आज का सुविचार(चिन्तन)
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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..22-09-2021*..🎋
✍🏻किसी का भी उदय अचानक नहीं होता, सूर्य भी धीरे धीरे निकलकर ऊपर उठता है, जिसमें धैर्य और तप की क्षमता है वही संसार को प्रकाशित करता है,
💐 *Brahma Kumaris Daily Vichar* 💐
🌷 *σм ѕнαитι*🌷
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻खुश रहना है तो जिंदगी के फैसले अपनी परिस्थिति देखकर ले, दुनिया को देखकर जो फैसले लेते है वो दुःखी ही रहते हैं।
🌹 *Brahma Kumaris Daily Vichar*🌹
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आंतरिक बल
-इमोशंस /भावनाए और उनके प्रभाव
-मनुष्य में मुख्य 9 साकारात्मक इमोशंस है ।
-शांति', प्रेम, सुख, आनंद और ज्ञान , 5 मुख्य सकारात्मक भावनाए/इमोशंस हैं ।
-दया, नम्रता, विनय, सम्मान ये चार सूक्ष्म साकारात्मक भावनाए हैं ।
-इसी तरह काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार ये पांच मुख्य नकारात्मक इमोशंस है ।
-ईर्ष्या, आलस्य, द्वेष और क्रूरता चार सूक्ष्म नकारात्मक इमोशंस है ।
-ये सभी इमोशंस शरीर के किसी न किसी अंग को प्रभावित करती हैं ।
-ये इमोशंस शरीर के किसी अंग पर इकठी होती रहती हैं । जब ये बढ़ जाती हैं तो किसी न किसी बीमारी के रूप में प्रकट होती हैं ।
-वास्तव में ये इमोशंस संबंधित ऊर्जा चक्रों पर इकठी होती रहती है । जब यह ज्यादा हो जाती है तो इमोशंस ऊर्जा चक्र में अवरोध पैदा करती है । जिस के परिणाम संबंधित अंग में रोग उत्पन हो जाता है ।
-नकारात्मक भावनाओ से ऐसे हार्मोन बनते है जिस से रोग पैदा होते हैं ।
-साकारात्मक भावनाए खुशनुमा रसायन पैदा करती हैं जिस से रोग ठीक होते हैं ।
-गुस्सा दिल के लिये ठीक नहीं है ।
-क्रोध के कारण अपच, दस्त और मासिक धर्म में गड़बड़ी पैदा होती है ।
-क्रोध को अगर हम दबाते हैं तो इस से लीवर के रोग लग जाते हैं । लीवर बढ़ जाता है या मोटा हो जाता है ।
-चिंता से तिल्ली के रोग हो जाते हैं । इस से थकान और अपच भी होने लगती है ।
- जिन लोगो को नीद कम आती हो तो इस से तिल्ली के रोग लग जाते हैं ।
-डर गुर्दों को प्राभावित करता है, गुर्दों के रोग लग जाते हैं तथा यूरिन पर नियंत्रण नहीं रहता ।
-जो व्यक्ति उदास रहता है उसे फेफड़ो के रोग लग जाते हैं । उदास व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है । ऐसे व्यक्ति को ही कोरोना जैसे रोग लग जाते हैं !
-उदास व्यक्ति का रोने को मन करता है ।
-हंसने से तनाव कम होता है ।
-खुश रहने से डिप्रेशन कम हो जाता है ।
-साकारात्मक भावना रखने से उम्र बढ़ती है ।
-भगवन की याद में रह कर हम जो भी साकारात्मक भावना करते हैं वह इमोशन शक्तिशाली बन जाती है और शरीर का रोग ठीक कर देती है ।
-भगवान की याद से नकारात्मक भावनाएं उठनी बंद हो जाती हैं और सकारात्मक भावनाएं शक्तिशाली बनने लगती हैं !
- अगर नकारात्मक भावनाएं ज्यादा हैं तो समझो आप भगवान को याद कम करते हैं !
♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️
प्रेरक कहा़नी 🏵️
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यह कहानी संत के ज्ञान को दर्शाने वाली कथा है क्युकि हमेशा ही ये माना जाता है की संत, गुरु, साधू और मुनि महाराज के पास उन सभी सांसारिक... समस्याओ का तुरंत हल मिल जाता है जिसके बारे में आज लोग और गृहस्थी हमेशा से ही परेशान रहते है |
समाज में साधू,संत,गुरु और मुनि ही हर समस्या की एक मात्र चाबी माने जाते रहे है और यह सही भी है की इनके पास जाने मात्र से ही हमारे मन को शांति प्राप्त हो जाती है और फिर जब इनके दो सांत्वना भरे बोल या ज्ञान बढ़ाने वाले शब्द जब हमारे कान में जाते है तो जेसे अन्दर तक आत्मा को ठंडक पहुंचती हैl
इसलिए आज एक ऐसी ही कहानी लेकर आया हूँ जिससे आप गुरु की महिमा को समझ ही जायेंगे की क्यों और कैसे ये सभी विद्धवान जन तुरंत ही हरेक के मन की समस्या का समाधान कर देते है।
एक बार गोमल सेठ अपनी दुकान पर बेठे थे दोपहर का समय था इसलिए कोई ग्राहक भी नहीं था तो वो थोडा सुस्ताने लगे इतने में ही एक संत भिक्षुक भिक्षा लेने के लिए दुकान पर आ पहुचे।
और सेठ जी को आवाज लगाई कुछ देने के लिए...
सेठजी ने देखा कि इस समय कौन आया है ?
जब उठकर देखा तो एक संत याचना कर रहा था।
सेठ बड़ा ही दयालु था वह तुरंत उठा और दान देने के लिए कटोरी चावल बोरी में से निकाला और संत के पास आकर उनको चावल दे दिया।
संत ने सेठ जी को बहुत बहुत आशीर्वाद और दुवाए दी।
तब सेठजी ने संत से हाथ जोड़कर बड़े ही विनम्र भाव से कहा कि
हे गुरुजन आपको मेरा प्रणाम मैं आपसे अपने मन में उठी शंका का समाधान पूछना चाहता हूँ।
संत ने कहा की जरुर पूछो -
तब सेठ जी ने कहा की लोग आपस में लड़ते क्यों है ?
संत ने सेठजी के इतना पूछते ही शांत स्वभाव और वाणी में कहा की
सेठ मै तुम्हारे पास भिक्षा लेने के लिए आया हूँ तुम्हारे इस प्रकार के मूर्खता पूर्वक सवालो के जवाब देने नहीं आया हूँ।
संत के मुख से इतना सुनते ही सेठ जी को क्रोध आ गया और मन में सोचने लगे की यह कैसा घमंडी और असभ्य संत है ?
ये तो बड़ा ही कृतघ्न है एक तरफ मैंने इनको दान दिया और ये मेरे को ही इस प्रकार की बात बोल रहे है इनकी इतनी हिम्मत
और ये सोच कर सेठजी को बहुत ही गुस्सा आ गया और वो काफी देर तक उस संत को खरी खोटी सुनाते रहे
और जब अपने मन की पूरी भड़ास निकाल चुके
तब कुछ शांत हुए तब संत ने बड़े ही शांत और स्थिर भाव से कहा की
जैसे ही मैंने कुछ बोला आपको गुस्सा आ गया और आप गुस्से से भर गए और लगे जोर जोर से बोलने और चिल्लाने लगे।
वास्तव में केवल विवेकहीनता ही सभी झगडे का मूल होता है यदि सभी लोग विवेकी हो जाये तो अपने गुस्से पर काबू रख सकेंगे या हर परिस्थिति में प्रसन्न रहना सीख जाये तो दुनिया में झगडे ही कभी न होंगे !!!
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