वह चलेगी ज़रूर पर प्रभु से जोड़ नहीं पाएगी।
🌹 *σм ѕнαитι.*🌹

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🙏 *ॐ शांति* 🙏

अगर आप *शान्त* रह कर अपने जवाब का *इंतजार* करते हैं तो आपका *मन* ही आपके अधिकतर सवालों के *जवाब* दे देगा। इसलिये अपने मन की हर शंका को दूर करने के लिये अपने मन को *शान्त* और *स्थिर* रखें।

🌸 सुप्रभात... 

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
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ॐ शांति
 🌹 *शरीर को नित्य स्नान कराया जाता है, वस्त्र हम नित्य धोते हैं, कमरा नित्य बुहारी लगा कर साफ करते हैं। कारण यह कि एक बार की सफाई रोज काम नहीं दे सकती। मन को एक बार चिंतन−मनन− स्वाध्याय द्वारा साफ कर लिया तो सदा वह वैसा ही बना रहेगा, ऐसी आशा निरर्थक है। अभी आकाश साफ है। उस पर कब आँधी, कुहासा धूलि−बादल छा जायेंगे प्रकृति कब कुपिता हो जाएगी कहा नहीं जा सकता।*
🌹 *अन्तरात्मा पर निरन्तर छाते रहने वाले इन मलिन आवरणों की सफाई के लिये उपासना की नित्य निरन्तर आवश्यकता पड़ती है ईश्वरीय गुणों का समावेश अपने चिन्तन व्यवहार में इससे कम में हो ही नहीं सकता। आग के समीप बैठे बिना गर्मी आये कैसे?*
ओम शांति
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ओम शांति
*मनुष्य के सुख तथा दुःख का कारण उसके स्वकृत कर्म है।* कोई दूसरा व्यक्ति हमें सुखी या दुखी नहीं कर सकता है। वस्तुतः आत्मा का स्वभाव उपर जाने वाला है, किंतु बुरे कर्मो के कारण वह बोझिल हो जाती है। यदि हमारी आत्मा में शुभ भाव जैसे दूसरों की भलाई करने की भावना आदि। उत्पन्न होती है तो हमारे अच्छे कर्म होंगे, जब यह क्रम प्रकाश में आएंगे तो हमें यश सफलता ,तो उन्नति और संपदा आदि प्राप्त होगे* । जब हम अशुभ भाव जैसे  दूसरों का बुरा सोचना इत्यादि रखेंगे तो हमारे कर्म भी अशुभ होंगे  तो वे जब प्रकाश बनाएंगे तो हमें दुख विफलता अपयश, निर्धनता इत्यादि फल प्राप्त होंगे। इसलिए यह बात निराधार होती है किसी दूसरे ने हमें सुखी किया है दुखी कर दिया। हां हम दूसरों के लोगों के सुख-दुख में निमित्त जरूर बन सकते हैं, किंतु अध्यात्म जगत में निमित् कर्ता नहीं होता। जैसे पत्थर की ठोकर लगे हम गिर जाए तो पत्थर निमित्त होता है। किंतु गिरने और दुख पाने के कर्ता वह हम स्वयं होते हैं, क्योंकि हम होश पूर्वक नहीं चले ऐसे में अगर पत्थर को दोष दिया जाए तो ऐसा दोष देने वाले वह अज्ञानी कहां जाएगा ऐसे में पत्थर का क्या दोष ऐसे दोष देने वाले को अज्ञानी कहा जाएगा अंतः गहराई  से देखें तो हमारे पूर्वकृत कर्म ही हमारे वर्तमान सुख-दुख के निमित्त बनते हैं।
ॐ शांति
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*गीता सार* 


         भारत में सबसे बड़ा ग्रंथ सर्व शास्त्र मई शिरोमणि गीता गाई गई है क्योंकि दुनिया का यह एकमात्र ग्रंथ है जिसमें भगवानुवाच शब्द आता है। दुनिया के कई दूसरे ग्रंथ हैं ,किसी महान आत्मा की वाणी है ,दिव्य आत्माओं की वाणी है लेकिन श्रीमद भगवत गीता भगवान का गाया हुआ गीत है। 


💥 श्रीमद्भगवद्गीता इसीलिए महान है क्योंकि उसमें सभी वेदों शास्त्रों का सार समाया हुआ है।  

💥साथ ही साथ *श्रीमद्भगवद्गीता* को *माता* की उपमा दी गई है कि जिस तरह एक मां अपने बच्चे के अंदर अच्छे संस्कारों का सिंचन करती है ठीक इसी तरह ही श्रीमद्भगवद्गीता भी हर मानव जाति के लिए *अच्छे संस्कारों का सिंचन* करने का कार्य करती है।दूसरा इसको माता की उपमा इसीलिए दी गई है कि जिस तरह एक माता का संबंध हर बच्चे के साथ है ठीक इसी तरह हर धर्म का संबंध किसी ना किसी रूप से श्रीमद्भगवद्गीता के साथ अवश्य है। 


💥 *महाभारत* के अंदर जैसी *युद्ध* की बात की गई है पांडव और कौरवों के बीच में, उसी को ही *बाइबल* के अंदर *द होली वॉर* कहा गया है जो शैतान और फरिश्तों के बीच में दिखाया गया है। उसी को ही *इस्लाम धर्म* के अंदर *जिहाद* कहा जो अच्छाई और बुराई के बीच में युद्ध है ।

💐जिन महान आत्माओं को यह महसूस हुआ कि कहीं यह युद्ध की बातें लोगों के अंदर हिंसक वृत्ति को जन्म ना दे दे तो इसलिए उन्होंने सोचा कि इस युद्ध की बातों को निकाल कर जो आचरण की बातें हैं उन्हीं को लिया जाए । 


💥ऐसे *जैन धर्म* के अंदर सिर्फ *जितेंद्रिय* होने की बातें हैं अर्थात जहां गीता के अंदर बार-बार भगवान ने अर्जुन को कहा कि अर्जुन अपने *मन को जीतो* और मन को भटकाने वाली यह इंद्रियां हैं इसीलिए तुम यह इंद्रियों के ऊपर संयम प्राप्त करो उसको जीतो तो जितेंद्र होने की बातें यह भी गीता से ही लिया गया है।

💥 इसी तरह *महात्मा बुद्ध* ने भी यह महसूस किया कि कहीं युद्ध की बातें लोगों के अंदर हिंसक वृत्ति को जन्म न दे दे तो श्रीमद्भगवद्गीता से कर्म योग को उठाया *एक कर्म ही धर्म है* अच्छे कर्म करने की आवश्यकता है इसीलिए उन्होंने किसी मूर्ति पूजा में किसी को नहीं जोड़ा लेकिन कर्म पर जोर देते हुए उनके धर्म पद में कर्म को महत्व दिया गया कर्म की गुह्य गति को कर्म अकर्म विकर्म की गहराई को समझते हुए गीता से उसी बात को उठाया। 

💥इसी तरह देखा जाए कि *गुरु नानक देव जी* ने भी श्रीमद्भगवद्गीता से मन को मित्र बनाने की कला *मन जीते जग जीत* किस तरह से बना जाता है कि जहां भगवान ने भी अर्जुन को *छठे अध्याय* में मन को *मित्र बनाने की कला* बताइ ।

💥कहने का भावार्थ यही है कि हर धर्म को अगर देखा जाए तो हर धर्म में जो शिक्षाएं हैं जो दिव्य आत्माओं ने प्रेरणा दी हैं *वह परमात्मा के ही महा वाक्यों से प्रेरित होकर* के उन बातों के ऊपर फोकस करते हुए लोगों को उस पर अटेंशन खिंचवाने का कार्य किया है तब कहा गीता माता है।

💥एक मां का संबंध हर बच्चे के साथ है किस-किस ने कौनसी शिक्षा उठाई मां के जीवन से हर बच्चा भी मां से कोई ना कोई बात से प्रेरित होकर उनके जीवन के अंदर कोई ना कोई बात को उठा कर के अपने संस्कारों के अंदर ग्रहण करता है तो हर धर्म भी उस मा से ही उस प्रेरणा को प्राप्त करते हैं।

💥 *श्रीमद्भगवद्गीता* के अंदर जो *अमृत* है वह अमृत पान करने से उसके महत्व को समझने से और जीवन में उसको ग्रहण करने से व्यक्ति अमृत्व को प्राप्त कर सकता है दुनिया में कितने भी महान हस्तियां हो गई उन सभी महान आत्माओं के जीवन के अंदर जो अमृत को उन्होंने प्राप्त किया वह तभी किया जब गीता को आत्मसात किया ।

💥चाहे कोई भी क्षेत्र में हो चाहे वह *स्वामी विवेकानंद* हो *रविंद्र नाथ टैगोर* जी हूं *आइंस्टाइन* ही क्यों ना हो *महात्मा गांधी* क्यों ना हो हर कोई महानता के शिखर पर तभी पहुंचा या संसार में अपने नाम को अमर तभी कर पाया जब उन्होंने *गीता की शिक्षाओं* को अपने जीवन में *आत्मसात* किया।

💥 तब गीता ने उनको महानता के शिखर पर पहुंचा दिया और इसीलिए *श्रीमद्भगवद्गीता* के अंदर अगर देखा जाए तो कहीं पर भी *हिंदू शब्द नहीं* आता है क्योंकि यह पूरी मानवजाति के लिए शिक्षाएं हैं *मानवता का शास्त्र* है और इसको धर्म ग्रंथ कहो या कर्म ग्रंथ कहो जो हर पल हमें यह शिक्षा देता है कि जीवन में कर्म कैसे करनी चाहिए इसीलिए जो महान आत्माओं ने उस गीता से जो शिक्षाओं को प्राप्त किया या अपने जीवन में आत्मसात किया उसी को ही उन्होंने लोगों तक पहुंचाने का प्रयत्न किया। की आप उस बात को भी समझ कर के अगर जीवन के अंदर उस दिशा को भी पकड़ लो तो शायद आप बहुत ऊंचाई को प्राप्त कर सकेंगे जैसे हमने किया।  

💥श्रीमद्भगवद्गीता के अंदर कोई धार्मिक बातें नहीं है लेकिन प्योर अध्यात्मिक बातें हैं *कंप्लीट स्पिरिचुअलिटी* (विशुद्ध आध्यात्मिक ज्ञान ) जो गीता के अंदर है वह अतुलनीय है क्योंकि उसकी खूबी यह है कि उसमें वर्णित ज्ञान सारी मानव जाति पर लागू होता है । किसी खास संप्रदाय की मान्यता के आधार पर नहीं है और इसके अंतर्गत सभी धर्मों की मर्यादाओं की पवित्रता को सुरक्षित रखते हुए ईश्वरीय आध्यात्मिक ज्ञान को सार रूप में वर्णित किया गया है।


       .       ⛥ओम शांति ⛥



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