*अंतरात्मा से संपर्क कमजोर होने के कारण पाप कर्म व तनाव समस्या हमसफर बन जाता है --ब्रह्मा कुमार नारायण भाई* - fastnewsharpal.com
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*अंतरात्मा से संपर्क कमजोर होने के कारण पाप कर्म व तनाव समस्या हमसफर बन जाता है --ब्रह्मा कुमार नारायण भाई*

 नवनिर्मित विशाल सभागृह में नारी बने शक्तिशाली त्रि दिवसीय शिविर का भव्य समापन



*अंतरात्मा से संपर्क कमजोर होने के कारण पाप कर्म व तनाव समस्या हमसफर बन जाता है --ब्रह्मा कुमार नारायण भाई*



  नवापारा नगर

 हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा रहस्य यह है कि “हम खुद को ही नहीं जानते”, शायद हम अपनी प्रकृति या मूल स्वभाव को ही नहीं जानते या फिर शायद जानते हुए भी अनजान है।

जिस तरह हमें पता है कि पानी का स्वभाव तरल होता है, उसी तरह क्या हमें पता है कि मनुष्य का मूल स्वभाव क्या है? क्या है हमारा मूल स्वभाव....आत्म बोध....

 हर व्यक्ति के अन्दर एक शांत शक्ति मौजूद है जिसे हम अपनी अंतरआत्मा कहते है। यह अंतरात्मा हर परिस्थति में सही होती है। यह अंतरात्मा हमेशा हमें सही रास्ता दिखाती है।





 जब भी हम कुछ गलत कर रहे होते है, तब हमें बड़ा अजीब सा लगता है जैसे कोई यह कह रहा कि वह कार्य मत करो। यह हमारे अन्दर मौजूद आतंरिक शक्ति ही होती है जो हमें बुरा कार्य करने से रोकती है।

 कहा जाता है कि हर मनुष्य के अन्दर ईश्वर का अंश होता है, यह ईश्वर का अंश हमारी अंतरआत्मा ही होती है। हमारी प्रकृति या स्वभाव - शांत, शक्ति, प्रेम, सुख, आनंद, पवित्रता, ज्ञान, सद्भाव, दूसरों की सहायता और अच्छाई है। यह विचार इंदौर से पधारे ब्रह्माकुमार नारायण भाई ने गोबरा नवापारा नगर के ओम शांति कालोनी में स्थित ब्रह्माकुमारी   सभागृह में सत्यता की शक्ति से नारी सशक्तिकरण विषय पर शहर की महिलाओं को तीन दिवसीय शिविर के समापन अवसर पर संबोधित करते हुए खुशनुमा जीवन के रहस्य पर आपने बताया कि



 हर मनुष्य के अन्दर यह शांत और अद्भुत शक्ति मौजूद है, चाहे वह एक अपराधी हो या संत या और कोई व्यक्ति। लेकिन फिर क्यों एक संत सही मार्ग पर चलता है और अपराधी गलत मार्ग पर? ऐसा इसलिए होता है क्योंकि संत को अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनाई देती है लेकिन अपराधी को वह आवाज अब सुनाई नही देती।   दरअसल जब हम अपनी अंतरात्मा की आवाज को अनसुना कर देते है तो हमारा अपनी अंतरात्मा से संपर्क कमजोर हो जाता है।

 जब हम दूसरी बार कुछ बुरा करने जा रहे होते है तो हमें अपनी अंतरात्मा की आवाज फिर महसूस होती है लेकिन इस बार वह आवाज इतनी मजबूत नहीं होती क्योंकि हमारा अपनी अंतरात्मा से संपर्क कमजोर हो चुका होता है। 

 जैसे जैसे हम अपनी अंतरात्मा की आवाज को अनसुना करते जाते है वैसे वैसे हमारा अपनी अंतरात्मा के साथ संपर्क कमजोर होता जाता है और एक दिन ऐसा आता है कि हमें वो आवाज बिल्कुल नहीं सुनाई देती।जैसे जैसे हमारा अपनी अंतरात्मा के साथ संपर्क कमजोर होता जाता है वैसे वैसे हम उदास रहने लगते है और खुशियाँ भौतिक वस्तुओं में ढूंढने लगते है। हम समस्याओं को हल करने में असक्षम हो जाते है जिससे “तनाव” हमारा हमसफ़र बन जाता है। कार्यक्रम के अंत में सेवा केंद्र संचालिका ब्रम्हाकुमारी पुष्पा बहन ने बताया कि खुशी हमारे श्रेष्ठ विचारों पर निर्भर करती है ना कि भौतिक साधनों पर ।सत्य विचार हमें राजयोग के द्वारा मिलते हैं जो वर्तमान समय स्वयं निराकार परमात्मा इस सृष्टि पर आ कर के हमें सत्य ज्ञान प्रदान कर रहे हैं ।उस सत्य ज्ञान को धारण करने से हमारी चेतना में निखार आने लगता है हमारी अंतरात्मा से संबंध जुटने लगते हैं।  अंतरात्मा के अनुसार कर्म करने से जीवन खुशनुमा बनने लगता है। शहर की अनेक सैकड़ों नारियो ने  इसमें भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में ब्रह्मा कुमारी प्रिया बहन ने सबको शारीरिक एक्सरसाइज कराई व कार्यक्रम का संचालन किया।




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