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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..21-09-2021*..🎋
✍🏻रिश्तों में विश्वास मौजूद है, तो मौन भी समझ में आ जायेगा औऱ अगर विश्वास नहीं हैं तो शब्दों से भी गलतफहमी हो जायेगी।
💐 *Brahma Kumaris Daily Vichar* 💐
🌷 *σм ѕнαитι*🌷
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻कुछ नया सीखने के लिए, यह स्वीकार करना जरूरी है कि, हर व्यक्ति किसी न किसी बात में, हमसे बेहतर होता है।
🌹 *Brahma Kumaris Daily Vichar*
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अनमोल वचन:
जैसे कड़वी गोलियांँ चबाई नहीं जाती निगली जाती हैं।उसी प्रकार जीवन में धोखा, अपमान, असफलता जैसी बातों को को सीधे ही निगल जाइए। उन्हें चबाते रहेंगे यानी याद करते रहेंगे तो जीवन कड़वा ही लगेगा।
🙏ओम् शांति🙏
🍁आपका दिन शुभ हो🍁
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*ओम शांति ब्रह्मा मुख द्वारा निराकार शिव भगवानुवाच* ♥
😊5000 वर्ष का पार्ट बजाने, मैं आत्मा परमधाम से इस साकार सृष्टि में उतरी l पांच तत्वों का शरीर लेकर, बना में पार्टधारी l 👨🏻🦳
🤓2500 वर्ष तक, सारी प्रकृति गुलाम थी मेरी l उस समय यह दुनिया थी, अति मीठी अति प्यारी l हर व्यक्ति, वस्तु, चीज थी, सतोप्रधान सुख भरी l 😇
👸पावन देवी देवता थे, सभी नर नारी l द्वापर युग से, लगी जब देह अभिमान की बीमारी l मिट्टी में मिल गई, सोने की दुनिया हमारी l🤴🏻
👽सभी रावण के वश होकर, बनते गए विकारी l रावण के इशारे पर नाचने लगे सभी, बनकर के बंदर और बंदरी l श्रेष्ठ चरित्र से, आत्माएं हो गई भिकारी l 👨👨👦
🤼♂️चारों तरफ शुरू हो गई, लड़ाई झगड़े, मारामारी l रोग शोक, महामारी और भुखमरी l भक्ति करते-करते भी थक गई थी आत्मा बेचारी l 🔥
🤽🏻♀️5000 वर्ष की सुख दुख भरी, कहानी जब होने आई पूरीI तभी भारत की धरती पर, आए भगवान परमपिता शिव निराकारी l 🎯
🧘🏻♂️बहुत रहम आया उनको भी, देखकर हालत हमारी l विश्व के महाराजा महारानी, आज कर रहे हैं नौकरी चाकरी l कहते हैं वह अब चलो श्रीमत पर मेरी l 🌝
🇲🇰मेरी याद से ही मिलेगी तुम्हें, मेरी शक्ति सारी l फिर से बनोगे तुम, विश्व विजेता डबल ताजधारी l अभी महाविनाश भी होगा, बड़ा भारी l 🎰
🏂जिसमें खत्म होगी, यह पतित दुनिया सारी l फिर से प्रिय भारत बनेगा, सोने की नगरी l फिर से परमधाम से आएंगे हम, बनकर के पार्ट धारी l 🤺
🎼यह सिलसिला रहेगा, निरंतर जारी l 5000 वर्ष की है यह, आत्मा परमात्मा और प्रकृति की स्टोरी l हर मनुष्य आत्मा को, इसे जानना है बहुत जरूरी l🙏🏼
🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚 *भगवान् को स्मरण कैसे करें?*
*ऐसे करो, जैसे प्यास से व्याकुल मनुष्य जल का स्मरण करता है |*
*ऐसे करो, जैसे भूख से सताया हुआ मनुष्य भोजन का स्मरण करता है |*
*ऐसे करो, जैसे घर भूला हुआ मनुष्य घर का स्मरण करता है |*
*ऐसे करो, जैसे थका हुआ मनुष्य विश्रामका स्मरण करता है |*
*ऐसे करो, जैसे भय से कातर मनुष्य शरण देने वाले का स्मरण करता है |*
*ऐसे करो, जैसे डूबता हुआ मनुष्य जीवन रक्षा का स्मरण करता है |*
*ऐसे करो, जैसे दम घुटने पर मनुष्य वायु का स्मरण करता है |*
*ऐसे करो, जैसे परीक्षार्थी परीक्षा के विषय का स्मरण करता है |*
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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*21 सितम्बर:-*_ हम आत्माओ को परमात्मा में समाना नहीं, बल्कि उनके समान बनना है।
🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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*वो तैरते तैरते डूब गये,*
*जिन्हे खुद पर गुमान था !*
*और वो डूबते डूबते भी तर गये..*
*जिन पर तू मेहरबान था !!*
ॐ शांति
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♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️
🏵️ *एक कहानी मुझे याद आती है 🏵️
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_💙एक घर में बहुत दिनों से एक वीणा रखी थी। उस घर के लोग भूल गए थे, उस वीणा का उपयोग। पीढ़ियों पहले कभी कोई उस वीणा को बजाता रहा होगा। अब तो कभी कोई भूल से बच्चा उसके तार छेड़ देता था तो घर के लोग नाराज होते थे। कभी कोई बिल्ली छलांग लगा कर उस वीणा को गिरा देती तो आधी रात में उसके तार झनझना जाते, घर के लोगों की नींद टूट जाती। वह वीणा एक उपद्रव का कारण हो गई थी। अंततः उस घर के लोगों ने एक दिन तय किया कि इस वीणा को फेंक दें -जगह घेरती है, कचरा इकट्ठा करती है और शांति में बाधा डालती है। वह उस वीणा को घर के बाहर कूड़े घर पर फेंक आए।_
_🔸वह लौट ही नहीं पाए थे फेंक कर कि एक भिखारी गुजरता था, उसने वह वीणा उठा ली और उसके तारों को छेड़ दिया। वे ठिठक कर खड़े हो गए, वापस लौट गए। उस रास्ते के किनारे जो भी निकला, वे ठहर गया। घरों में जो लोग थे, वे बाहर आ गए। वहां भीड़ लग गई। वह भिखारी मंत्रमुग्ध हो उस वीणा को बजा रहा था। जब उन्हें वीणा का स्वर और संगीत मालूम पड़ा और जैसे ही उस भिखारी ने बजाना बंद किया है, वे घर के लोग उस भिखारी से बोलेः वीणा हमें लौटा दो। वीणा हमारी है। उस भिखारी ने कहाः वीणा उसकी है जो बजाना जानता है, और तुम फेंक चुके हो। तब वे लड़ने-झगड़ने लगे। उन्होंने कहा, हमें वीणा वापस चाहिए। उस भिखारी ने कहाः फिर कचरा इकट्ठा होगा, फिर जगह घेरेगी, फिर कोई बच्चा उसके तारों को छेड़ेगा और घर की शांति भंग होगी। वीणा घर की शांति भंग भी कर सकती है, यदि बजाना न आता हो। वीणा घर की शांति को गहरा भी कर सकती है, यदि बजाना आता हो। सब कुछ बजाने पर निर्भर करता है।_
_🔸जीवन भी एक वीणा है और सब कुछ बजाने पर निर्भर करता है। जीवन हम सबको मिल जाता है, लेकिन उस जीवन की वीणा को बजाना बहुत कम लोग सीख पाते हैं। इसीलिए इतनी उदासी है, इतना दुख है, इतनी पीड़ा है। इसीलिए जगत में इतना अंधेरा है, इतनी हिंसा है, इतनी घृणा है। इसलिए जगत में इतना युद्ध है, इतना वैमनस्य है, इतनी शत्रुता है। जो संगीत बन सकता था जीवन, वह विसंगीत बन गया है क्योंकि बजाना हम उसे नहीं जानते हैं।_
*🌟🔸ओम शान्ति 🔸🌟*
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